Homeछत्तीसगढ़सशिमं के विकास में आचार्यों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण : पुरोहित

सशिमं के विकास में आचार्यों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण : पुरोहित

कसेकेरा के सरस्वती ग्राम गंगा विद्या मन्दिर में 10 दिवसीय ‘नवीन आचार्य संकल्पना वर्ग’ चल रहा

बागबाहरा। सरस्वती ग्राम शिक्षा समिति द्वारा प्रदेश भर में संचालित सरस्वती शिशु मन्दिर ग्रामीण विद्यालयों के सुदृढ़ीकरण और गुणात्मक सुधार के लिए जिला स्तर पर ‘नवीन आचार्य संकल्पना वर्ग’ का आयोजन किया जा रहा है। इसी कड़ी में महासमुन्द जिला के ग्राम कसेकेरा स्थित सरस्वती ग्राम गंगा विद्या मन्दिर में नवीन आचार्यों के लिए प्रशिक्षण वर्ग संचालित है। ​इस वर्ग के तहत सोमवार को आयोजित सत्र में ग्राम भारती जिला समिति के सदस्य अनिल पुरोहित मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने ‘विद्यालय के विकास में आचार्यों की भूमिका’ विषय पर केंद्रित अपना सारगर्भित उद्बोधन दिया।

​श्री पुरोहित ने कहा आचार्य केवल किताबी ज्ञान देने वाले शिक्षक नहीं हैं, बल्कि वे ग्रामीण अंचलों में संस्कृति और संस्कारों के संवाहक हैं। एक सुदृढ़ और समृद्ध विद्यालय की नींव आचार्यों के समर्पण, नवाचार और उनके उच्च नैतिक आचरण पर टिकी होती है। श्री पुरोहित ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में बच्चों को आधुनिक शिक्षा के साथ-साथ भारतीय संस्कृति और नैतिक मूल्यों से जोड़ना आचार्यों का प्राथमिक कर्तव्य है। विद्यालय के विकास के लिए आचार्यों को ग्रामीणों और अभिभावकों के साथ निरंतर संवाद स्थापित कर एक आत्मीय संबंध बनाना चाहिए। श्री पुरोहित ने कहा कि नवीन आचार्यों को शिक्षण की नई पद्धतियों को अपनाकर स्वयं को लगातार अद्यतन (अपडेट) रखना होगा, जिसका सीधा लाभ ग्रामीण छात्र-छात्राओं को मिलेगा।

इस मौके पर वर्ग अधिकारी व विद्यालय के प्राचार्य वीरेन्द्र साहू मंचस्थ थे। ​इससे पहले प्रथम सत्र में जिला समन्वयक जयलाल प्रधान ने स्वदेशी, स्वावलम्बन, स्वास्थ्य और संस्कृति विषयों पर मार्गदर्शन किया। विदित रहे, प्रशिक्षण वर्ग में जिले के विभिन्न ग्रामीण अंचलों से 62 प्रशिक्षार्थी आचार्य-दीदीजी उत्साहपूर्वक भाग ले रहे हैं।

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