जनसुनवाई में फूटा ग्रामीणों का गुस्सा, महिलाओं ने संभाला मोर्चा .साफ शब्दों में कह दिया ‘जान दे देंगे, लेकिन गांव में पावर प्लांट नहीं लगने देंगे…’
इंदर कोटवानी
तिल्दा नेवरा -रायपुर जिले के तिल्दा नेवरा तहसील के ग्राम देवरी-घुलघुल में प्रस्तावित अग्रसेन स्टील एंड पावर प्राइवेट लिमिटेड के लिए पर्यावरण को लेकर आयोजित जनसुनवाई का ग्रामीणों ने एकजुट होकर जमकर विरोध किया। जनसुनवाई में गांव के 1000 से भी अधिक लोगों ने पावर प्लांट नहीं खुलने देने की बात कही ।सबसे बड़ी बात यह है की जनसुनवाई थी किसी व्यक्ति ने स्पंज एवं पावर खुलने के पक्ष में नहीं बोला। इतना ही नही आसपास से लगे आधा दर्जन ग्राम पंचायतो के सरपंचो पचो ने भी ग्रामीणों के समर्थन में आकर प्रस्तावित सयंत्र का विरोध किया ।
बता दे की तिल्दा के देवरी घुलघुल स्पंज पावर के द्वारा पहले भी दो बार पर्यावरण जनसुनवाई के लिए तारीख तय की गई थी…लेकिन ग्रामीणों के विरोध के चलते सुनवाई रद्द कर दी गई थी .। हालांकि पावर प्लांट खुलने के लिए किसी गांव के व्यक्ति ने जमीन नही बेची है। बताया जाता है कि गाव की जिस जमीन पर स्पंज एवं पावर लगाया जाना प्रस्तावित है उस जमीन पर 60 सालो से दोनों गावो के मवेशी चरते है बावजूद शासन द्वरा उस जमीन को प्रस्तावित अग्रसेन स्टील एंड पावर प्राइवेट लिमिटेड को दे दी और जब इसकी जानकारी गाव वालो को हुई तो उसी दिन से विरोध शुरू हो गया.और गांव में पावर प्लांट नहीं खुलने को लेकर सभी ग्रामीण एक हो गए। साथ ही गांव से लगे ग्राम पंचायतों के सरपंच और पच विरोध में आ गए ।,विरोध को देखते हुए कंपनी मैनेजमेंट ने तथाकथित कुछ नेताओं से संपर्क किया और उन्हीं के कहने पर जल्दबाजी में जनसुनवाई की तारीख मुकर्रर करा दी। बाद में जनसुनवाई की तारीख पे तारीख बधाई गई ।.इस बीच ग्राम पंचायत देवरी के महिला सरपंच के द्वारा सचिव से मिलकर पंचायत की ओर से अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी कर दिया गया लेकिन ग्राम सभा में उसका अनुमोदन नहीं कराया गया। जिसके बाद से ग्रामीण आक्रोशित हो गए और खुलकर पावर प्लांट खुलने का विरोध करना शुरू कर दिया ।

गुरुवार को जब जनसुनवाई शुरू हुई तो ग्रामीणों ने बाहरी नेताओं को पंडाल में घुसने नहीं दिया ..गांव के लोग परिवार के साथ सुबह से ही पंडाल में आ गए थे..विरोध करने आए ग्रामीणों की संख्या इतनी ज्यादा थी की पंडाल छोटा पड़ गया। साढ़े 10 बजे जनसुनवाई करने पहुंचे पर्यावरण के अधिकारियों ने बताया कि यह पावर प्लांट लगाया जाना प्रस्तावित है। अधिकारियों ने जैसे ही जानकारी देना शुरू किया ग्रामीणों ने नारेबाजी शुरू कर दी .आज बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया था…। एडिशनल एसपी डीएसपी वीरेंद्र चतुर्वेदी सहित आसपास थाने के टीआई और अधिकारियों के साथ पुलिस बल को बुला लिया गया था। कड़ी सुरक्षा के बीच ग्रामीणों ने अधिकारियों के सामने अपनी बात रखी और पावर प्लांट खुलने का खुलकर विरोध किया।
और ग्रामीण महिला पुरुषो ने अधिकारियों के सामने सयंत्र खुलने का विरोध करते हुए बोलना शुरू कर दिया औरजनसुनवाई में शामिल अधिकारियों को आवेदन भी सौपा। विरोध करने वालों में पुरुषों की अपेक्षा महिलाओं की संख्या अधिक थी। यह पहला मौका है जब जनसुनवाई में ना किसी नेता को बोलने का मौका मिला ना ही अन्य जनप्रतिनिधि को, छत्तीसगढ़ क्रांति सेना के कुछ नेता पहुंचे थे उन नेताओं ने भी ग्राम वासियों का समर्थन करते हुए संयंत्र का विरोध किया।
बताया जाता है कि जिन दलाल किसम के नेताओं ने जनसुनवाई को सफल बनाने के लिए ठेका लिया था वे नेता ग्रामीणों केआक्रोश को देखते हुए जनसुनवाई से अपनी दूरी बनाऐ रखे ।, कुछ नेताओं के तो नाम लेकर ग्रामीण काफी उत्तेजित थे। ग्रामीणों ने कहा कि चाहे हमारी जान चली जाए, लेकिन हम यहा की धरा पर पावर प्लांट नहीं लगने देंगे, मरने के लिए तैयार ग्रामीणों ने कहा की जरूरत पड़ी तो हम मारने से भी पीछे नहीं हटेंगे। ग्रामीणों की एकजुटता को लेकर पूरे क्षेत्र में चर्चा हो रही है। हालांकि जनसुनवाई में खलल पैदा करने के लिए दलाल नेताओं ने कुछ बदमाश किस्म के लोगों को बाहर से बुलाया था लेकिन वे भी, पंडाल में प्रवेश नहीं कर सके। ग्रामीणों का कहना है कि फैक्ट्री के लगने से खेती किसानी प्रभावित हो रही है. फैक्ट्री के कारण धीरे-धीरे यहां की जमीन की उर्वरक क्षमता खत्म हो रही है . यहां के लोग कृषि पर ही निर्भर हैं. खेती-किसानी से ही उनका घर चलता है. उनके ऊपर बेरोजगारी, भूखमरी और वातावरण दुषित होने से स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं भी उत्पन्न होगी. इसलिए हम स्पंज पावर नही खुलने देंगे पहला विरोध गाव के पंच ने दर्ज कराया

