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दाम बढ़ाओ, माल घटाओ… FMCG कंपनियों ने महंगाई का निकाला तोड़, छोटे पैक की बढ़ी डिमांड

नई दिल्ली: क्या आपने कभी नोटिस किया है कि एक साल पहले 10 रुपये का बिस्कुट का जितना बड़ा पैकेट आता था, क्या अभी भी उतना ही बड़ा आता है ? शायद नहीं, पैकेट का साइज छोटा हो गया है। लेकिन कीमत 10 रुपये ही है..। दरअसल, कंपनियों ने महंगाई से बचने के लिए अपने-अपने प्रोडक्ट का साइज छोटा कर दिया है, लेकिन कीमत वही रखी है। वहीं दूसरी ओर बहुत सारी कंपनियां अब कम कीमत वाले छोटे पैक भी मार्केट में निकाल रही हैं…। कंपनियां प्रोडक्ट का वजन कम करके 5, 10 और 20 रुपये के मूल्य पैक को बनाए रखने पर फोकस कर रही हैं।

दरअसल, भारतीय उपभोक्ता काफी चीजों के छोटे पैक खरीद रहे हैं, ऐसा इसलिए क्योंकि किराने के सामान और घरेलू आपूर्ति की बढ़ती कीमतें उनके बजट से बाहर हो रही हैं..। साबुन, स्नैक्स और चाय जैसी चीजों पर महंगाई का सबसे ज्यादा असर पड़ा है। नुवामा इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज के विश्लेषकों ने एक नोट में कहा कि पाम ऑयल की कीमत में साल-दर-साल करीब 30% की बढ़ोतरी हुई है। उन्होंने कहा कि कीमतों में बढ़ोतरी के कारण उपभोक्ता छोटे पैक खरीद रहे हैं, जिसका नकारात्मक असर वॉल्यूम पर पड़ रहा है।

कंपनियों में बढ़ाई कीमत

महंगाई की मार झेल रही एफएमसीजी कंपनियों ने दिसंबर तिमाही में कीमतों में बढ़ोतरी की है। हिंदुस्तान यूनिलीवर (एचयूएल), गोदरेज कंज्यूमर प्रोडक्ट्स (जीसीपीएल) जैसी कंपनियों ने साबुन की कीमत में करीब 10% की बढ़ोतरी की है। वहीं बीकाजी ने अपने स्नैक्स और टाटा कंज्यूमर ने चाय की रेंज की कीमतों में बढ़ोतरी की है।

विश्लेषकों का तो यहाँ तक कहना कि चालू तिमाही में कुछ कंपनियां कीमतों मेंऔर बढ़ोतरी कर सकती हैं। मैरिको के एमडी और सीईओ सौगत गुप्ता ने हाल ही में टाइम्स ऑफ इंडिया को दिए एक इंटरव्यू में कहा था कि वह प्रोडक्ट्स की कीमत में वृद्धि करने की प्रक्रिया में हैं।

शहर में कमजोर हुई मांग

कमजोर शहरी मांग के कारण FMCG कंपनियों की वृद्धि धीमी रही है। वहीं अच्छे मानसून के कारण ग्रामीण बाजार बढ़ रहे हैं। हालांकि, सुधार धीरे-धीरे हो रहा है और अकेले शहरी मंदी की भरपाई नहीं कर सकता। उच्च कमोडिटी मुद्रास्फीति का मतलब है कि कंपनियों के पास खपत बढ़ाने के लिए कीमतें कम करने की कोई गुंजाइश नहीं है।

एक विश्लेषक ने कहा कि अगर उपभोक्ता 1 किलो चाय और मल्टी-पैक साबुन खरीदने की जगह 500 ग्राम चाय पैक और एक या दो साबुन खरीदने लगते हैं तो यह निश्चित रूप से कंपनियों की तिमाही वॉल्यूम वृद्धि को प्रभावित करेगा।

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