प्रदोष काल में लक्ष्मी-गणेश पूजन विशेष फलदायी
दिवाली पर रविवार को लक्ष्मी-गणेश पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 5:54 से रात 7:50 बजे तक रहेगा. प्रदोष काल, वृषभ लग्न और अमावस्या तिथि पर सही समय पर पूजन करने से विशेष लाभ होता है.
दिवाली का त्योहार हिंदू धर्म के प्रमुख त्योहारों में से एक है. हर साल कार्तिक मास की अमावस्या तिथि को दीपावली का पर्व मनाया जाता है. इस दिन घरों में दीप जलाने के साथ भगवान गणेश और माता लक्ष्मी की पूजा करने की परंपरा है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, दिवाली की शाम प्रदोष काल में मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा करना विशेष फलदायी माना जाता है. मान्यता है कि विधि-विधान से पूजन करने पर घर में सुख-समृद्धि और खुशहाली आती है. दिवाली पर लक्ष्मी-गणेश पूजन का शुभ मुहूर्त, प्रदोष काल और अमावस्या तिथि का समय.
दिवाली2026 पर लक्ष्मी-गणेश पूजा का शुभ मुहूर्त दिवाली के दिन मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा प्रदोष काल में करना शुभ माना जाता है. इस साल 8 नवंबर को लक्ष्मी-गणेश पूजन का शुभ मुहूर्त शाम 5 बजकर 54 मिनट से रात 7 बजकर 50 मिनट तक रहेगा. इस दौरान भक्त विधि-विधान से भगवान गणेश और माता लक्ष्मी की पूजा कर सकते हैं. पूजा की कुल अवधि 1 घंटा 56 मिनट रहेगी. ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, प्रदोष काल में वृषभ लग्न का संयोग लक्ष्मी पूजन के लिए विशेष महत्व रखता है. इसे स्थिर लग्न माना जाता है. मान्यता है कि इस दौरान मां लक्ष्मी की पूजा करने से घर में धन-धान्य और सुख-समृद्धि का वास होता है.
पंचांग के अनुसार, कार्तिक माह की अमावस्या तिथि का आरंभ 8 नवंबर को सुबह 11 बजकर 27 मिनट पर होगा। अमावस्या तिथि का समापन 9 नवंबर को दोपहर 12 बजकर 31 मिनट पर होगा। दिवाली के दिन प्रदोष काल शाम 5 बजकर 31 मिनट से रात 8 बजकर 9 मिनट तक रहेगा। दिवाली यानी लक्ष्मी पूजा का आरंभ 8 नवंबर को शाम 5 बजकर 54 मिनट पर होगा और समापन शाम 7 बजकर 50 मिनट पर होगा।
दीपावली पर कैसे करें विधि-विधान से मां लक्ष्मी की पूजा?
सबसे पहले घर की पूर्व दिशा या ईशान कोण में एक साफ चौकी स्थापित करें।
चौकी पर लाल या गुलाबी रंग का कपड़ा बिछाएं।
अब चौकी पर भगवान गणेश की प्रतिमा रखें और उनके दाहिनी ओर मां लक्ष्मी की मूर्ति स्थापित करें।
पूजा के लिए आसन पर बैठें और अपने चारों ओर जल छिड़ककर पूजा स्थल को शुद्ध करें।
इसके बाद पूजा का संकल्प लेकर विधि-विधान से आराधना शुरू करें।
एक मुखी घी का दीपक जलाकर पूजा का शुभारंभ करें।
मां लक्ष्मी और भगवान गणेश को फूल, मिठाई और अन्य पूजन सामग्री अर्पित करें।
सबसे पहले भगवान गणेश के मंत्रों का जाप करें. इसके बाद मां लक्ष्मी के मंत्रों का उच्चारण करें।
पूजा के अंत में दोनों देवी-देवताओं की आरती उतारें और शंख बजाकर पूजा संपन्न करें।
घर में दीपक जलाने से पहले पांच दीपकों को एक थाली में रखकर उनकी पूजा करें। उन पर फूल आदि अर्पित करने के बाद घर के अलग-अलग हिस्सों में दीपक सजाएं।
घर के अलावा मंदिर और कुएं के पास भी दीपक जलाने की परंपरा है।
. दीपावली की पूजा के दौरान लाल, पीले या चमकीले रंग के वस्त्र पहनना शुभ माना जाता है। वहीं, काले, भूरे और नीले रंग के कपड़े पहनने से बचने की मान्यता है।
दिवाली के दिन न करें ये गलतियां
- वाद-विवाद न करें।
- शाम के समय न सोएं नहीं।
- घर में अंधेरा न रखें।
- शाम को झाड़ू न लगाएं।
- धारदार या चमड़े की चीजें न लाएं।
- लोहे या प्लास्टिक के बर्तनों का उपयोग न करें।
- पूजा स्थल को खाली न छोड़ें।
दिवाली पर उल्लू दिखना शुभ
उल्लू को माता लक्ष्मी का वाहन माना गया है। इसलिए दिवाली की रात अगर आपको उल्लू दिख जाए तो इसे बहुत शुभ माना जाता है। इसका अर्थ है कि माता लक्ष्मी आपकी ओर आकर्षित हो रही हैं और अब आपके जीवन में धन की वर्षा होने वाली है

