रंग-बिरंगी पारंपरिक वेशभूषा में उमड़ा जनसैलाब, मां अंबे की आराधना में झूमे हजारों श्रद्धालु
तिल्दा-नेवरा। ढोल की थाप पर थिरकते कदम, संगीत की लय पर घूमते प्रतिभागी और पारंपरिक परिधानों की मनमोहक छटा। तिल्दा-नेवरा के दुर्गा बाड़ा मैदान में पांच दिवसीय गरबा महोत्सव का शुभारंभ भक्ति, उल्लास और उत्साह के बीच हुआ। सार्वजनिक दुर्गा उत्सव समिति द्वारा आयोजित इस महोत्सव के पहले ही दिन हजारों श्रद्धालु गरबा की रंगीन छटा देखने और मां अंबे की आराधना में शामिल होने पहुंचे।

महोत्सव की शुरुआत मां दुर्गा की आरती के साथ हुई। इसके बाद गरबा का पहला दौर शुरू होते ही पूरा मैदान संगीत की धुनों पर झूम उठा। ‘हे मां शेरावाली, ऊंचे डेरों वाली’ और ‘राधा कैसे न जले’ जैसे गीतों ने माहौल को भक्तिमय बना दिया। आयोजन में प्रतिभागियों ने नृत्य के माध्यम से भक्ति और भारतीय संस्कृति के विविध रंग प्रस्तुत किए। कोई राधा-कृष्ण के रूप में नजर आया, तो किसी ने पुष्पा शैली और पारंपरिक प्रस्तुतियों से दर्शकों का ध्यान आकर्षित किया। कुछ प्रतिभागी श्रीनाथजी को सिर पर धारण किए तो कुछ अर्धनारीश्वर के स्वरूप में गरबा करते दिखाई दिए।
गरबा महोत्सव की खासियत केवल नृत्य तक सीमित नहीं रही। रंग-बिरंगी चनिया-चोली, कढ़ाईदार परिधान, पारंपरिक आभूषण और घूमते घाघरों ने आयोजन की रौनक बढ़ा दी। आकर्षक वेशभूषा में सजे प्रतिभागियों के बीच कदमों की लय, शारीरिक संतुलन और सामूहिक तालमेल का शानदार संगम देखने को मिला। कई प्रतिभागियों ने अपने परिधान और विशेष रूप-सज्जा की तैयारी एक-दो महीने पहले से ही शुरू कर दी थी।
सार्वजनिक दुर्गा उत्सव समिति का यह गरबा महोत्सव नगरवासियों के लिए खास आकर्षण का केंद्र रहता है। हर वर्ष बड़ी संख्या में लोग इस आयोजन का इंतजार करते हैं। इस बार भी पहले दिन से ही मैदान में उत्साह और आस्था का माहौल दिखाई दिया। अलग-अलग रूपों और रंगों में सजे प्रतिभागियों का एक साथ ताल मिलाकर गरबा करना आयोजन के सबसे आकर्षक दृश्यों में शामिल रहा।
बैठने के लिए 1500 लोगों की व्यवस्था
आयोजन समिति के वरिष्ठ सदस्य आयुष कोटवानी और बबलू भागवानी ने बताया कि गरबा देखने आने वाले श्रद्धालुओं के लिए बैठने की समुचित व्यवस्था की गई है। घेरे सहित लगभग 1500 लोगों के एक साथ बैठकर गरबा देखने की व्यवस्था की गई है। समिति को सहयोग देने वाले लोगों के लिए बैठने की विशेष व्यवस्था है, जबकि अन्य दर्शक भी अपनी सुविधानुसार कुर्सियों पर बैठकर आयोजन का आनंद ले सकते हैं।
उन्होंने बताया कि करीब दो लाख वाट के साउंड सिस्टम पर संगीत की धुन गूंजते ही प्रतिभागियों में गरबा करने का उत्साह बढ़ जाता है। प्रतिभागियों के लिए विभिन्न श्रेणियां भी निर्धारित की गई हैं। पांच दिनों तक चलने वाला यह गरबा महोत्सव 19 अक्टूबर तक आयोजित किया जाएगा।

