Thursday, February 26, 2026
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सैकड़ों साल पुराने सरोरा जंगल को सरकार ने सयंत्र लगाने उद्योगपति को बेचा”विरोध में हाईकोर्ट पहुंचे ग्रामवासी, 9 जनवरी को जन सुनवाई

“इंदर कोटवानी

तिल्दा नेवरा  हसदेव अरण्य जंगल के बाद अब तिल्दा ब्लाक में 197 हेक्टेयर क्षेत्र में फैले सरोरा जंगल को उजाड़कर वहां एक कारखाना खोलने के लिए 9 जनवरी को जनसुनवाई रखी गई है। उसके बाद सैकड़ों साल पुराने सरोरा के जंगल में लगे लाखों पेड़ काट दिए जाएंगे,हालांकि जंगल को बचाने के लिए जिला पंचायत सभापति राजू शर्मा ने जन सूचना से मिली जानकारी के आधार पर हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। वहीं अब सरोरा से लगे एक दर्जन  से भी अधिक गांवों के सैकड़ों ग्रामीण खुलकर विरोध में आ गए हैं।रणनीति के तहत गांववासी गावों में बैठके कर रहे है।ग्रामीणों का कहना है कि सरोरा जंगल उनकी ज़िंदगी का अभिन्न हिस्सा है।उसे किसी भी स्थिति में उजड़ने नही देगे। ग्रामीणों ने छ.ग.के  मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से कांग्रेस की भूपेश सरकार के चलते बेचे गए जंगल को बचाने की मांग की है।

रायपुर से 45 एवं तिल्दा नेवरा ब्लाक व तहसील मुख्यालय से 7 किलोमीटर दूरी पर स्थित सैकड़ों साल पुराना सरोरा  जंगल रायपुर वन मंडल के अंतर्गत तिल्दा वन परिवर्तन में सुरक्षित वन क्षेत्र सरोरा कक्ष क्रमांक 40 चिन्हित है, जो वनों से अच्छादित तथा वन्य प्राणियों के रहवास का केंद्र भी है, उक्त क्षेत्र 195.390 हेक्टेयर क्षेत्र में विस्तारित भारत का एक समृद्ध वन क्षेत्र है और जैव विविधता से परिपूर्ण है। उक्त वन क्षेत्र में विभिन्न प्रजातियों के वृक्ष जैसे साजा,खैर, तेंदु, सगोंन, बीजा, महुआ, चार, कुसुम, बहेरा धावडा, बास -बिरहा सहित आदि मूल्यवान औषधी परक प्रजातियों की प्राकृतिक वन संपदा विद्यमान है, साथ ही लगभग 45 से 50 चीतल, नेवला, सर्प, अजगर. जंगली सूअर, खरगोश जैसे अन्य वन्य प्राणी विचरण करते हैं। वन विभाग कि माने तो यहां कुल 605 जंगली जानवर इस जंगल में रहते हैं ।

2013 में तीसरी बार बनी भाजपा की सरकार में वन मंत्री रहे महेश गागडा के द्वारा सरोरा बिलाडी जंगल को आकर्षक पर्यटक स्थल बनाए जाने की घोषणा की गई थी. उसके बाद करोड़ों रूपए खर्च कर जंगल के चारों ओर तार से घेरा भी किया गया था,उसके बाद वित्तीय वर्ष 2020-21 में कांग्रेस कि सरकार चलते कैंपा योजना के तहत करोड़ों रुपए खर्च कर जंगल के वनों को बचाने के लिए वनों के बाधक लौटना एवं शिन्द को जड़ सहित उखाड़ कर परिसर से बाहर फेके  जाने के लिए कार्य किए गए और 55000 पौधों का रोपण भी किया गया,। कैंपा योजना के ही अंतर्गत सरोरा कक्ष क्रमांक 40 वन परिसर में वन्य प्राणी तालाब निर्माण कार्य के लिए 150 लाख रुपए खर्च किए गए। इसी बीच जंगल की जमीन को उद्योग विभाग को हस्ताक्षरित करने के लिए इश्तहार प्रकाशित किया गया। आपत्ति दर्ज करने के लिए तिल्दा तहसीलदार को आदेशित किया गया। ,इश्तहार प्रकाशन के बाद सरोरा के पूर्व सरपंच सनत सिह ठाकुर, कामता प्रसाद शर्मा, जिला पंचायत सभापति राजू शर्मा सहित 12 से भी अधिक लोगों ने आपत्ति दर्ज कराई, उसके बाद लगातार सुनवाई होती रही लेकिन तहसीलदार ने जंगल की जमीन को राजस्व की जमीन बताकर आपत्तियों को खारिज कर जमीन को उद्योग विभाग को हस्तांतरित कर दिया गया, बाद में उद्योग विभाग ने जमीन को गोदावरी पावर एंड इस्पात लिमिटेड ग्राम सरोरा तहसील तिल्दा को देने के लिए अनुबंध कर लिया,अब जंगल वाली जमीन पर उद्योग लगाने  9 जनवरी को उद्योग .पर्यावरण वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय भारत सरकार द्वारा जनसुनवाई के लिए नोटिफिकेशन जारी किया गया है।

जल-जंगल और जमीन अमूल्य है, इसे पैसे से नहीं तोलना चाहिए :राजू शर्मा

जिला पंचायत सभापति किसान नेता राजू शर्मा ने कहा जल-जंगल और जमीन अमूल्य है, इसे पैसे से नही तौलना चाहिए, उन्होंने कहा कि सरोरा का जंगल सैकड़ों साल पुराना है.पूरी दुनिया जलवायु परिवर्तन के संकट से जूझ रही है. जब धरती पर जीवन का अस्तित्व ही खतरे में है, ऐसे स्थिति में हम सरोरा जंगल जैसे समृद्ध वनों का विनाश कैसे कर सकते हैं?  राजू शर्मा ने कहा कि जंगल को काटने से प्रकृति आधारित जीवन निर्वाह करने वाले आसपास के गांव का अस्तित्व ही खत्म हो जाएगा। उन्होंने कहा कि जंगल की जमीन को उद्योग विभाग को देने में राजस्व अमले की अहम भूमिका रही है। जिनके द्वारा गलत रिपोर्ट तैयार कर जंगल की खसरा नंबर 746, 747,1320, 9322 राजस्व कि जमीन बताया गया।जबकि आज भी उक्त जमीन का खसरा वन विभाग के नाम पर है. यह भी शर्मा ने यह भी दावा किया है  कि सरोरा जंगल की ग्राम सभाओं ने कभी भी जंगल उजाड़ने की सहमति नहीं दी है, जंगल की जमीन के लिए फर्जी प्रस्ताव बनाकर लगाए गए है।

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