भिलाई कुर्सीपार के जवाहरलाल नेहरू हायर सेकेंडरी स्कूल में 30 साल पूर्व पढने वाले छात्र-छात्रओ मिलन समारोह का आयोजन हुआ समारोह में पूर्व छात्र व सेवा निर्मित शिक्षक आपस में मिले और स्कूल से जुड़ी पुरानी यादों को साझा किया
विद्यार्थियों के इस अनोखे कार्यक्रम में ऐसे- ऐसे छात्र मिले हैं, जिसे जानकर आप भी कह उठेंगे कि क्या पल है ये ? दरअसल ये छात्र अब तक मम्मी पापा या फिर दादा दादी नाना नानी बन चुके हैं. पढ़िए पूरी खबर

भिलाई में गुरू शिष्य के अनोखे रिश्ते को बयां करने वाला एक अनोखा कार्यक्रम देखने को मिला. कुर्सीपार के जवाहरलाल नेहरू हायर सेकेंडरी स्कूल में वर्ष-1993, 1994 और 1995 बैच के विद्यार्थियों ने अपने गुरुओं के प्रति अपने आदर और कृतज्ञता भाव को दिखाते हुए, एक बार फिर स्कूल की तरह ही एक ही मंच पर मुलाकात के लिए सम्मान समारोह का आयोजन किया. इसमें अलग-अलग जगहों से 70 पूर्व विद्यार्थियों ने भाग लिया.

इस समारोह में स्कूल के कार्यक्रम में वयोवृद्ध शिक्षक ललित कुमार अग्रवाल.अजय तिवारी. रतनलाल राठौर .आभा दुबे.शारदा बोरकर पपिया बनर्जी .शेफाली डे.अनुराधा शैली.अंजुमन खान का शाल श्रीफल प्रतीक चिन्ह बैठकर सम्मानित किया गया का .समारोह में गुरु-शिष्य संबंधों की पवित्रता और मधुरता की झलक देखने को मिली. इतने वर्षों बाद हुई इस मुलाकात ने शिक्षकों और पूर्व छात्रों का दिल छू लिया. आपको बता दें कि ये लोग जिस 95 साल पुराने स्कूल के विद्यार्थी थे,उसके बाद यह पहला मौका था जब 70 पूर्व छात्र 30 साल बाद एक ही मंच पर अपने शिक्षकों और सहपाठियों से मिले.

30 साल पुराने दोस्त जब मिले तो एक दूसरे को देख भाव विभोर हो गए शादी होकर अपने ससुराल जा चुकी छात्राओ को जब कार्यक्रम का निमत्रण मिला तो वे स्कुल कि पुरानी यादो कि गठरी संजोए उड़ीसा महाराष्ट्र यूपी एमपी के विभिन्न शहरों से शामिल होने भिलाई पहुच गई,और अपने उन पुराने दिनों की याद को साजा करते हुए खूब ठिठोलिया कर एक साथ डांस कर खूब इंजॉय किया.. कुछ दोस्तों ने फिल्मी गाने गाकर कार्यक्रम में चार चांद लगाते हुए कार्यक्रम को यादगार बना दिया’
इस मौके पर गुरुजनों ने कहा गुरु हमेशा चाहता है कि उनका पढ़ा विद्यार्थी कोई बड़ा मुकाम हासिल करें. आज यहां आकर हम अपने आप को धन्य मानते हैं क्योंकि हमारे द्वारा पढ़ाए बच्चे आज शहर में प्रतिष्ठा अर्जित कर रहे हैं. गुरुजनों ने कार्यक्रम की प्रशंसा करते हुए कहा कि ओस की एक बूंद मोती बनती है, घर का मांन बेटियां बढ़ाती है.. गुरुजनों ने कहा कि 30 साल पहले हमने जो नहीं पढ़ाया आज वह बच्चे उनसे ज्यादा पढ़ लिख गए हैं. और आज उन्ही बच्चो ने हमें मिलकर रहना सिखा दिया,
पूर्व विद्यार्थियों ने शिक्षकों के प्रति अपने आभार प्रकट करते हुए कहा, कि उनकी शिक्षा और मार्गदर्शन ने उनके जीवन को नई दिशा दी. इस आयोजन में स्कूल के दिवंगत शिक्षकों को भी श्रद्धांजलि अर्पित की गई. सात ही गुरु-शिष्य संबंधों को पुनर्जीवित करने का प्रयास किया गया. समारोह में शिक्षकों और छात्रों के बीच के संवाद ने सभी को पुराने दिनों की यादों में डूबो दिया. इस आयोजन से यह संदेश दिया गया, कि स्कूल में शिक्षा केवल पाठ्यक्रम तक सीमित नहीं होती, बल्कि यह जीवन को दिशा देने वाला एक अनमोल संबंध भी है.
कार्यक्रम में पूर्व छात्र रहे सतीश अग्रवाल, कैलाश वरदानी, राकेश अग्रवाल, सीमा शुक्ला, विजय अग्रवाल नरेश अग्रवाल, सीमा त्रिपाठी, सहित 70 दोस्त शामिल हुए…