छत्तीसगढ़

नवरात्रि के चौथे दिन बड़ा हादसा, मंदिर से लौटते समय गिरा रोप वे, ,1 महिला की मौत 6 घायल

नवरात्रि के चौथे दिन बड़ा हादसा, मंदिर से लौटते समय गिरा रोप वे,1 महिला की मौत 6 घायल

महासमुंद-आज रविवार को नवरात्रि का चौथा दिन है औरछत्तीसगढ़ के सभी मंदिरों में भक्तों की लंबी भीड़ देखने को मिल रही है। इसी बीच महासमुंद के प्रसिद्ध मंदिर खल्लारी माता मंदिर में आज एक बड़ा हादसा हो गया। मंदिर परिसर में संचालित रोपवे का केबल अचानक टूट गया। अब इस घटना में एक महिला की मौत हो गई है। जबकि 16 लोग अभी भी घायल है। जिसमें चार लोगों की हालत नाजुक बताई जा रही है। जिन्हें इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

केबल टूटने से ट्रॉली झटके के साथ नीचे आ गई।

घायलों में बच्चे और बुजुर्ग भी शामिल हैं। सभी को तुरंत बागबाहरा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहां से उन्हें जिला अस्पलात रेफर किया गया है। जानकारी के मुताबिक श्रद्धालु देवी के दर्शन कर रोपवे से लौट रहे थे।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, श्रद्धालु दर्शन करके रोपवे से लौट रहे थे। केबल टूटने के बाद ट्रॉली अनियंत्रित हो गई। लगभग 20 फीट नीचे पहाड़ी की चट्टान से जा टकराई। इस जोरदार झटके के कारण ट्रॉली में बैठे लोगों को गंभीर चोटें आईं।

स्थानीय ग्रामीणों और पुलिस ने तुरंत राहत और बचाव कार्य शुरू किया।

हादसे के बाद मंदिर परिसर में अफरातफरी मच गई और बड़ी संख्या में मौजूद श्रद्धालु दहशत में आ गए। स्थानीय ग्रामीणों और पुलिस ने तुरंत राहत और बचाव कार्य शुरू किया। घायलों को निजी वाहनों की सहायता से अस्पताल पहुंचाया गया।

चैत्र नवरात्र के कारण खल्लारी मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ थी। स्थानीय लोगों ने रोपवे के नियमित रखरखाव और सुरक्षा मानकों की अनदेखी का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि यदि समय-समय पर इसका मेंटेनेंस किया जाता तो इस तरह की घटना से बचा जा सकता था।

घटना के बाद प्रशासन ने मामले की जांच के आदेश दिए हैं और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया है। पुलिस फिलहाल पूरे मामले की जांच कर रही है।

महासमुंद से 25 किमी. दक्षिण की ओर खल्लारी गांव की पहाड़ी के शीर्ष पर खल्लारी माता का मंदिर स्थित है। प्रतिवर्ष क्वांर और चैत्र नवरात्र के दौरान बड़ी संख्या में भक्तों की भीड़ इस दुर्गम पहाड़ी में दर्शन के लिए आती है।

हर साल चैत्र मास की पूर्णिमा के अवसर पर वार्षिक मेले का आयोजन किया जाता है। मंदिर तक पहुंचने के लिए करीब 800 सीढ़ियां चढ़नी होती है। ऐसा माना जाता है कि महाभारत युग में पांडव अपनी यात्रा के दौरान इस पहाड़ी की चोटी पर आए थे।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button