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गायत्री जीवन जीने का दर्शन दिखाती है, यज्ञ सिखाता है जीवन जीने की कला

तिल्दा-नेवरा। अखिल विश्व गायत्री परिवार शांतिकुंज हरिद्वार के तत्वावधान में विश्व शांति, आरोग्य और सकारात्मक वातावरण के लिए रविवार को गृहे-गृहे गायत्री महायज्ञ अभियान का आयोजन किया गया। अभियान के तहत तिल्दा-नेवरा के विभिन्न क्षेत्रों के 108 घरों में एक साथ गायत्री महायज्ञ संपन्न कराया गया।

आयोजन का मुख्य उद्देश्य घर-घर यज्ञ परंपरा को जागृत करना, आध्यात्मिक एवं सकारात्मक वातावरण का निर्माण करना तथा नए परिवारों को गायत्री परिवार के मिशन से जोड़ना था। अभियान के तहत देश-विदेश में गायत्री परिवार से जुड़े परिजन निर्धारित समय पर अपने घरों में गायत्री मंत्र एवं महामृत्युंजय मंत्र के साथ आहुतियां अर्पित करते हैं।
गायत्री मंदिर में यज्ञ के बाद घर-घर पहुंचे आचार्य

तिल्दा स्थित गायत्री मंदिर में महिला मंडल और गायत्री परिवार से जुड़े लोग परिवार सहित पहुंचे। बलौदाबाजार, भाटापारा, सुहेला और कसडोल क्षेत्र से भी गायत्री परिवार के सदस्य कार्यक्रम में शामिल हुए। सर्वप्रथम गायत्री मंदिर में यज्ञ कर आहुतियां अर्पित की गईं।

इसके बाद शिक्षक कॉलोनी, सोनी हॉस्पिटल के पीछे स्थित कॉलोनी और कोहका रोड क्षेत्र सहित विभिन्न स्थानों के 108 घरों में आचार्यों ने गृहे-गृहे यज्ञ संपन्न कराया। कार्यक्रम के बाद दाउलाल वर्मा और घनश्याम वर्मा ने यज्ञ संपन्न कराने वाले आचार्यों का सम्मान किया।

‘ज्ञान और कर्म जीवन रथ के दो पहिए’
जयनारायण अग्रवाल ने कहा कि गायत्री और यज्ञ हमारी संस्कृति के माता-पिता हैं। गायत्री हमें जीवन जीने का दर्शन दिखाती है और यज्ञ हमें जीवन जीने की कला सिखाता है। ज्ञान और कर्म जीवन रूपी रथ के दो पहिए हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में मानव समाज अनास्था के दौर से गुजर रहा है, ऐसे में गायत्री और यज्ञ की प्रेरणा का महत्व और बढ़ जाता है।
कुसुम वर्मा ने कहा कि आज साधन तो बहुत हैं, लेकिन साधना का अभाव है। इसी कारण ज्ञान, धन और शक्ति उपलब्ध होने के बाद भी मनुष्य को सुख, शांति और संतुष्टि नहीं मिल पा रही है। स्थायी शांति और संतुष्टि के लिए गायत्री उपासना और यज्ञ को जीवन में अपनाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि वेदमाता, देवमाता और विश्वमाता गायत्री की उपासना तथा त्याग, परोपकार और संगठन की प्रेरणा देने वाला यज्ञ विश्व शांति के लिए आवश्यक है।

कार्यक्रम में दाउलाल वर्मा, घनश्याम वर्मा, जयनारायण अग्रवाल, रूपवती वर्मा, कुसुम वर्मा, चंपा वर्मा, पूर्णिमा वर्मा, कल्याणी वर्मा, लक्ष्मण वर्मा सहित बड़ी संख्या में गायत्री परिवार के सदस्य शामिल हुए

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