इंदर कोटवानी की कलम से ….
“रायपुर-कहते हैं बारिश धरती की प्यास बुझाती है… लेकिन छत्तीसगढ़ में इस बार बारिश ने भ्रष्टाचार की परतें धोकर रख दी हैं….।
करोड़ों रुपए से बने पुलों में दरारें पड़ रही हैं… नई सड़कें पानी में बह रही हैं… डायवर्सन धंस रहे हैं… और जनता पूछ रही है—क्या विकास हुआ था या सिर्फ सरकारी पैसों का खेल?
भ्रष्टाचार करने के बाद ऐसी रूम के अंदर बैठे अधिकारी और ठेकेदारो का पाप बारिश में तैरने लगा है..
जो तस्वीर आप देख रहे है ये राजनांदगांव जिले के बरगा रेलवे ओवरब्रिज की है …….। इस नव निर्माणाधीन रेलवे ओवरब्रिज पर पहली ही बारिश ने सवालों का पुल खड़ा कर दिया है ..। करीब 22 करोड़ रुपए की लागत से बने इस ओवरब्रिज का महज 15 दिन पहले लोकार्पण हुआ था, लेकिन पहली बारिश में ही करीब 70 फीट लंबी दरार पड़ गई…। दरार इतनी बड़ी है कि लोगों को पुल दो हिस्सों में बंटा हुआ नजर आ रहा है…।
इसी तरह अलीवारा ओवरब्रिज की हालत भी खराब हो गई है। सड़क का हिस्सा बह गया, किनारों की बाउंड्री टूट गई और कई जगह जमीन धंस गई। सुरक्षा के लिए बैरिकेडिंग करनी पड़ी।
ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण की गुणवत्ता पर पहले भी सवाल उठाए गए थे, लेकिन शिकायतों के बावजूद संबंधित अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचे
हैरानी की बात यह है कि इतनी बड़ी दरार के बावजूद रेलवे के सहायक अभियंता मिथिलेश कुमार इसे सामान्य बता रहे हैं। उनका कहना है कि पहली बारिश में मिट्टी बैठने से ऐसा होता है और जल्द ही मरम्मत कर दी जाएगी।अधिकारी काहे कुछ भी कहे लेकिन सवाल यह है कि 22 करोड़ की परियोजना पहली बारिश भी नहीं झेल सकी, तो आने वाले वर्षों में इसका क्या होगा?
कोरबा जिले के करतला विकासखंड के भैंसामुड़ा गांव में 3 करोड़ रुपए की लागत से बनी जोगी नाला पुलिया पहली ही बारिश में ध्वस्त हो गई। तेज बहाव में पुलिया का हिस्सा बह गया और सड़क पर गहरे गड्ढे बन गए। ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण के दौरान गुणवत्ता पर सवाल उठाए गए थे, लेकिन अधिकारियों ने अनदेखी कर दी।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि निर्माण स्थल पर सूचना बोर्ड तक नहीं लगाया गया, जिससे यह तक पता नहीं चलता कि काम किस विभाग, एजेंसी या ठेकेदार ने किया। ऐसे में पारदर्शिता पर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
इसी तरह बलरामपुर में एनएच-343 पर पुलिया निर्माण के लिए बनाया गया डायवर्सन बारिश में धंस गया। घंटों तक यातायात बाधित रहा। स्कूली बच्चे फंसे रहे और वाहनों की लंबी कतार लग गई।
इसी तरह राजधानी रायपुर से लगे तिल्दा-नेवरा नगर पालिका में भी बारिश ने निर्माण कार्यों की पोल खोल दी। लाखों रुपए की लागत से बनी सड़कें, जो महज 8 से 9 महीने पहले तैयार हुई थीं, अब पानी के साथ बह चुकी हैं। सड़क पर अब केवल गिट्टी और गहरे गड्ढे नजर आ रहे हैं।
“ये सिर्फ पुलों और सड़कों की कहानी नहीं है… ये उन करोड़ों रुपए की कहानी है जो जनता के टैक्स से खर्च हुए।बारिश ने अपना काम कर दिया… लेकिन अब सवाल सरकार और जांच एजेंसियों से है—क्या इन निर्माण कार्यों की निष्पक्ष जांच होगी? क्या दोषियों पर कार्रवाई होगी? या फिर हर बार की तरह भ्रष्टाचार की इन दरारों पर भी सिर्फ लीपापोती कर दी जाएगी?

