डोगरगढ- चलती ट्रेन में इंसानियत की ऐसी तस्वीर सामने आई, जिसने हर किसी का दिल जीत लिया। सिकंदराबाद एक्सप्रेस के जनरल कोच में सफर के दौरान गर्भवती महिला को अचानक प्रसव पीड़ा शुरू हुई। उस वक्त ट्रेन में मौजूद दो महिला यात्री कुछ देर के लिए डॉक्टर बन गईं। उन्होंने हिम्मत, सूझबूझ और ममता के साथ सुरक्षित प्रसव कराया। कुछ ही देर बाद नवजात की पहली किलकारी से पूरा डिब्बा गूंज उठा और यात्रियों ने मुस्कुराते हुए कहा—”बेटा हुआ है।” डोंगरगढ़ स्टेशन पर जीआरपी और आरपीएफ ने मां और नवजात को ट्रेन से उतारा और अस्पताल पहुंचाया, जहां दोनों पूरी तरह स्वस्थ हैं।
सिकंदराबाद एक्सप्रेस के जनरल कोच में सुबह अचानक माहौल बदल गया। कवर्धा निवासी 21 वर्षीय भारती नट को तेज प्रसव पीड़ा होने लगी। डिलीवरी में अभी करीब 15 दिन बाकी थे, लेकिन नागपुर के पास ही दर्द इतना बढ़ गया कि महिला की हालत गंभीर हो गई।
पति जितेंद्र नट ने गोंदिया स्टेशन पर रेलवे अधिकारियों से मदद मांगी, लेकिन ट्रेन स्टेशन छोड़ चुकी थी। ऐसे में डिब्बे में सफर कर रहीं दो महिला यात्रियों ने बिना घबराए जिम्मेदारी संभाली। वे कुछ देर के लिए डॉक्टर बन गईं और अपने अनुभव व हिम्मत के दम पर चलती ट्रेन में सुरक्षित प्रसव कराया।
कुछ ही पलों बाद नवजात की पहली किलकारी पूरे कोच में गूंज उठी। दर्द से कराह रही मां के चेहरे पर राहत की मुस्कान लौट आई और यात्रियों ने खुशी के साथ बधाई देते हुए कहा—”बेटा हुआ है।” पूरे डिब्बे का माहौल भावुक और खुशियों से भर गया।
सूचना मिलते ही डोंगरगढ़ रेलवे स्टेशन पर जीआरपी और आरपीएफ की टीम पहले से तैयार खड़ी थी। मां और नवजात को तत्काल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया गया, जहां डॉक्टरों ने दोनों को पूरी तरह स्वस्थ बताया।
.पति जितेंद्र नट ने महिला यात्रियों, जीआरपी, आरपीएफ और डॉक्टरों का आभार जताया। यह घटना साबित करती है कि मुश्किल हालात में जब इंसान, इंसान के काम आता है, तो अनजान लोग भी परिवार बन जाते हैं। चलती ट्रेन में जन्मी इस नई जिंदगी के साथ इंसानियत की एक खूबसूरत कहानी भी हमेशा के लिए दर्ज हो गई। केमरामेन नीरज के साथ पूर्णिमा शुक्ला VCN टाइम्स डोगरगढ की रिपोर्ट