छत्तीसगढ़

भद्रा के समय भूलकर न बांधें राखी, वरना भाई और उसके वंश के ऊपर मंडरा सकता काल का खतरा!

हर साल सावन माह की पूर्णिमा तिथि को रक्षाबंधन का त्यौहार मनाया जाता है। इस दिन बहनें अपने भाई की कलाई पर राखी बांधती हैं। इस बार रक्षाबंधन पर भ्रदा का साया मंडरा रहा है तो शुभ मुहूर्त देखकर ही भाई को राखी बांधें।

हिंदू धर्म में भद्रा काल को अशुभ माना जाता है। इस समय में कोई भी शुभ और मांगलिक कार्य नहीं किए जाते हैं। इस साल एक बार फिर रक्षाबंधन पर भद्रा पड़ रहा है। ऐसे में बहनों को शुभ मुहूर्त देखकर ही अपने भाई को राखी बांधना होगा। ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक, राखी हमेशा शुभ मुहूर्त को ध्यान में रखकर ही बांधनी चाहिए। भद्रा काल के समय पर भाई की कलाई पर राखी बांधने से उसका जीवन पर संकटों का बादल मंडरा सकता है। तो आइए जानते हैं कि साल 2023 में राखी बांधने का शुभ मुहूर्त क्या है और भद्रा काल को क्यों अशुभ माना गया है।

भद्रा काल में आखिर क्यों नहीं बांधी जाती है राखी?

पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक, लंकापति रावण की बहन शूर्पणखा ने भद्रा काल में अपने भाई को राखी बांधी थीं। परिणामस्वरूप रावण और उसके पूरे वंश का विनाश हो गया। यही वजह है भद्रा काल में राखी नहीं बांधी जाती है।

भद्रा को क्यों माना जाता है अशुभ

पौराणिक कथाओं के मुताबिक, भद्रा भगवान सूर्यदेव और माता छाया की बेटी और शनि देव की बहन है। कहा जाता है कि  जहां पर भी कोई पूजा-पाठ, अनुष्ठान,यज्ञ और मांगलिक कार्य होता था भद्रा वहां पर पहुंच कर उसमें रुकावट पैदा करने लगती थीं। इस वजह से भी भद्रा को अशुभ माना जाता है। यही कारण है कि भद्रा काल में कोई शुभ काम नहीं किया जाता है। साथ ही भद्रा लगने पर राखी भी नहीं बांधी जाती है।

रक्षाबंधन का महत्व

रक्षाबंधन का पर्व भाई-बहन के अटूट प्रेम का प्रतीक होता है। बहनें भाई की कलाई पर राखी बांधते हुए उसकी लंबी और सुखी जीवन की कामना करती हैं। रक्षाबंधन से जुड़ी मान्यताओं के मुताबिक, जो बहनें इस दिन शुभ मुहूर्त में अपने भाई को राखी या रक्षासूत्र बांधती हैं उसके भाई के जीवन पर कभी कोई संकट नहीं आता है। साथ ही भाई का परिवार सुखी और समृद्ध रहता है।

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