Homeछत्तीसगढ़जोगी कुआं सतनाम धाम में धूमधाम से मना विजयादशमी पर्व

जोगी कुआं सतनाम धाम में धूमधाम से मना विजयादशमी पर्व

110 महिलाओं की श्वेत वस्त्रधारी शोभायात्रा बनी आकर्षण का केंद्र, सांस्कृतिक कार्यक्रम में उमड़ा जनसैलाब

तिल्दा नेवरा ..तिल्दा के बैकुंठ स्थित जोगी कुआं सतनाम धाम में विजयादशमी का पर्व श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के साथ धूमधाम से मनाया गया। पर्व के अवसर पर निकाली गई भव्य शोभायात्रा और सांस्कृतिक कार्यक्रम ने आयोजन को यादगार बना दिया। ग्राम बहेसर से निकली शोभायात्रा में 110 महिलाओं ने श्वेत वस्त्र धारण कर हिस्सा लिया। डीजे की धुन पर उत्साहपूर्वक थिरकते श्रद्धालु पालो लेकर जोगी कुआं सतनाम धाम पहुंचे। शोभायात्रा में श्रद्धालुओं का उत्साह देखते ही बन रहा था। पूरे मार्ग पर भक्ति और उल्लास का माहौल रहा।

सांस्कृतिक कार्यक्रम में उमड़ी भीड़

विजयादशमी पर्व के अवसर पर जोगी कुआं सतनाम धाम के सांस्कृतिक मंच पर डॉ. राजेंद्र रंगीला की प्रस्तुति का आयोजन किया गया। कार्यक्रम को देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। दर्शकों की भीड़ से पूरा मैदान खचाखच भरा रहा। आसपास के गांवों के साथ ही दूर-दराज के क्षेत्रों से सतनामी समाज के लोग भी मेले में शामिल हुए। लोगों ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का आनंद लेते हुए पर्व की खुशियां साझा कीं।

श्रद्धा के साथ दिखी सामाजिक एकजुटता

शोभायात्रा में महिलाओं की बड़ी भागीदारी और सांस्कृतिक कार्यक्रम में उमड़ी भीड़ ने आयोजन की भव्यता को विशेष बना दिया। पूरे परिसर में सतनाम पंथ के प्रति आस्था और सामाजिक एकजुटता का वातावरण दिखाई दिया। जोगी कुआं सतनाम धाम में दिनभर श्रद्धालुओं की चहल-पहल बनी रही।

कार्यक्रम में ग्राम बहेसर की सरपंच सविता सेवक बर्मन सहित साधेलाल डहरिया, बिसराम कुर्रे, लालाराम गेंडरे, शिवकुमार टंडन, चरण दास चेलक, कृष्णा राय, रोमदास बर्मन, रुवेल सोनवानी, देवेंद्र बघेल, रोहित आडील, कबीर चेलक, सुधीर चेलक, संजू चेलक, भगवती भारती, विनोद गायकवाड़, भगवान दास सोनवानी, रामकुमार लहरे, गंगाराम बंजारे, दिनेश बंजारे, गोविंद बर्मन, मनोज कुर्रे और ताराचंद बंजारे सहित समाज के अनेक लोग उपस्थित रहे।

कार्यक्रम की जानकारी एवं संचालन धर्मगुरु बालकदास सतनाम सेवा समिति के अध्यक्ष तथा भाजपा तिल्दा ग्रामीण के महामंत्री अधिवक्ता दिनेश गायकवाड़ ने किया। विजयादशमी का यह आयोजन श्रद्धा, सांस्कृतिक उल्लास और सामाजिक सद्भाव का प्रतीक बना।

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