वरिष्ठ पत्रकार जवाहर नागदेव की खरी… खरी…
छत्तीसगढ़ मे यदि गहन जांच की जाए तो पता चलेगा कि सरकार के बजट से अधिक काला धन अपने अधिकारियों के पास है। हर काम में अधिकारियों का हिस्सा रहता है ये एक ओपन सीक्रेट है।
लेकिन खुशी की बात ये है कि पिछले दस सालों में काले धन वालों का चैन खतम हो गया है। केन्द्र सरकार ने ऐसा टाईट किया है कि रातों की नींद खराब हो गयी है। जो अभी खा-पी रहे हैं वे भी और जो पहले खाकर डकार चुके हैं वे भी भयभीत से हैं। तलवार लगातार लटक रही है।
संपत्ति की जानकारी देने में
हिचकिचाते अधिकारी
पिछले दिनों केंद्र सरकार ने सभी आईपीएस अधिकारियों से उनकी संपत्ति की घोषणा करने के निर्देश दिये हैं।
छत्तीसगढ़ में भी बार-बार अधिकारियों से उनकी संपत्ति की जानकारी मांगे जाने की घोषणा की जाती है लेकिन इसमें सफलता नहीं मिलती।
तो इस आधार पर जानकारी देने से इन्कार क्यों ? जानकारी देने में आपत्ति क्यों ? इसका मतलब आप अपने माल की जानकारी छिपाना चाहते हो।
साफ जाहिर है कि अधिकारी ने कुछ न कुछ धांधली की है इसलिये जानकारी देने से डरता है।
गौरतलब है कि कोई अधिकारी अपनी ही संपत्ति की जानकारी सार्वजनिक क्यों करना चाहेगा ? इस आधार पर अधिकारी को छूट देने का क्या मतलब है ?
बहरहाल दिसंबर के प्रथम सप्ताह में केंद्रीय गृह मंत्रालय ने देश के समस्त आईपीएस अधिकारियों यानि इण्डियन पुलिस सर्विस के अधिकारियों से 31 जनवरी 2024 तक संपत्ति की जानकारी अनिवार्य रूप से मांगी है।
बस ये देखना है कि अधिकारी जानकारी देते हैं या फिर कोई हील-हवाला करके निकल लेते हैं। वैसे सत्ता के शीर्ष पर बैठे लोगों के रूख से ये लगता नहीं कि इस बार कोई संपत्ति छिपा पाएगा।

