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15 दिनों के लिए बीमार पड़े भगवान जगन्नाथ, बंद हुए मंदिर के पट, अब रथयात्रा पर देंगे भक्तों को दर्शन

तिल्दा नेवरा -क्या भगवान भी बीमार पड़ते हैं…? सुनने में भले ही अजीब लगे, लेकिन तिल्दा-नेवरा के भगवान जगन्नाथ मंदिर में इन दिनों कुछ ऐसा ही नज़ारा देखने को मिल रहा है। धार्मिक मान्यता के अनुसार ज्येष्ठ पूर्णिमा के महास्नान के बाद भगवान जगन्नाथ, बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा 15 दिनों के लिए अस्वस्थ हो गए हैं। मंदिर के पट बंद हैं… भगवान भक्तों को दर्शन नहीं दे रहे… और उनके उपचार के लिए रोज़ औषधीय जड़ी-बूटियों से तैयार विशेष काढ़े का भोग लगाया जा रहा है। आखिर क्यों बीमार पड़ते हैं भगवान… क्या है इसके पीछे की धार्मिक मान्यता… और कब फिर होंगे भक्तों को दर्शन… हरिभूमि की खास रिपोर्ट।

नेवरा स्थित भगवान जगन्नाथ में ज्येष्ठ पूर्णिमा पर विशेष स्नान के बाद भगवान जगन्नाथ, बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा धार्मिक परंपरा के अनुसार 15 दिनों के लिए अस्वस्थ हो गए हैं। इसके चलते मंदिर के पट बंद कर दिए गए हैं और भगवान इन दिनों भक्तों को प्रत्यक्ष दर्शन नहीं दे रहे हैं। मंदिर में प्रतिदिन औषधीय जड़ी-बूटियों से तैयार विशेष काढ़े का भोग लगाया जा रहा है। मंदिर के प्रधान पुजारी वैष्णव ने बताया कि भगवान 15 दिनों के विश्राम और उपचार के बाद रथयात्रा के अवसर पर नगर भ्रमण करते हुए भक्तों को दर्शन देंगे।

धार्मिक मान्यता के अनुसार ज्येष्ठ माह की पूर्णिमा पर भगवान जगन्नाथ का विशेष जलाभिषेक किया जाता है। मान्यता है कि दिनभर चलने वाले इस महा स्नान के बाद भगवान को ज्वर हो जाता है, इसलिए वे 15 दिनों तक विश्राम करते हैं। इस अवधि में भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा भक्तों को दर्शन नहीं देते और उनका प्रतीकात्मक उपचार किया जाता है। प्रतिदिन विशेष औषधीय काढ़े का भोग लगाया जाता है, जिसे बाद में प्रसाद के रूप में श्रद्धालुओं में वितरित किया जाता है।

मंदिर के प्रधान पुजारी विजय वैष्णव ने बताया कि ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन सूर्योदय से लेकर अर्धरात्रि तक भगवान का जलाभिषेक होता है। इसके बाद भगवान 15 दिनों तक विश्राम करते हैं। इस दौरान मंदिर के पट बंद रहते हैं और श्रद्धालु बाहर से ही माथा टेककर भगवान का स्मरण करते हैं। उन्होंने बताया कि यह परंपरा वर्षों से चली आ रही है और बड़ी संख्या में श्रद्धालु भगवान के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना लेकर मंदिर पहुंचते हैं।

औषधीय जड़ी-बूटियों से तैयार होता है विशेष काढ़ा

पुजारी विजय वैष्णव के अनुसार भगवान को अर्पित किया जाने वाला काढ़ा विशेष विधि से तैयार किया जाता है। इसमें काली मिर्च, लौंग, इलायची, अदरक, तुलसी, कच्ची चीनी (मिश्री), मुलेठी और गुलाबजल जैसे प्राकृतिक तत्वों का उपयोग किया जाता है। भगवान को भोग लगाने के बाद यही काढ़ा प्रसाद के रूप में श्रद्धालुओं को वितरित किया जाता है। श्रद्धालु इसे आस्था के साथ ग्रहण करते हैं।

16 जुलाई को स्वस्थ होकर भक्तो को  देंगे दर्शन

मंदिर के पुजारी वैष्णव जी ने बताया कि धार्मिक परंपरा के अनुसार 15 दिनों के विश्राम के बाद 16 जुलाई (अमावस्या/रथयात्रा पर्व) पर भगवान जगन्नाथ पुनः भक्तों को दर्शन देंगे। इसी दिन भगवान का भव्य नगर भ्रमण निकलेगा और रथयात्रा महोत्सव का शुभारंभ होगा। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है।।

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