तिल्दा-नेवरा शहर के लिए शनिवार की सुबह एक ऐसी दुखद खबर लेकर आई, जिसने हर किसी की आंखें नम कर दीं। कांग्रेस के युवा नेता एवं सिंधी समाज के सक्रिय कार्यकर्ता संजय भोजवानी का असमय निधन हो गया। उनके निधन की खबर जैसे ही शहर में फैली, लोगों को पहले तो विश्वास ही नहीं हुआ कि हमेशा मुस्कुराते रहने वाले, सबके सुख-दुख में साथ खड़े रहने वाले संजय अब इस दुनिया में नहीं रहे।
संजय भोजवानी अपने पीछे पत्नी, पिता, भाई, बेटे सहित भरा-पूरा परिवार छोड़ गए हैं। उनका यूं अचानक चले जाना न केवल परिवार, बल्कि पूरे शहर और समाज के लिए एक अपूरणीय क्षति बन गया है। वे सामाजिक कार्यों में हमेशा बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते थे और सिंधी समाज के हर आयोजन में उनकी सक्रिय भागीदारी रहती थी। युवाओं के बीच उनकी अलग पहचान थी और मिलनसार स्वभाव के कारण वे हर किसी के दिल के करीब थे।
उनके निधन पर भाजपा, कांग्रेस सहित विभिन्न सामाजिक संगठनों और सिंधी समाज के लोगों ने गहरा शोक व्यक्त किया है। शहर के लोगों का कहना है कि संजय जैसा हंसमुख और मददगार इंसान बहुत कम देखने को मिलता है।
जिंदगी का यही सबसे बड़ा सच है कि एक दिन हर किसी को इस दुनिया को छोड़कर जाना होता है, लेकिन कुछ लोग इतनी कम उम्र में इस तरह अलविदा कह जाते हैं कि पीछे सिर्फ आंसू और यादें छोड़ जाते हैं। संजय भले ही आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी मुस्कान, उनका अपनापन और उनके साथ बिताए पल हमेशा लोगों के दिलों में जिंदा रहेंगे।
स्व. संजय भोजवानी, डॉक्टर चंद्रपाल भोजवानी के पुत्र, ,मुकेश दिलीप भोजवानी राकेश के भाई,पूज्य सिंधी पंचायत के वरिष्ठ भीमसेन भोजवानी,विजय भोजवानी के भतीजे एवं कुणाल भोजवानी के पिता थे।
स्वर्गीय संजय भोजवानी का अंतिम संस्कार शनिवार सुबह 11 बजे सार्वजनिक सिंधी श्मशान घाट में किया जाएगा।

