रायपुर: छत्तीसगढ़ के रायपुर स्थित नकटी गांव में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई अब बड़ा राजनीतिक विवाद बन चुकी है. एक ओर भाजपा इसे सरकारी जमीन से संगठित अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई बताते हुए कांग्रेस पर झूठा नैरेटिव गढ़ने और जनता को भड़काने का आरोप लगा रही है, तो दूसरी ओर कांग्रेस इसे गरीबों के घरों पर बुलडोजर चलाने की अमानवीय और गैरकानूनी कार्रवाई बताते हुए मुख्यमंत्री से माफी और आवास मंत्री ओपी चौधरी को बर्खास्त करने की मांग कर रही है.
छत्तीसगढ़ राज्य गृह निर्माण मंडल के अध्यक्ष अनुराग सिंहदेव ने कहा कि नकटी गांव को पूरी तरह उजाड़ देने का दावा पूरी तरह झूठा है. उनके मुताबिक गांव की कुल आबादी 2110 है और विवाद सिर्फ करीब 3 हेक्टेयर शासकीय भूमि पर हुए अतिक्रमण का है. उन्होंने कहा कि एक-एक व्यक्ति द्वारा 29-29 हजार वर्गफीट तक सरकारी जमीन पर कब्जा किया गया था, जो सामान्य नहीं बल्कि संगठित अतिक्रमण है.
अनुराग सिंहदेव ने बताया कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के निर्देश पर 66 कब्जाधारियों को तत्काल नवा रायपुर के सेक्टर-30 में आवास उपलब्ध कराया गया है, जहां पहले से करीब 1200 परिवार रह रहे हैं. उन्होंने दावा किया कि वहां बिजली, पानी समेत सभी मूलभूत सुविधाएं मौजूद हैं और प्रभावित परिवारों की रजिस्ट्री की प्रक्रिया भी होगी. भोजन और अन्य आवश्यक सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जा रही हैं.
भाजपा ने कांग्रेस के उस आरोप को भी खारिज किया कि जमीन विधायक आवास के लिए खाली कराई गई है. अनुराग सिंहदेव ने कहा कि विधायक आवास के लिए स्थान का अंतिम निर्णय विधानसभा अध्यक्ष, मुख्यमंत्री, नेता प्रतिपक्ष और अन्य सदस्यों की समिति करती है. उन्होंने दावा किया कि फिलहाल यह जमीन राजस्व विभाग के पास है और किसी अन्य विभाग को हस्तांतरित नहीं हुई है.
सिंहदेव ने कहा कि यदि कांग्रेस विधायक नकटी में मकान नहीं बनाने की मांग कर रहे हैं तो ऐसा पत्र पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और पूर्व मंत्री मोहम्मद अकबर को लिखना चाहिए, क्योंकि वर्ष 2020 में इसी भूमि को आवास विभाग को देने का प्रस्ताव कांग्रेस सरकार के समय आया था.
भाजपा ने आरोप लगाया कि पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, टीएस सिंहदेव, विकास उपाध्याय और दीपक बैज सहित कांग्रेस नेताओं ने फर्जी नैरेटिव बनाकर लोगों की भावनाएं भड़काईं. अनुराग सिंहदेव ने कहा कि आवास मंत्री के निवास में जबरन घुसने की कोशिश तक की गई, जो अराजक राजनीति का उदाहरण है. उन्होंने बलौदाबाजार जैसी घटनाओं की पुनरावृत्ति कराने की साजिश का आरोप लगाते हुए षड्यंत्रकारियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की.
वहीं कांग्रेस संचार प्रमुख सुशील आनंद शुक्ला ने भाजपा के आरोपों को झूठ बताते हुए कहा कि भाजपा कितनी भी प्रेस कॉन्फ्रेंस कर ले, नकटी में गरीबों के घर तोड़ने का पाप नहीं धुल सकता. उन्होंने दावा किया कि सरकार के मंत्री ओपी चौधरी और वरिष्ठ अधिकारियों ने स्वयं स्वीकार किया है कि वहां विधायक आवास बनाने की योजना है. उन्होंने सवाल उठाया कि यदि कोई योजना नहीं थी तो गरीबों के मकान क्यों तोड़े गए?
कांग्रेस का आरोप है कि नकटी गांव में 85 आवास और प्रधानमंत्री आवास योजना के मकानों में तोड़फोड़ की गई. पार्टी ने इसे गरीब विरोधी, अमानवीय और गैरकानूनी कार्रवाई बताया. कांग्रेस का कहना है कि बारिश के मौसम में विस्थापन नहीं किया जाता और 29 जून को की गई कार्रवाई नियमों के खिलाफ है. पार्टी ने कार्रवाई में शामिल अधिकारियों पर कानूनी कार्रवाई की मांग की और चेतावनी दी कि जरूरत पड़ने पर अदालत का दरवाजा खटखटाया जाएगा.
सुशील आनंद शुक्ला ने आरोप लगाया कि सरकार ने लोगों को सामान हटाने का पर्याप्त मौका दिए बिना बुलडोजर चला दिया. उनका कहना है कि पुनर्वास स्थल वर्तमान निवास से काफी दूर है और एक कमरे के मकान में 20 से 25 सदस्यीय परिवारों को बसाया जा रहा है. कांग्रेस ने यह भी सवाल उठाया कि वहां बिजली-पानी जैसी मूलभूत सुविधाएं नहीं हैं और जिन मकानों का अस्थायी आवंटन हुआ है, उनकी कीमत 5.50 लाख और 8.50 लाख रुपये बताई गई है. कांग्रेस ने पूछा कि इसका भुगतान कौन करेगा और इसे पूरी तरह मुफ्त क्यों नहीं किया गया?
कांग्रेस ने मांग की है कि जिन मकानों को तोड़ा गया है, उन्हें उसी स्थान पर दोबारा बनाया जाए. प्रभावित परिवारों को हुए नुकसान का मुआवजा दिया जाए, कार्रवाई के जिम्मेदार अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई हो और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय इस पूरे मामले पर सार्वजनिक रूप से माफी मांगते हुए आवास एवं पर्यावरण मंत्री ओपी चौधरी को बर्खास्त करें.
नकटी गांव की कार्रवाई अब सिर्फ अतिक्रमण हटाने का मामला नहीं रह गई है, बल्कि भाजपा और कांग्रेस के बीच बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन चुकी है. भाजपा इसे सरकारी जमीन बचाने और कांग्रेस की ‘फेक नैरेटिव’ की राजनीति बता रही है, जबकि कांग्रेस इसे गरीबों पर बुलडोजर चलाकर सत्ता के दुरुपयोग का मामला बता रही है. अब इस पूरे विवाद पर सरकार की अगली कार्रवाई और संभावित कानूनी लड़ाई पर सभी की नजरें टिकी हैं.

