Homeछत्तीसगढ़तिल्दा नगर पालिका में फिर बदली PIC, भाजपा की अंदरूनी खींचतान तेज

तिल्दा नगर पालिका में फिर बदली PIC, भाजपा की अंदरूनी खींचतान तेज

16महीने में दूसरी बार कार्यकारिणी भंग, जल विभाग सभापति संतोष यादव हटाए गए; पार्षदों में चर्चा और नाराजगी

तिल्दा-नेवरा -नगर पालिका में एक बार फिर प्रेसिडेंट इन काउंसिल (PIC) का पुनर्गठन किया गया है। नगर पालिका अध्यक्ष ने पूर्व कार्यकारिणी को भंग कर नई कार्यकारिणी का गठन कर दिया है। इस फेरबदल में जल विभाग के सभापति संतोष यादव को समिति से बाहर कर दिया गया है। अध्यक्ष के करीब 16 माह के कार्यकाल में यह दूसरी बार है, जब पीआईसी को भंग कर नए सभापतियों की नियुक्ति की गई है।

इससे पहले भी भाजपा की सक्रिय पार्षद रानी सौरभ जैन को उनके जन्मदिन से ठीक एक दिन पहले सभापति पद से हटाए जाने की चर्चा नगर की राजनीति में रही थी। लगातार दूसरी बार पीआईसी में बड़े बदलाव को लेकर नगर पालिका और राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है।

नगर पालिका के कुछ पार्षदों ने नाम प्रकाशित नहीं करने की शर्त पर बताया कि इन दिनों भाजपा के भीतर गुटबाजी और खींचतान बढ़ती नजर आ रही है। उनका कहना है कि पीआईसी में वही पार्षद टिक पाता है, जो अध्यक्ष के साथ पूरी तरह तालमेल बनाकर चलता है। हालांकि इस संबंध में कोई भी पार्षद खुलकर बयान देने को तैयार नहीं है।
चर्चा इस बात की भी है कि कार्यकारिणी भंग किए जाने की जानकारी कई पार्षदों को बाद में मिली। उनका कहना है कि यदि पीआईसी में बदलाव किया जाना था तो इसकी सार्वजनिक जानकारी दी जानी चाहिए थी, ताकि भ्रम और अनावश्यक विवाद की स्थिति पैदा न हो।

स्थानीय राजनीतिक हलकों में यह भी चर्चा है कि नगर पालिका के कई महत्वपूर्ण निर्णयों में अध्यक्ष के पति और एक कांग्रेस समर्थित पार्षद की भूमिका प्रभावी है। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। वहीं, कुछ पार्षदों का कहना है कि भाजपा के भीतर दो गुट सक्रिय हैं, जिससे संगठन और परिषद की कार्यप्रणाली प्रभावित हो रही है।

उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ नगरपालिका अधिनियम के तहत नगर पालिका अध्यक्ष को पीआईसी का गठन एवं पुनर्गठन करने का अधिकार प्राप्त है। अधिनियम के अनुसार सदस्य को हटाने से पहले कारण बताओ नोटिस देना अनिवार्य नहीं है। इसके बावजूद बार-बार कार्यकारिणी में बदलाव को लेकर राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं।

नगर पालिका का कार्यकाल अभी तीन वर्ष से अधिक शेष है। ऐसे में बार-बार हो रहे बदलाव आने वाले समय में स्थानीय राजनीति और भाजपा संगठन पर क्या असर डालेंगे, इस पर सबकी नजर बनी हुई है।

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