Friday, February 20, 2026
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रमजान का पवित्र माह- ए -रमजान का आगाज,12 साल बाद फरवरी में रोजे ,

,गुरुवार पहला रोजा 13.05 तक रहा, मस्जिदें जगमग हुई, बाजारों में उमड़ी भीड़

पांच जुम्मे आएंगे पहला आज

तिल्दा नेवरा चांद दिखने के साथ ही रमजान का पवित्र माह- ए -रमजान का आगाज गुरुवार से हो गया। इसके साथ ही मस्जिदों में तरावीह की नमाज का दौर शुरू हो गया। रमजान का चांद इस्लामिक कैलेंडर के शाबान महीने की 29वीं या तीसवीं शाम को देखा जाता है, इसके बाद पवित्र रमजान का महीना शुरू हो जाता है। रमजान इस्लामी हिजरी कैलेंडर का नौवां महीना होता है ,जो 29 या 30 दोनों का होता है और इसमें रोजेदार पूरे महीने रोजा रखते हैं। मक्का मदीना में रमजान का चांद 17 फरवरी को दिखाई देने पर बुधवार को वहां पहला रोजा रखा गया ।रमजान के आगाज के साथ मुस्लिम समुदाय के लोगों ने गुरुवार को अल सुबह रोजेदारों ने खुदा से रोजा कबूल करने की दुआ करते हुए पहला रोजा रखा। इस बार रोज में पांच जुम्मे आएंगे। पहला जुम्मा आज है। जुम्मे की नमाज का महत्व आम दिनों की तुलना में अधिक माना जाता है।

रमजान के इस पवित्र महीने में,सभी मुसलमान पूरे महीने बहुत पवित्र तरीके से रोजा रखते हैं. शाम को इफ्तार किया जाता है. रोजा रमजान के त्योहार का एक अहम हिस्सा है। पूरे महीने सूर्योदय से सूर्यास्त तक कड़ा रोजा रखा जाता है। रोजे से सेल्फ-कंट्रोल और डिसिप्लिन बढ़ता है. रमजान के महीने में जकात भी दी जाती है, जिसका मतलब है अपनी दौलत का एक हिस्सा गरीबों को दान करना. मुसलमान रमजान के त्योहार के दौरान इफ्तार दावत को भी एक जरूरी परंपरा मानते हैं।.

12 साल बाद फरवरी में रोजे

इस्लामी कैलेंडर के अनुसार रमजान हर वर्ष लगभग 10 से 11 दिन पहले आते हैं ।12 साल बाद इस बार फिर रमजान का माह फरवरी में आया है। इससे पहले वर्ष 2014 में रमजान फरवरी में आया था। फरवरी में रोजा पडने से सहरी और इफ्तार के बीच का समय अपेक्षाकृत कम रहेगा। जिससे रोजेदारों को शारीरिक रूप से सहूलियत भी मिलेगी। इस माह के अंत तक रोजि की अवधि 13 से 14 घंटे तक पहुंच जाएगी।

रोजा में पांच जुम्मे आएंगे, पहला आज

रोजा में इस बार पांच जुम्मे भी आएंगे रमजान माह में जुम्मे की नमाज का महत्व आम दिनों की तुलना में अधिक माना जाता है। इस बार जुम्मा दूसरे रोज, फिर 9वें 16वे 23 वें और 30 वें रोजे के दिन रहेगा।

इस्लाम में रोज रखना फर्ज

मौलवी रजा साहब ने कहा कि इस्लाम में रोज रखना फर्ज फरमाया है ।इस्लाम के पांच प्रमुख स्तंभ में शहादा ,ईमान की गवाही। पांच वक्त की नमाज पढ़ना,जकात देना, रोजा रखना, और आर्थिक रूप से सक्षम होने पर हज यात्रा करना फर्ज माना है। इस्लाम को मानने वाला हर शख्स जो बालिक हो और बीमार ना हो रोजा रखना उसका फर्ज है।

रमजान का आज पहला जुम्मा है आज मस्जिदों में विशेष नमाज अदा की जाएगी। माह रमजान के आगाज के साथ ही इफ्तिखार परियों का दौर शुरू हो गया है। मौलवी ने बताया कि 5 साल से रमजान का आगाज अप्रैल में व जून में हो रहा था जो की भीषण गर्मी का सीजन है। इस बार सर्दी की विदाई और गर्मी की शुरुआत पर रोज शुरू हो रहे हैं। रोजेदारों के लिए ना ज्यादा ठंड रहेगी ना भीषण गर्मी।

 

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