चार दिनों से 40 पार तापमान, पानी का संकट गहराया, दोपहर में सड़कों पर सन्नाटा
तिल्दा नेवरा
मई का महीना अभी शुरू भी नहीं हुआ है और गर्मी ने अपना विकराल रूप दिखाना शुरू कर दिया है। अप्रैल में ही पारा 43 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच चुका है, जिससे आम जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है।पिछले चार दिनों से शहर का तापमान लगातार 41 डिग्री से ऊपर बना हुआ है। सोमवार को तो हालात और भी भयावह रहे—दोपहर 12 बजे से पहले ही तापमान 42 डिग्री पार कर गया, जबकि दोपहर 2 बजे के बाद भी पारा 43 डिग्री के आसपास पहुंच गया ।
भीषण गर्मी के चलते लोगों की दिनचर्या पूरी तरह बदल गई है। लोग अपने जरूरी काम सुबह 12 बजे से पहले ही निपटा रहे हैं और इसके बाद घरों में दुबकने को मजबूर हैं। शाम 7 बजे के बाद ही सड़कों पर फिर से हलचल देखने को मिल रही है।दोपहर के समय व्यस्त रहने वाली सड़कों पर सन्नाटा पसरा नजर आ रहा है। बाजार सूने हैं और गर्म हवाओं के थपेड़े लोगों को घरों में कैद कर रहे हैं।
💧 पानी का संकट गहराया
गर्मी के बढ़ते प्रकोप के बीच जल संकट भी गंभीर होता जा रहा है। शहर के ज्यादातर हैंडपंप सूख चुके हैं, जबकि सरकारी नलों से मात्र 5 से 10 मिनट ही पानी मिल पा रहा है। ऐसे में लोगों को पीने के पानी के साथ-साथ दैनिक उपयोग के लिए भी भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
👉 वार्ड 16 निवासी सरला देवी ने बताया की बोर से पानी कम निकल रहा है 15 मिनट तक चलने के बाद पंप पानी के बदले हवा छोड़ने लगता है इसलिए “पानी के लिए सुबह 4बजे उठाना पड़ता है .सुबह बोर .से पानी का फोर्स ठीक रहता है ।..वार्ड 17 में पानी की समस्या है दो बाल्टी पानी के लिए लाइन लगानी पड़ रही है, फिर भी पर्याप्त नहीं मिल रहा” – यह रहने वाली द्रोपती साहू ने बताया महल्ले में पानी की बड़ी समस्या है।
लू जैसे हालात, स्वास्थ्य पर खतरा
लोगो का कहना है की अभी अप्रैल में ये हाल है, तो मई-जून में क्या होगा… सोचकर ही डर लग रहा है” – धूप ऐसी लग रही है जैसे आसमान से आग बरस रही हो” –”दोपहर में बाहर निकलना मतलब खुद को आग के हवाले करना है”। तेज धूप और गर्म हवाओं के कारण लू जैसे हालात बनते जा रहे हैं। डॉक्टरों ने लोगों को दोपहर में घर से बाहर न निकलने और पर्याप्त पानी पीने की सलाह दी है।
मौसम विभाग के मुताबिक, इस साल मई और जून में रिकॉर्ड तोड़ गर्मी पड़ने की आशंका जताई गई है। सामान्य तौर पर इन महीनों में 3 से 7 हीट वेव डे दर्ज होते हैं, लेकिन इस बार इनकी संख्या औसतन 5 से 7 दिन अधिक हो सकती है।
मौजूदा हालात साफ इशारा कर रहे हैं कि आने वाला समय और भी चुनौतीपूर्ण हो सकता है। अप्रैल में ही जिस तरह की भीषण गर्मी देखने को मिल रही है, वह जून में आने वाले संकट की सिर्फ शुरुआत मानी जा रही है। गर्मी अब मौसम नहीं, मुसीबत बन चुकी है… और इसका असली इम्तिहान अभी बाकी है!”

