16 शृंगार कर सजधज कर पहुंचीं महिलाएं, सामूहिक पूजन में शामिल हुए दंपती; थालियां बदलकर सुनी वीरावती की कथा
तिल्दा-नेवरा। पति की लंबी उम्र, सुख-समृद्धि और अखंड सौभाग्य की कामना के साथ गुरुवार को तिल्दा-नेवरा शहर में करवा चौथ का पर्व श्रद्धा, आस्था और उत्साह के साथ मनाया गया। सुहागिन महिलाओं ने दिनभर निर्जला व्रत रखकर विधि-विधान से करवा माता की पूजा-अर्चना की। शाम होते ही सोलह शृंगार कर सजी-धजी महिलाओं ने पूजन की तैयारियां शुरू कर दीं। रात में चंद्रदेव ने दर्शन नही दिया तो महूर्त अनुसार पूजा अर्चना कर , छलनी से पति का दीदार किया तथा पति के हाथों जल ग्रहण कर व्रत का पारण किया। इस दौरान शहर के

विभिन्न स्थानों पर सामूहिक प…
दो दिनों से लगातार हो रही बेमौसम बारिश और बूंदाबांदी के कारण चंद्रमा के दर्शन को लेकर महिलाओं में चिंता थी।बावजूद उन्हें भरोसा था की रात में चांद नजर आएगा लेकिन चंद्रदेव ने दर्शन नही दिया , तो किसी ने दीपक की लौ के बीच निहाराऔर अपने पति की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की। इसके बाद पति के हाथों जल ग्रहण कर व्रत खोला।
पूजन में शामिल हुए दंपती
शहर में कई स्थानों पर महिलाओं ने सामूहिक रूप से करवा चौथ का पूजन किया। इस दौरान महिलाओं ने पारंपरिक रीति-रिवाज के अनुसार पूजन सामग्री और थालियां बदलकर वीरावती की कथा सुनी। कथा के माध्यम से व्रत की धार्मिक मान्यताओं और पति की दीर्घायु के लिए किए जाने वाले इस उपवास के महत्व को याद किया गया। सामूहिक पूजन के दौरान महिलाओं ने एक-दूसरे को करवा चौथ की शुभकामनाएं भी दीं।
केसरवानी मोहल्ला स्थित राधा-कृष्ण मंदिर में महिलाओं ने भजन-कीर्तन कर भक्तिमय वातावरण बनाया। मंदिर परिसर में पूजन और धार्मिक गतिविधियों के बीच महिलाओं ने करवा माता से अपने परिवार की खुशहाली की प्रार्थना की। पर्व के दौरान कई स्थानों पर पति-पत्नी ने साथ मिलकर पूजन किया और इस परंपरा को उत्साहपूर्वक निभाया।
सास-बहू ने साथ रखा व्रत, पूजा के बाद खोला उपवास
करवा चौथ का पर्व पारिवारिक प्रेम और आपसी विश्वास का भी प्रतीक बना। साक्षी केसरवानी ने दूसरी बार करवा चौथ का व्रत रखा। वहीं, उनकी सास ज्योति केसरवानी विवाह के बाद से ही नियमित रूप से यह व्रत रखती आ रही हैं। इस बार ज्योति की छोटी भू रितु ने भी व्रत रखा इस बार सास-बहूओ ने साथ मिलकर पूजा-अर्चना की और पति का दीदार कर व्रत खोला। यह दृश्य पर्व की परंपरा के साथ परिवार में पीढ़ियों से चली आ रही आस्था और संस्कारों की झलक भी प्रस्तुत करता नजर आया।
कुछ परिवारों में पुरुषों ने भी पत्नी के साथ व्रत रखकर इस पर्व में सहभागिता निभाई। वहीं, कई पतियों ने घर के कामकाज में सहयोग कर अपनी जीवनसंगिनी का साथ दिया। दिनभर के निर्जला उपवास के बाद चांद के दर्शन और व्रत के पारण के साथ घर-परिवार में खुशियों का माहौल रहा।
रात में जब आसमान में चंद्रमा दिखाई नही दिया तो महूर्त रात 8,20 के बाद सुहागिनों पूजा कर शिव से प्रार्थना कर सुहाग सलामत रहे, पति स्वस्थ रहें और दांपत्य जीवन में प्रेम, विश्वास व खुशहाली बनी रहे। इसी आस्था और परंपरा के साथ तिल्दा-नेवरा में करवा चौथ का पर्व संपन्न हुआ

