Friday, February 27, 2026
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स्वस्फूर्त संकल्प को सिद्धि के धरातल पर साकार करने का बीड़ा उठाया गरिमा ने

स्वस्फूर्त संकल्प को सिद्धि के धरातल पर साकार करने का बीड़ा उठाया गरिमा ने

विधि स्नातक गरिमा अग्रवाल ने शिक्षित होकर दो नहीं, बल्कि अपने भाई गौरव के साथ मिलकर कई परिवारों की बेटियों को शिक्षित करने का एक अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत किया

अर्पण दिव्यांग पब्लिक स्कूल में कन्या छात्रावास के निर्माण का सारा खर्च वहन करने का निर्णय लेकर गरिमा और गौरव ने दिव्यांग बच्चियों की पढ़ाई की दिशा में सार्थक पहल की

गर्ल्स हॉस्टल नहीं होने के कारण ग्रामीण क्षेत्र की दिव्यांग बच्चियाँ शिक्षा से वंचित हो रही थीं, अब 30 बच्चियों के लिए भी विद्यालय में आवासीय सुविधा उपलब्ध हो सकेगी

भूमिपूजन समारोह के बाद गरिमा ने कहा : प्रदेश की सभी बच्चियाँ, चाहे वह दिव्यांग हो या अंध-मूक-बध्रिर, सभी को शिक्षित होना चाहिए, यही लक्ष्य उनकी इस प्रेरणा का उत्स है

रायपुर। यह एक स्थापित सत्य है कि बेटी जब शिक्षित होती है तो वह अकेली नहीं, अपितु दो परिवार और कुल शिक्षित होते हैं। लेकिन एक बेटी ने शिक्षित होकर दो नहीं, बल्कि अपने भाई के साथ मिलकर कई परिवारों की बेटियों को शिक्षित करने का एक अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत करके आत्मकेंद्रित और भौतिकवादी होते जा रहे हमारे सामाजिक सरोकारों को एक रचनात्मक दिशा दी है।

अपने स्वस्फूर्त संकल्प को सिद्धि के धरातल पर साकार करने वाली राजधानी के व्यवसायी उमेश अग्रवाल की बिटिया विधि-स्नातक गरिमा अग्रवाल और बेटे गौरव अग्रवाल ने दिव्यांग बेटियों के हॉस्टल एवं शिक्षा हेतु मुक्तहस्त से अविस्मरणीय दान किया है। गरिमा ने लगभग 30 बच्चियों के लिए कन्या छात्रावास की व्यवस्था करने का बीड़ा उठाया है और उनके भाई गौरव अग्रवाल इस पवित्र संकल्प की पूर्ति में अपनी बहन के साथ कदम-से-कदम मिलाकर चल रहे हैं। भाई-बहन के इस संवेदनक्षम संकल्प की सर्वत्र प्रशंसा हो रही है।

गरिमा और गौरव ने राजधानी के बजाज कॉलोनी (न्यू राजेन्द्र नगर) में संचालित अर्पण दिव्यांग पब्लिक स्कूल में कन्या छात्रावास के निर्माण का सारा खर्च वहन करने का निर्णय लेकर इस दिशा में सार्थक पहल की। इस विद्यालय में दिव्यांग बेटियों को पढ़ाने की व्यवस्था थी लेकिन बहुत-से गरीब परिवारों की बच्चियाँ आवास की सुविधा न होने के चलते शिक्षा से वंचित थीं। विदित रहे, अर्पण दिव्यांग स्कूल में ब्वॉय’ज हॉस्टल तो है लेकिन गर्ल्स हॉस्टल नहीं होने के कारण ग्रामीण क्षेत्र की दिव्यांग बच्चियाँ शिक्षा से वंचित हो रही थीं क्योंकि इन परिवारों की आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं थी कि वे शहर में अपनी बच्चियों की पढ़ाई का खर्च बिना आवासीय सुविधा के उठा सकें।

दिव्यांग बच्चियों की पढ़ाई के प्रति ललक और शिक्षा से वंचित रह जाने की पीड़ा ने तब एक स्वस्फूर्त संकल्प को जन्म दिया और गरिमा अग्रवाल ने बेटियों की शिक्षा के लिए प्रशंसनीय कार्य कर कन्या छात्रावास के निर्माण का पूरा खर्च उठाकर अविस्मरणीय कार्य किया। इससे यह स्पष्ट है कि एक 23 साल की लॉ ग्रेजुएट गरिमा के मन में यह भाव एक बेटी होने के नाते ही आया और गरिमा ने अपने नाम के अनुरूप बेटियों के लिए गरिमापूर्ण कार्य किया।

इस कन्या छात्रावास के लिए हुए भूमिपूजन समारोह के बाद गरिमा ने बताया कि प्रदेश की सभी बच्चियाँ, चाहे वह दिव्यांग हो या अंध-मूक-बध्रिर, सभी को शिक्षित होना चाहिए, उनका यही लक्ष्य इस प्रेरणा का उत्स है। विद्यालय के प्राचार्य कमलेश मिश्रा ने बताया कि इस दिशा में सरकार की सुविधा के साथ-साथ अर्पण दिव्यांग पब्लिक में निःशुल्क शिक्षा सुविधा उपलब्ध कराके अलग-अलग विधाओं में प्रशिक्षित कर उन्हें स्वाभिमानपूर्वक आजीविका के योग्य तैयार किया जाता है। समारोह के दौरान पूर्व महापौर प्रमोद दुबे, अर्पण कल्याण समिति के अध्यक्ष प्रकाश शर्मा, स्कूल की को-ऑर्डिनेटर सीमा छाबड़ा की उपस्थिति उल्लेखनीय रही।

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