छत्तीसगढ़

नया कानून लागू, तिल्दा दो FIR दर्ज ,टी आई बोले-अपराध से निपटने के लिए आया अब नया कानून

तिल्दा नेवरा-आज से आज (1 जुलाई) से नया कानून लागू हो गया है। अब IPC (इंडियन पीनल कोड) का नाम बदल कर भारतीय न्याय संहिता (BNS) कर दिया गया है। इसके तहत जहां कई अपराध के लिए नई धाराएं हो गई हैं। वहीं कुछ धाराओं के नियम भी बदल गए हैं। जैसे फोन या ई-मेल के जरिए थाने में केस दर्ज कराए जा सकेंगे।

नए नियमों को लेकर प्रदेश के सभी थानों में उत्सव मनाया गया। इसी कड़ी में तिल्दा नेवरा थाना में भी उत्सव मनाया गया , दूसरी ओर तिल्दा नेवरा थाने में नए कानून के तहत दो FIR मारपीट के दर्ज हुए  है। टीआई जितेन्द्र सायया  ने बताया कि मामला शाम को दर्ज हुआ है।

नगर पालिका अध्यक्ष लेमीक्षा गुरु डहरिया ने 3 नए आपराधिक कानूनों पर कहा कि, ब्रिटेन की संसद में पारित कानूनों से भारत में प्रशासन आगे बढ़ रहा था। अपने देश की आवश्यकताओं के अनुरूप जो कानून होने चाहिए वो आज लागू हो चुके हैं। अब जो FIR होंगी वो नई धाराओं के अंतर्गत होंगी।पार्षद विकास कोटवानी ने कहा पहले राजद्रोह हुआ करता था, अब राजद्रोह समाप्त हो गया है।अब राष्ट्रद्रोह है। थाना प्रभारी बोले-अपराध से निपटने के लिए आया है  नया कानून अगर किसी ने देश को गाली दी या देश की संपत्ति को नुकसान किया तो बड़ी धाराएं लगेंगी।

 जानिए नए कानून में क्या बदलाव हुए है …

नए कानून यानी BNS में 511 की जगह अब 358 धाराएं रह गई हैं। इसी तरह CRPC (कोड ऑफ क्रिमिनल प्रोसीजर) का नाम बदलकर भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता कर दिया गया है। CRPC में 484 धाराएं थीं। भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता में 531 धारा की गई हैं। भारतीय साक्ष्य अधिनियम में अधिक बदलाव नहीं हुआ है, इसमें 170 सेक्शन हैं। बदलाव का उद्देश्य दंड की जगह न्याय दिलाना है।

कई धाराओं के क्रम को परिवर्तित किया गया है जबकि कुछ धाराओं के नियमों में बदलाव हुआ है। तीनों कानून में बदलाव के बीच महिला संबंधी अपराधों को ऊपर कर दिया गया है। नए कानून की जानकारियां उपलब्ध कराने के लिए पुलिस अधिकारियों का तीन दिवसीय प्रशिक्षण हो चुका है जिसमें सभी नियम बताए गए हैं।

  • भारतीय न्याय संहिता (BNS) में 20 नए अपराध जोड़े गए हैं।
  • ऑर्गेनाइज्ड क्राइम, हिट एंड रन, मॉब लिंचिंग पर सजा का प्रावधान।
  • डॉक्यूमेंट में इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल रिकॉर्ड शामिल हैं।
  • IPC में मौजूद 19 प्रावधानों को हटा दिया गया है।
  • 33 अपराधों में कारावास की सजा बढ़ा दी गई है।
  • 83 अपराधों में जुर्माने की सजा बढ़ा दी गई है।
  • छह अपराधों में सामुदायिक सेवा की सजा का प्रावधान किया गया है।

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