अंगद के पांव की तरह अडिग हनुमान जी, मशीनें भी नहीं हिला पाईं प्रतिमा
उज्जैन =कहते हैं… जहां हनुमान जी का वास होता है,.. वहां उनकी इच्छा के बिना पत्ता भी नहीं हिलता… और उज्जैन में इन दिनों लोग इस कहावत को सिर्फ सुन नहीं रहे, बल्कि साक्षात देख और महसूस कर रहे हैं….।
सिंहस्थ 2028 की तैयारियों के बीच सड़क चौड़ीकरण के लिए करीब 170 साल पुराने हनुमान मंदिर की प्रतिमा को दूसरी जगह ले जाने की कोशिश की गई… आधुनिक मशीनें आईं, इंजीनियर आए, तकनीकी विशेषज्ञ जुटे… लेकिन हनुमान जी की प्रतिमा अपने स्थान से टस से मस नहीं हुई। तमाम तकनीकें आजमाने के बाद भी जब प्रतिमा नहीं हिली, तो इंजीनियर भी हैरान हैं और श्रद्धालुओं की आस्था और गहरी होती जा रही है।
उज्जैन की इन दिनों पुर देश में चर्चा हो रही है.. सड़क चौड़ीकरण को लेकर कंठाल से छत्री चौक मार्ग पर स्थापित 17 दशक पुरानी भगवान हनुमान की प्रतिमा को हटाने का मामला अब सिर्फ सड़क चौड़ीकरण का मामला नहीं रह गया है… यह मामला आस्था, विश्वास और भगवान की इच्छा से जुड़ गया है। प्रतिमा के चारों ओर सुरक्षा के लिए टेंट लगाया गया है… और इसी के साथ यहां का माहौल भी पूरी तरह भक्तिमय हो गया है। कोई इसे दैवीय शक्ति मान रहा है, तो कोई कह रहा है—जब भगवान खुद अपनी जगह से नहीं हट रहे, तो शायद यह भी उनकी ही इच्छा है।
आखिर क्या है इस प्रतिमा के अडिग रहने की वजह? क्या तकनीक भी यहां आस्था के आगे बेबस नजर आ रही है? और अब प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती क्या है?
देखिए हमारी ये खास रिपोर्ट…
उज्जैन..जिसे महाकाल की नगरी और आस्था की नगरी कहा जाता है… इसी नगरी में इन दिनों हनुमान जी की एक प्रतिमा लोगों के बीच चर्चा और श्रद्धा का केंद्र बनी हुई है।
कंठाल से छत्री चौक यानी बड़ा सराफा मार्ग पर स्थित करीब 170 साल पुराने खड़े हनुमान मंदिर की प्रतिमा को सड़क चौड़ीकरण के लिए दूसरी जगह शिफ्ट किया जाना है।
लेकिन पिछले दो दिनों से प्रशासन और इंजीनियरों की टीम लगातार प्रयास कर रही है… अत्याधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल किया जा रहा है… बावजूद इसके प्रतिमा अपने स्थान से हिली तक नहीं।
प्रतिमा की सुरक्षा को देखते हुए प्रशासन ने फिलहाल मौके पर टेंट लगाकर सुरक्षा व्यवस्था की है।
वहीं दूसरी तरफ श्रद्धालुओं का मानना है कि यह हनुमान जी की इच्छा है… और इसी विश्वास के साथ मौके पर लोगों की भीड़ बढ़ती जा रही है।
VO
प्रतिमा के नहीं हटने के बाद अब मामला आस्था और प्रशासन के बीच संवेदनशील मोड़ पर पहुंच गया है।
मंगलवार को मंदिर परिसर में सैकड़ों की संख्या में हिंदू संगठनों के कार्यकर्ता और स्थानीय नागरिक पहुंचे… जहां भव्य महाआरती कर हनुमान जी से मंदिर की रक्षा की प्रार्थना की गई।
मंदिर के पुजारी और समिति के सदस्यों का कहना है कि जब मंदिर के दोनों ओर से मार्ग मौजूद है, तो प्रशासन को अपने फैसले पर पुनर्विचार करना चाहिए।
उनकी मांग साफ है—पहले प्रशासन लिखित गारंटी दे कि प्रतिमा को बिना किसी नुकसान के सुरक्षित तरीके से टंकी चौक पर स्थापित किया जाएगा… उसके बाद ही प्रतिमा को हाथ लगाया जाए।
उज्जैन ही नहीं, बल्कि इंदौर से बुलाए गए विशेष इंजीनियरों और तकनीकी विशेषज्ञों ने भी प्रतिमा को सुरक्षित तरीके से हटाने के लिए पूरी ताकत लगा दी।लेकिन दो दिन के प्रयास के बाद भी तस्वीर जस की तस है।अब प्रशासन किसी भी तरह की जल्दबाजी के मूड में नहीं है। प्रतिमा के आधार की स्थिति जानने के लिए करीब डेढ़ फीट गहरा गड्ढा खोदा गया है।इसके बाद पुरातत्व विशेषज्ञों की टीम अत्याधुनिक मशीनों से प्रतिमा के आधार, उसकी अंदरूनी संरचना और आसपास की मिट्टी की स्कैनिंग करेगी।रिपोर्ट सामने आने के बाद ही अगली तकनीक और आगे की कार्रवाई तय होगी।यानी फिलहाल मशीनें भी रुकी हैं… और प्रशासन भी इंतजार में है।
लेकिन प्रशासन के सामने समय की चुनौती भी कम नहीं है।दो दिन बाद इसी मार्ग से भगवान महाकाल की राजसी सवारी निकलनी है… ऐसे में सड़क चौड़ीकरण का काम जल्द पूरा करना प्रशासन के लिए जरूरी है।
लेकिन दूसरी तरफ करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े इस मंदिर और प्रतिमा को किसी भी तरह का नुकसान पहुंचाना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है।
इसीलिए अब हर कदम बेहद सावधानी से उठाया जा रहा है।
,,फिलहाल हनुमान जी की प्रतिमा अंगद के पांव की तरह अपने स्थान पर अडिग है…मशीनें अपना काम करेंगी… विशेषज्ञ अपनी तकनीक आजमाएंगे… और आखिरकार प्रशासन प्रतिमा को हटाने की कोशिश करेगा।
लेकिन इस पूरी घटना ने एक बात जरूर साबित कर दी है—मूर्ति भले ही टस से मस न हुई हो… लेकिन हनुमान जी के प्रति लोगों की आस्था जरूर और मजबूत हो गई है।किसी के लिए यह तकनीकी चुनौती है… किसी के लिए महज एक संयोग… लेकिन श्रद्धालुओं के लिए यह उनके बजरंगबली की इच्छा है।और शायद इसी विश्वास के साथ लोग कह रहे हैं…जहां बजरंगबली की इच्छा हो, वहां रास्ते भी वही बनाते हैं… और मंजिल भी वही तय करते हैं।
अब देखना यह होगा कि मशीनों की ताकत भारी पड़ती है… या फिर हनुमत लाल की अडिग प्रतिमा एक बार फिर लोगों की आस्था को कोई नया संदेश देती है। कैमरा मेन नीरजके साथ प्रतीक कुमार रजनी VCN टाइम्स उज्जैन

