दुर्ग।ग्राम पंचायतों के अधिकार, विकास कार्यों में आ रही बाधाओं और वित्तीय स्वायत्तता की मांग को लेकर सोमवार को दुर्ग जिले के करीब 200 सरपंचों ने जिला मुख्यालय में शक्ति प्रदर्शन किया। दुर्ग, धमधा और पाटन विकासखंड के सरपंच एकजुट होकर कलेक्ट्रेट पहुंचे, जहां उन्होंने 17 सूत्रीय मांगों का ज्ञापन प्रशासन को सौंपते हुए स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि 30 दिनों के भीतर मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो जिलेभर के सरपंच अनिश्चितकालीन अनशन और व्यापक शक्ति प्रदर्शन करेंगे।
जिला सरपंच संघ के अध्यक्ष विनय चंद्राकर ने कहा कि प्रशासनिक प्रक्रियाओं और वित्तीय प्रतिबंधों के कारण ग्राम पंचायतों के विकास कार्य लगातार प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने पंचायतों को अधिक अधिकार और आर्थिक स्वतंत्रता देने की मांग करते हुए कहा कि 50 लाख रुपये तक के विकास कार्य सीधे ग्राम पंचायतों के माध्यम से कराए जाएं तथा ठेकेदारी व्यवस्था समाप्त की जाए, ताकि विकास कार्यों में पारदर्शिता और गति लाई जा सके।
पीएम आवास योजना और वित्त आयोग की राशि पर उठाए सवाल
सरपंच संघ ने प्रधानमंत्री आवास योजना-2.0 में अपात्र घोषित हितग्राहियों को पात्र सूची में शामिल करने, आवास निर्माण की राशि 2.50 लाख रुपये करने तथा भूमि की कमी वाले परिवारों को पहली मंजिल पर मकान निर्माण की अनुमति देने की मांग रखी।
इसके अलावा 16वें वित्त आयोग की राशि में जिला और जनपद स्तर पर की जा रही 10-10 प्रतिशत कटौती समाप्त कर पूरी राशि ग्राम पंचायतों को देने तथा वर्तमान जनसंख्या के आधार पर निधि वितरण की मांग भी प्रमुखता से उठाई गई।
गौठान, आबादी भूमि और जल जीवन मिशन पर भी उठी आवाज
ज्ञापन में गौठानों की शेष राशि का उपयोग गौ-सेवा के लिए करने, गौधाम योजना लागू करने, आवारा पशुओं के संरक्षण हेतु अलग बजट निर्धारित करने, घास भूमि को आबादी भूमि घोषित कर पात्र परिवारों को पट्टा देने तथा जल जीवन मिशन के कार्यों में ग्राम पंचायत का पूर्णता प्रमाण-पत्र अनिवार्य किए जाने की मांग शामिल रही।
जिला पदाधिकारी जानकी चौपड़िया ने कहा कि जाति, निवास, आय प्रमाण-पत्र, राशन कार्ड, जॉब कार्ड, नामांतरण सहित अन्य राजस्व संबंधी कार्यों की प्रक्रिया सरल, पारदर्शी और समयबद्ध बनाई जानी चाहिए।
मानदेय और पेंशन बढ़ाने की भी मांग
सरपंच संघ ने सरपंचों का मासिक मानदेय 20 हजार रुपये, उपसरपंचों का 5 हजार रुपये तथा पंचों का 2 हजार रुपये करने की मांग रखी। साथ ही पांच वर्ष का कार्यकाल पूरा करने वाले सरपंचों को 5 हजार रुपये मासिक पेंशन देने की भी मांग की गई।
30 दिन का अल्टीमेटम
सरपंच संघ के अध्यक्ष विनय चंद्राकर ने कहा कि प्रशासन को 30 दिनों का अल्टीमेटम दिया गया है। यदि निर्धारित समय सीमा के भीतर 17 सूत्रीय मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो जिलेभर के सरपंच लोकतांत्रिक तरीके से अनिश्चितकालीन अनशन और शक्ति प्रदर्शन करेंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी।
सरपंच संघ ने ज्ञापन की प्रतिलिपि केंद्रीय पंचायती राज मंत्री, केंद्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास मंत्री, छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री एवं पंचायत मंत्री, संबंधित सांसद-विधायकों तथा जिला एवं जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों को भी प्रेषित की है।