छत्तीसगढ़

मूक-बधिर युवती से रेप केस में हाई कोर्ट सख्त, कहा- संकेतों में दी गवाही भी मान्य, पीड़िता ने ऐसे बताई थी पूरी घटना

मूक-बधिर युवती से रेप केस में हाई कोर्ट सख्त, कहा- संकेतों में दी गवाही भी मान्य, पीड़िता ने ऐसे बताई थी पूरी घटना

बिलासपुर- छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने मूक-बधिर युवती के साथ हुए दुष्कर्म के मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने कहा है कि केवल मूक-बधिर होने पर किसी गवाह की बात को खारिज नहीं किया जा सकता। संकेतों के द्वारा दी गई जानकारी को भी कानूनी तौर पर मौखिक साक्ष्य माना जाता है। हाईकोर्ट ने एक प्रकरण में ट्रायल कोर्ट के फैसले को बरकरार रखते हुए अपील खारिज कर दी है। कोर्ट ने आरोपी को मरते दम तक उम्रकैद की सजा सुनाई है। आरोपी वर्तमान में जेल में बंद है और उसे अपनी पूरी सजा काटनी होगी। इस मामले में पीड़िता बोल और सुन नहीं सकती थी, इसलिए उसकी गवाही के लिए प्लास्टिक की गुड़िया का सहारा लिया गया था।

दरअसल, बालोद जिले की रहने वाली पीड़िता घर पर अकेली थी। उसके माता-पिता खेत में काम करने गए थे। तभी उसका रिश्तेदार नीलम कुमार देशमुख घर में घुस गया। उसने युवती के साथ रेप किया। शाम को जब मां घर लौटी, तो बेटी को रोते हुए मूक-बधिर युवती ने अपनी मां को इशारों में अपने साथ हुई दरिंदगी की कहानी सुनाई, और आरोपी की पहचान बताई, जिसके बाद परिजन उसे लेकर थाने गए, और पुलिस ने आईपीसी की धारा 450 और 376(2) के तहत केस दर्ज करते हुए आरोपी को गिरफ्तार किया था।

पीड़िता जन्म से ही बोलने और सुनने में अक्षम थी, इसलिए कोर्ट के सामने उसकी गवाही दर्ज कराना एक बड़ी चुनौती थी। सुनवाई के दौरान ट्रायल कोर्ट में साइन लैंग्वेज एक्सपर्ट की मदद ली गई। जब कुछ सवाल पूछने में दिक्कत आई, तो कोर्ट ने प्लास्टिक की गुड़िया मंगवाई। पीड़िता ने गुड़िया के माध्यम से संकेतों और इशारों से प्रदर्शन करके दिखाया कि आरोपी ने उसके साथ किस तरह से गलत काम किया था। इस आधार पर ट्रायल कोर्ट ने उम्रकैद की सजा सुनाई थी।

इस फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील की गई थी। मामले की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि पीड़िता की गवाही पूरी तरह से भरोसेमंद है। इसके अलावा मेडिकल और फॉरेंसिक रिपोर्ट ने भी पुष्टि की। कोर्ट ने कहा कि केवल मूक-बधिर होने के आधार पर किसी गवाह की बात को खारिज नहीं किया जा सकता। संकेतों के माध्यम से दी गई जानकारी को भी कानूनी तौर पर मौखिक साक्ष्य माना जाता है। कोर्ट ने आरोपी को आईपीसी की धारा 376(2) के तहत मौत होने तक उम्रकैद और धारा 450 के तहत 5 साल जेल की सजा सुनाई है, साथ ही 21 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया गया है।

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