रायपुर-रायपुर से एक ऐसा मामला सामने आया है , जिसने इंसानियत को शर्मसार कर दिया है। एक महिला घर से निकली थी… अपने काम पर जाने के लिए। उसे क्या पता था कि रास्ते में मौत उसका इंतजार कर रही है। घात लगाए एक दरिंदे ने उसकी बेरहमी से हत्या कर दी सवाल सिर्फ एक महिला की हत्या का नहीं है… सवाल उस हवस और हैवानियत का है, जहां एक कि आरोपी ने पहले महिला के साथ जबरदस्ती की कोशिश की, विरोध करने पर उसकी हत्या कर दी… और इसके बाद भी उसकी हैवानियत नहीं रुकी।वह महिला के शव को सुनसान इलाके में ले गया और शव के साथ भी दुष्कर्म की कोशिश की।
छत्तीसगढ़ की राजधानी में आखिर अपराधियों के हौसले इतने बुलंद कैसे हैं? कोई इंसान इतना बेरहम कैसे हो सकता है? महिला की हत्या के बाद उसके शव के साथ भी दुष्कर्म की कोशिश करने जैसी मानसिकता आखिर पैदा कैसे होती है? क्या आरोपी के भीतर कानून का कोई डर नहीं था?
रायपुर के मुजगहन थाना क्षेत्र के स्वागत विहार के पास 23 जुलाई को पानी भरी जमीन में मिले महिला के शव की गुत्थी पुलिस ने सुलझाने का दावा किया है। पुलिस ने मामले में डीके साहू को गिरफ्तार किया है। लेकिन पुलिस पूछताछ में सामने आई वारदात की कहानी बेहद डरावनी है।
आरोप है कि आरोपी ने महिला के साथ जबरदस्ती करने की कोशिश की। महिला ने विरोध किया तो उसके साथ मारपीट की और फिर गला दबाकर उसकी हत्या कर दी। लेकिन आरोप है कि इसके बाद भी उसकी हैवानियत खत्म नहीं हुई।वह महिला के शव को सुनसान इलाके में ले गया और शव के साथ भी दुष्कर्म की कोशिश की। इसके बाद शव को पानी में फेंककर फरार हो गया।
पुलिस जांच में एक और चौंकाने वाली बात सामने आई है।बताया जा रहा है कि आरोपी ने वारदात से पहले करीब दो से तीन दिन तक महिला की रेकी की थी। ..यानी सवाल यह है—क्या यह अचानक हुआ अपराध था, या फिर एक सोची-समझी साजिश?
पुलिस के मुताबिक आरोपी पहले भी महिला संबंधी अपराध में जेल जा चुका है और पॉक्सो एक्ट के एक मामले में 10 साल की सजा काट चुका है। वह बाल गृह में भी रह चुका बताया जा रहा है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है की —अगर आरोपी का आपराधिक इतिहास पहले से सामने था, तो क्या उसकी गतिविधियों पर निगरानी की कोई व्यवस्था नहीं थी?
बता दे की 23 जुलाई की सुबह महिला अपने घर से काम के लिए निकली थी। वह बोरियाकला की रहने वाली थी और पास की एक सोसायटी में खाना बनाने का काम करती थी।
वाईस।”’लेकिन शाम तक वह घर नहीं लौटी। परिजन तलाश करते रहे… और बाद में झाड़ियों के पीछे पानी भरी जमीन में उसका शव मिला। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में गला दबाकर हत्या और जबरदस्ती के प्रयास की पुष्टि होने के बाद पुलिस ने जांच तेज की गई ।
वाईस ]लेकिन इस मामले में कई सवाल अब भी खड़े हैं—क्या अपराधी का पुराना रिकॉर्ड पुलिस के लिए बड़ा संकेत नहीं था? क्या महिलाओं की सुरक्षा के लिए सिर्फ वारदात के बाद कार्रवाई ही पर्याप्त है?क्या ऐसे अपराधियों की निगरानी के लिए कोई मजबूत सिस्टम नहीं होना चाहिए? और सबसे बड़ा सवाल…आखिर वह कौन-सी मानसिकता है, जो एक इंसान को हत्या के बाद भी हैवानियत की हद पार करने तक पहुंचा देती है? पुलिस आरोपी की मानसिक स्थिति की भी जांच करा रही है। शुरुआती जांच में सेक्सुअल साइकोपैथ जैसी प्रवृत्ति के संकेत मिलने की बात सामने आई है। हालांकि इसका अंतिम निष्कर्ष विशेषज्ञों की जांच के बाद ही सामने आएगा।
पुलिस ने आरोपी को भले ही गिरफ्तार कर लिया है ।लेकिन यह मामला सिर्फ एक गिरफ्तारी पर खत्म नहीं होना चाहिए।क्योंकि सवाल यह नहीं कि आरोपी पकड़ा गया या नहीं..सवाल यह है कि ऐसी मानसिकता पैदा ही क्यों होती है? और अगर किसी अपराधी का पुराना रिकॉर्ड सामने आ चुका था, तो उसकी निगरानी क्यों नहीं हुई?किसी महिला की सुरक्षा सिर्फ पुलिस की जिम्मेदारी नहीं…यह पूरे समाज की जिम्मेदारी है।और अब वक्त है कि हम सिर्फ वारदात के बाद सवाल न पूछें…बल्कि ऐसी हैवानियत को रोकने के लिए वारदात से पहले व्यवस्था और समाज—दोनों जागें। “गिरफ्तारी जरूरी है… लेकिन ऐसी हैवानियत की जड़ तक पहुंचना उससे भी ज्यादा जरूरी है।

