नाराज नेताओं पर दोनों दलों की नजर, दलबदल को कांग्रेस ने बताया ट्रेलर; भाजपा ने कांग्रेस के भविष्य पर उठाए सवाल
रायपुर। छत्तीसगढ़ में आगामी नगरीय निकाय चुनाव से पहले राजनीतिक जोड़-तोड़ का खेल तेज हो गया है। भाजपा और कांग्रेस दोनों ही एक-दूसरे के खेमे में सेंधमारी की कोशिश में जुटे हैं। स्थानीय स्तर पर नाराज चल रहे नेताओं और प्रभावशाली पदाधिकारियों पर दोनों दलों की नजर है। चुनावी तैयारियों के बीच नेताओं के पाला बदलने से प्रदेश की सियासत गरमाने लगी है।
दिसंबर 2026 में कार्यकाल पूरा होने वाले 15 नगरीय निकायों में चुनाव प्रस्तावित हैं। इनमें 4 नगर निगम, 5 नगर पालिका परिषद और 6 नगर पंचायत शामिल हैं। इसके अलावा नवगठित तमनार और बड़ी करेली नगर पंचायत में भी आम चुनाव कराया जाना है। राज्य निर्वाचन आयोग ने जुलाई में इन चुनावों की तैयारियों की समीक्षा कर संबंधित विभागों को आवश्यक प्रक्रियाएं समय पर पूरी करने के निर्देश दिए थे।
इन चुनावों को लेकर भाजपा और कांग्रेस ने संगठन स्तर पर तैयारियां तेज कर दी हैं। भाजपा ने 15 निकायों के लिए प्रभारी और सहप्रभारी नियुक्त किए हैं, वहीं कांग्रेस ने भी चुनावी क्षेत्रों में पर्यवेक्षकों की जिम्मेदारी तय कर संगठन को सक्रिय करना शुरू कर दिया है।
नाराज नेताओं को साधने की कोशिश
दोनों प्रमुख दलों की नजर ऐसे नेताओं और कार्यकर्ताओं पर है, जो टिकट वितरण, संगठनात्मक फैसलों या स्थानीय राजनीति को लेकर नाराज चल रहे हैं। निकाय चुनाव में स्थानीय समीकरण और व्यक्तिगत प्रभाव महत्वपूर्ण होने के कारण नेताओं का एक दल से दूसरे दल में जाना चुनावी गणित को प्रभावित कर सकता है।
हाल के राजनीतिक घटनाक्रमों के बीच कांग्रेस ने दलबदल की घटनाओं को आगामी राजनीतिक बदलाव का ट्रेलर बताया है। वहीं भाजपा ने कांग्रेस में हो रहे बदलावों को लेकर उसके संगठन और राजनीतिक भविष्य पर सवाल खड़े किए हैं। दोनों दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी तेज होता दिखाई दे रहा है।
15 निकायों में दिसंबर में खत्म होगा कार्यकाल
दिसंबर 2026 में जिन निकायों का कार्यकाल पूरा होना है, उनमें बीरगांव, भिलाई, भिलाई-चरौदा और रिसाली नगर निगम शामिल हैं। इसके अलावा जामुल, सारंगढ़, बैकुंठपुर, शिवपुर-चरचा और खैरागढ़ नगर पालिका परिषद तथा प्रेमनगर, मारो, कोंटा, नरहरपुर, भैरमगढ़ और भोपालपट्टनम नगर पंचायत शामिल हैं।
राज्य निर्वाचन आयोग की तैयारियों से साफ है कि चुनावी प्रक्रिया को लेकर प्रशासनिक स्तर पर काम शुरू हो चुका है। हालांकि चुनाव की अंतिम तारीख अभी घोषित नहीं हुई है। ऐसे में आने वाले दिनों में टिकट के दावेदारों की सक्रियता और दल-बदल की राजनीति और तेज होने के आसार हैं।

