रायगढ़-छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में धान खरीदी केंद्रों पर हाथियों का आतंक बढ़ गया है, जहाँ रात में हाथी आकर धान की बोरियाँ खा रहे हैं और नुकसान पहुँचा रहे हैं, जिससे ग्रामीण और वन विभाग परेशान हैं; वन विभाग द्वारा हाथियों को भगाने और निगरानी के प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन जंगल की कमी और भोजन की तलाश में ये जंगली जानवर लगातार धान केंद्रों पर हमला कर रहे हैं, जिससे किसानों और प्रशासन के लिए चुनौती बढ़ गई है।बंगुरसिया धान खरीदी केंद्र में पिछले 10 दिन में हाथियों ने 76 बोरी धान का नुकसान किया है।
हाथियों के धान खाने और धान फेंकने की तस्वीर भी सामने आई है।लगातार नुकसान से परेशान ग्रामीण अब अपने धान की रखवाली में रात 8 बजे के बाद अलर्ट हो जाते है, सुबह 4 बजे तक वहीं रहते है।। वन विभाग की मदद से ग्रामीण 3-4 सदस्य की टीम बनाकर अलग-अलग जगहों पर टॉर्च लेकर खड़े रहते है।
वनकर्मियों के मुताबिक रायगढ़ वन परिक्षेत्र में 29 हाथियों और 5 हाथियों का दल अलग-अलग दिशा में विचरण कर रहा है। बंगुरसिया इलाके में 3 हाथी ज्यादा एक्टिव है। शाम साढ़े 7 बजे 3 हाथियों का दल बंगुरसिया धान मंडी तक पहुंचा। फिर एक-एक कर धान की बोरी ले गया। खाने और फैलाने के बाद हाथी फिर आते है। रात भर यह क्रम चलता है।इस दौरान वनकर्मी और ग्रामीण मिलकर हाथियों को भगाने का प्रयास करते है। फिर भी रात के अंधेरे में हाथी चिंघाड़ते हुए या चुपके से खरीदी केंद्र में पहुंचता है। पिछले 10 दिनों से ऐसा ही हो रहा है।
28 दिसंबर की रात 3 हाथी मंडी में आए हुए थे, जिसमें से एक हाथी 1-2 बोरी धान खा कर बस्ती होते हुए जंगल की ओर लौट गया। इसके बाद 2 हाथी धान की बोरियों से कुछ ही दूरी में अलग-अलग कोने में झाड़ियों में छिपकर खड़े थे।
हाथी माहौल के शांत होने की राह देख रहे थे लेकिन ग्रामीण और वनकर्मी उन पर टार्च की रोशनी दिखा रहे थे, ताकि वे बोरियों तक न पहुंचे। कुछ नुकसान न करे और लोगों की मौजूदगी को देखकर वापस जंगल लौट जाए, लेकिन ऐसा नहीं था।हाथी काफी देर तक ही उसी जगह पर अपना कान हिलाते खड़े रहे। इसी बीच मौका मिलते ही एक दंतैल धान की बोरियों तक पहुंचा और अपने बड़े दांत को बोरी में घुसा कर सुंड से उठाकर जंगल की ओर ले गया।
इस दौरान ग्रामीण कई तरह की आवाज करते हुए उसके पीछे भी गए। ताकि वे धान का बोरा छोड़ दे, लेकिन हाथी बोरी लेकर जंगल चला गया। वहां बोरी फाड़कर धान खाने और फैलाने लगा। हाथी जंगल की ओर चले जाए, इसके लिए गजराज वाहन से कई बार सायरन भी बजाया गया, लेकिन इसका भी कोई खास फर्क उन पर नहीं दिखा। यह सिलसिला देर रात तक ऐसे ही चलते रहा।
इस दौरान वनकर्मियों ने गांव के ग्रामीणों को दूर रहने की समझाइश दी, ज्यादा रात होने पर ग्रामीणों की कुछ भीड़ वापस घर जाने लगी, पर हाथी मित्र दल और वनकर्मी वहीं डटे रहे। ऐसे मे भीड़ कम होने से हाथी फिर से धान की बोरियों तक पहुंचे और एक-एक कर धान की बोरियों को उठाकर जंगल किनारे ले जाकर खाते रहे। यह सिलसिला सुबह के 3 बजे तक चलते रहा। जब उनका पेट भर गया, तो वे वापस जंगल की ओर चले गए।
रायगढ़ SDO मनमोहन मिश्रा ने बताया कि जब से मंडी शुरू हुई तब से हाथी का आना जाना शुरू हो गया है। हाथी धान का बोरा उठाकर फैला और खा रहा है। कई बार बीच-बीच में हाथी शाम 7 बजे आ जाता है। हमारे स्टाफ लगे हुए हैं और मंडी वाले भी होते हैं। ऐसा भी होता है कि किसी रात दो बार हाथी आ जाते हैं। नुकसान का आंकलन कर मुआवजा बनाया जा रहा है

