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छत्तीसगढ़

आंखों ही आंखों में इशारा हो गया, बैठे-बैठे जीने का सहारा मिल गया:कोंडागांव में दिव्यांग जोड़े की अनूठी प्रेम कहानी:

कोंडागांव-आंखों ही आंखों में इशारा हो गया बैठे-बैठे जीने का सहारा मिल गया.ऐसा लगता है ये फिल्मी गाना कोंडागांव में दिव्यांग जोड़े की हुई शादी के लिए ही गाया गया था .कोंडागांव के ऋषभ जैन और नगरी की रोशनी जैन दोनों दिव्यांग है ये दोनों बोल सुन नहीं सकते लेकिन इशरो में ये सब कुछ समझते भी है और बोलते भी है. संजय जैन की दिव्यांग बेटी रोशनी जैन को ऋषभ जैन ने जब पहली बार देखा तो दोनों ने एक दूसरे से इशारों-इशारों में बात की और भावनाओं को समझा। और दोनों एक दूसरे को दिल देने राजी यानि की पसंद आ गए। इसके बाद परिजनों ने आपसी चर्चा कर रिश्ता तय किया।

शादी के बंधन में बंधे दिव्यांग जोड़े।
शादी के बंधन में बंधे दिव्यांग जोड़े।

पांच दिन पहले 21 फरवरी की दोपहर को दोनों की सगाई हुई और शाम 6 बजे दिव्यांग जोड़े की शादी हुई। कोंडागांव के 30 लोग बाराती बनकर आए थे। नगरी निवासी रोशनी जैन 25 साल की है और 12वीं के बाद आईटी कोपा की है। वे कंप्यूटर चलाना जानती है। वहीं कोंडागांव के ऋषभ जैन 27 साल के हैं। नवमी तक पढ़ाई की है। इनकी टायर की दुकान है।

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