इंदर कोटवानी
अंबिकापुर- सरकारें चाहे कितने भी विकास और जनकल्याण के दावे कर लें, लेकिन जमीनी सच्चाई कई बार उन दावों को कठघरे में खड़ा कर देती है। सरगुजा जिले के मैनपाट से सामने आई एक तस्वीर ने पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यहां एक बहू अपनी बुजुर्ग सास को सिर्फ ₹500 की पेंशन दिलाने के लिए हर महीने करीब 9 किलोमीटर तक पीठ पर लादकर बैंक तक ले जाने को मजबूर है।
बताया जा रहा है कि कुनिया गांव की रहने वाली महिला अपनी वृद्ध सास को लेकर नर्मदापुर स्थित बैंक पहुंची थी। इस दौरान 44 डिग्री सेल्सियस की झुलसा देने वाली गर्मी में बहू को सास को पीठ पर ढोते देख ग्रामीणों का दिल पसीज गया। किसी ग्रामीण ने इस पूरे दृश्य का वीडियो बना लिया, जो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।
वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि बहू कठिन पहाड़ी रास्तों और तपती धूप के बीच अपनी सास को पीठ पर लेकर बैंक की ओर बढ़ रही है। वजह सिर्फ इतनी है कि पेंशन की राशि निकालने के लिए वृद्ध महिला का बैंक में उपस्थित होना जरूरी बताया गया।ग्रामीणों का कहना है कि यदि किसी व्यक्ति को ₹500 देकर रोज 9 किलोमीटर पैदल चलने को कहा जाए तो शायद ही कोई तैयार होगा, लेकिन गरीबी और मजबूरी ऐसी है कि यह महिला हर महीने अपनी सास को पीठ पर लेकर इतनी लंबी दूरी तय करती है।
यह घटना कई सवाल छोड़ती है—क्या आज भी ग्रामीण इलाकों में बुजुर्गों के लिए बैंकिंग व्यवस्था इतनी कठिन है?क्या सरकार की योजनाएं वास्तव में अंतिम व्यक्ति तक पहुंच पा रही हैं?
और क्या ₹500 की पेंशन पाने के लिए किसी परिवार को इतनी अमानवीय पीड़ा झेलना जरूरी है?सोशल मीडिया पर वायरल इस वीडियो को देखकर लोग सरकार और प्रशासन की व्यवस्थाओं पर नाराजगी जता रहे हैं। लोगों का कहना है कि यह सिर्फ एक परिवार की कहानी नहीं, बल्कि ग्रामीण गरीबों की उस पीड़ा की तस्वीर है जिसे अक्सर सरकारी आंकड़ों में जगह नहीं मिलती।

