प्रयागराज-तीर्थनगरी प्रयागराज में चल रहे महाकुंभ में श्रद्धालु आज चौथे दिन संगम में डुबकी लगा रहे हैं। बीचे तीन दिनों में करोड़ों लोग पवित्र स्नान कर चुके हैं..। आयोजन से प्रभावित कई विदेशी लोग भी सनातन के रंग में रंगे दिखाई दे रहे हैं..। आज से त्रिवेणी के संगम पर कला-संस्कृति का महाकुंभ सजेगा चार जगहों पर सजे 24 मंचों पर 5,250 कलाकार अपनी-अपनी कला की प्रस्तुतियां देंगे..। आज से गंगा पंडाल में काशी के ऋत्विक सान्याल के शास्त्रीय गायन से महोत्सव प्रारंभ होगा और यमुना, सरस्वती पंडाल में 16 जनवरी को और त्रिवेणी पंडाल में 21 जनवरी से अनवरत सांस्कृतिक प्रस्तुतियां श्रोताओं के आकर्षण का केंद्र रहेंगी।
महाकुंभ में केंद्र सरकार के आमंत्रण पर 10 देशों का 21 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल आज संगम में पवित्र स्नान करेगा। अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधिमंडल में फिजी, फिनलैंड, गुयाना, मलेशिया, मॉरीशस, सिंगापुर, दक्षिण अफ्रीका, श्रीलंका, त्रिनिदाद और टोबैगो तथा संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के प्रतिनिधि शामिल हैं।

आपको बता दे 45 दिनों तक चलने वाले महाकुंभ के चौथे दिन भक्तों ने त्रिवेणी संगम ( गंगा, यमुना और ‘रहस्यमय’ सरस्वती नदियों के पवित्र संगम) पर पवित्र डुबकी लगाई। दुनिया के सबसे बड़े धार्मिक आयोजन में 6 करोड़ से लोग अब तक हिस्सेदारी कर चुके हैं।
महाकुंभ मेंकई अदभुद नजारे भी देखने को मिल रहे है कांटों पर लेटे ‘कांटे वाले बाबा’ सबका ध्यान अपनी ओरआकर्षित कर रहे है । रमेश कुमार मांझी को कांटों वाले बाबा के नाम से जाना जाता है। कांटों पर लेटकर वह कहते हैं कि यह सब ईश्वर की कृपा है जिससे यह संभव हो पाता है।
प्रख्यात गायक कैलाश खेर ने कहा कि महाकुंभ संगम की चर्चा हर जगह हो रही है। यह महोत्सव ऐतिहासिक है। 144 साल बाद जो संयोग बना है वह बहुत अद्भुत है। भारत एकमात्र ऐसी सभ्यता है जहां जीवन जीने की कला पूरी तरह से विज्ञान आधारित है। भारत एकमात्र सभ्यता है जहां हम मानवता और प्रकृति को मानवीय मूल्यों के साथ पोषित करते हैं और हम प्रकृति की देखभाल करते हैं।
उधर सेक्टर-5 से लेकर सेक्टर-20 तक जहां कहीं शिविर या अखाड़े हैं, वहां भंडारे भी हैं। 12 किलोमीटर के क्षेत्र में 100 से ज्यादा भंडारे लोगों को भोजन देकर अन्न सेवा कर रहे हैं। बड़ा महल मध्य प्रदेश के एक शिविर में बुधवार को एक अनुयायी की तरफ से भंडारे का आयोजन किया गया है। वह खुद लोगों को प्रसाद और संतों को दक्षिणा भी दे रहे हैं। निर्मोही अखाड़े में भी इसी तरह का दृश्य है। बड़ा दशरथ महल नियमित भंडारा चला रहा है। अखाड़ों और धार्मिक शिविरों के अलावा कई एनजीओ और सेवा संस्थानों ने भी भूखों को भोजन का प्रबंध किया है। श्रद्धालु कहते हैं कि तीर्थराज में कोई भूखा कैसे रहेगा। यह ईश्वर की महिमा है, जो जितना दान करता है, उसे उससे बहुत ज्यादा वापस मिलता है ,

