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अब ट्रेनों में खराब खाने की नो टेंशन, खाना कब और कहां बना? यात्री क्यूआर कोड से जान सकेंगे

पश्चिम रेलवे ने करीब 100 क्लस्टर किचन तैयार कर लिए हैं। बचे हुए 50 किचन भी जल्द तैयार हो जाएंगे। रेलवे के एक अधिकारी ने बताया कि ट्रेनों में खान-पान को लेकर शिकायतें कम नहीं हो रही हैं। इसे ही ध्यान में रखते हुए क्यूआर कोड का नया प्रयोग किया है। इसलिए क्लस्टर किचन में तैयार होने वाले खाने पर क्यूआर कोड लगा होगा।

यात्री अक्सर ट्रेनों में खाने की गुणवत्ता ठीक नहीं होने और खराब खाने की शिकायत करते हुए नजर आते हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए भारतीय रेलवे ने अब क्लस्टर किचन बनाने का निर्णय लिया है। रेलवे देशभर में एक हजार क्लस्टर किचन बना रहा है। इसी के तहत पश्चिम रेलवे जोन में करीब 150 क्लस्टर किचन तैयार किए जा रहे हैं। इन किचन में आईआरसीटीसी नया प्रयोग करने जा रही है। इन किचन में तैयार होने वाले खाने के पैकेट पर क्यूआर कोड लगा होगा। जिसे स्कैन करते ही पता चल जाएगा कि खाना किस किचन में तैयार हुआ और कब बना?

पश्चिम रेलवे ने करीब 100 क्लस्टर किचन तैयार कर लिए हैं। बचे हुए 50 किचन भी जल्द तैयार हो जाएंगे। रेलवे के एक अधिकारी ने बताया कि ट्रेनों में खान-पान को लेकर शिकायतें कम नहीं हो रही हैं। इसे ही ध्यान में रखते हुए क्यूआर कोड का नया प्रयोग किया है। इसलिए क्लस्टर किचन में तैयार होने वाले खाने पर क्यूआर कोड लगा होगा। इस कोड को स्कैन करते ही यात्रियों को यह जानकारी मिल जाएगी कि खाना किस किचन में और कब तैयार हुआ? इसके अलावा ठेकेदार कंपनी के एफएसएसएआई आदि की जानकारी भी होगी।

अधिकारियों का कहना है कि ये कलस्टर किचन का का कॉन्सेप्ट खाने की गुणवत्ता में सुधार लाने के लिए लागू किया जा रहा है। इन क्लस्टर किचन के जरिए राजधानी, वंदे भारत, तेज एक्सप्रेस समेत लंबी दूरी की ट्रेनों में भी भोजन की आपूर्ति की जाएगी। फिलहाल कई लंबी दूरी की ट्रेनों में यह सेवा शुरु हो चुकी है।

क्लस्टर किचन में खाना तैयार करते समय किन सावधानियों का ख्याल रखा जा रहा है। इनकी लाइव मॉनिटरिंग भी एआई कैमरों से होगी। कैमरों में यह भी जांच की जाएगी कि किचन में काम करने वाले कुक नियमों का पालन कर रहे है या नहीं। इससे किचन में होने वाली छोटी-बड़ी घटनाओं की भी निगरानी की जाएगी। इसी के साथ ही किचन में काम करने वाले कुल के अलावा अन्य कर्मचारियों को भी यह सुनिश्चित करना होगा कि उन्होंने किचन में हैंड ग्लब्स और हैड कैप पहनी है या नहीं।

अधिकारियों के अनुसार, रेलवे के कई सारे बेस किचन है। सभी में फोन कर शिकायत दर्ज करना आसान नहीं था। इसलिए रेलवे और आईआरसीटीसी ने एआई का प्रयोग शुरू किया है। अब एआई जैसे ही किसी किचन में चूहा देखता है वैसे ही वो संबंधित किचन को शिकायत का एक टिकट भेज देता है। इस शिकायती टिकट में शिकायत का समय तारीख सभी डीटेल्स मौजूद होता है। वहीं जब बेस किचन में कॉकरोच दिखाई देता है तो भी एआई इसी तरह की प्रक्रिया अपनाता है।

यही नहीं अगर किसी किचन में झाड़ू तो लग गई और पोंछा नहीं लगा तब भी एआई शिकायती टिकट भेज देता है। अगर निर्धारित समय पर झाड़ू पोछा नहीं हुआ या डीप क्लीनिंग नहीं हुई तो भी एआई अपनी नाराजगी जाहिर कर देता है। नियम के अनुसार संबंधित रसोई इंचार्ज को शिकायत का रेक्टीफिकेशन करना और हेड क्वार्टर को लापरवाही के लिए जवाब भेजना पड़ता है।

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