बस्तर से माओवाद नेतृत्व का अंत!..50 लाख रुपये के इनामी नक्सली नेता, पापाराव’ ने किया आत्मसमर्पण AK-47 के साथ पहुंचा,
बस्तर से माओवाद नेतृत्व का अंत!..50 लाख रुपये के इनामी नक्सली नेता, पापाराव’ ने किया आत्मसमर्पण AK-47 के साथ पहुंचा,

जगदलपुर: नक्सलियों के सबसे बड़े सक्रिय नेताओं में से एक पापाराव ने 17 साथी नक्सलियों के साथ कुटरू थाना पहुंचकर आत्मसमर्पण कर दिया है। यह आत्मसमर्पण साय सरकार के नक्सल उन्मूलन अभियान के लिए बड़ी कामयाबी मानी जा रही है। पापाराव के सरेंडर के साथ ही बस्तर में माओवाद नेतृत्व का लगभग अंत हो गया है। पापाराव 2010 में हुए ताड़मेटला हत्याकांड का मास्टरमाइंड माना जाता है और उस पर 50 लाख रुपये का इनाम घोषित था।
छत्तीसगढ़ के बस्तर को नक्सल मुक्त घोषित करने की डेडलाइन से करीब एक हफ्ते पहले बस्तर के अंतिम बड़े कैडर के नक्सली पापाराव ने सरेंडर कर दिया है। पापाराव अपने साथियों के साथ AK-47 समेत अन्य हथियार लेकर बीजापुर जिले के कुटरू थाने पहुंचा। यहां से बस सभी को लेकर जगदलपुर के लिए रवाना हुई।
पापाराव उर्फ मंगू (56) ये छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले का रहने वाला है। वर्तमान में DKSZCM मेंबर है। साथ ही पश्चिम बस्तर डिवीजन कमेटी का इंचार्ज और दक्षिण सब जोनल ब्यूरो का सदस्य है। अपने पास AK-47 राइफल रखता है। बस्तर के जल-जंगल जमीन से वाकिफ है इसलिए कई बार पुलिस की गोलियों से बचकर भाग निकला था।
डिप्टी सीएम विजय शर्मा ने कवर्धा में कहा कि ‘कुल 18 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है, जिनमें नक्सली पापा राव भी शामिल हैं। इनमें 10 पुरुष और 8 महिलाएं हैं। 8 AK-47, 1 SLR, 1 INSAS सहित अन्य हथियार बरामद किए गए हैं।
पापाराव के सरेंडर से नक्सलियों की पश्चिम बस्तर डिवीजन कमेटी लगभग खत्म है। देवा के सरेंडर करने के बाद अब पापाराव ही एक मात्र ऐसा नक्सली बचा था, जो फाइटर है। बाकी बचे हुए अन्य टॉप कैडर्स के नक्सली उम्र दराज हो चुके हैं। पापाराव के सरेंडर करते ही बस्तर से माओवाद का सफाया तय माना जा रहा है।
पिछले साल ही नक्सल संगठन के सबसे खूंखार नक्सली माड़वी हिड़मा, नक्सल संगठन का सचिव बसवाराजू, गणेश उइके समेत 17 बड़े कैडर्स का एनकाउंटर किया गया। भूपति, रूपेश, रामधेर जैसे बड़े नक्सलियों ने अपने सैकड़ों साथियों के साथ हथियार डाल दिए हैं।
बस्तर में बटालियन नंबर 1 का कमांडर देवा ने भी हिंसा का रास्ता छोड़ दिया है। अब केवल पापाराव ही एक ऐसा नक्सली बचा था, जो लड़ाकू है।


