रायपुर सेंट्रल जेल में बंद पूर्व सीएम भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल को हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है। बिलासपुर हाईकोर्ट ने चैतन्य बघेल द्वारा ED के खिलाफ लगाई गई याचिका को खारिज कर दिया है। दरअसल, चैतन्य बघेल ने ईडी की ओर से की गई जांच, गिरफ्तारी को नियम विरुद्ध और असंवैधानिक बताते हुए रद्द करने की मांग की थी। इस मामले में जस्टिस अरविंद कुमार वर्मा की सिंगल बेंच ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद 24 सितंबर को फैसला सुरक्षित रखा था, हाईकोर्ट की तरफ से आज फैसला सुनाते हुए चैतन्य बघेल की याचिका को खारिज कर दिया।.कोर्ट ने माना कि ईडी की कार्रवाई कानून के तहत की गई है। इसलिए इसमें न्यायालय को हस्तक्षेप करने की आवश्यकता नहीं है। इस मामले में ईडी की ओर से एडवोकेट सौरभ पांडेय ने पैरवी की।
बता दें कि शराब घोटाला और मनी लॉन्ड्रिंग केस में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने चैतन्य बघेल को भी आरोपी बनाया है। , पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल को प्रवर्तन निदेशालय ने मनी लॉन्ड्रिंग और शराब घोटाला मामले में 18 जुलाई को भिलाई निवास स्थान से गिरफ्तार किया था आरोप है कि शराब घोटाले की रकम से चैतन्य को 16.70 करोड़ रुपए मिले हैं। शराब घोटाले से मिले ब्लैक मनी को रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स में इन्वेस्ट किया गया। साथ ही 1000 करोड़ रुपए की हैंडलिंग (हेराफेरी) की गई है।
ED ने अपनी जांच में पाया कि, चैतन्य बघेल के विट्ठल ग्रीन प्रोजेक्ट (बघेल डेवलपर्स) में घोटाले के पैसे को इन्वेस्ट किया गया है। इस प्रोजेक्ट से जुड़े अकाउंटेंट के ठिकानों पर छापेमारी कर ED ने रिकॉर्ड जब्त किए थे।प्रोजेक्ट के कंसल्टेंट राजेन्द्र जैन ने बताया कि, इस प्रोजेक्ट में वास्तविक खर्च 13-15 करोड़ था। जबकि रिकॉर्ड में 7.14 करोड़ ही दिखाया गया। जब्त डिजिटल डिवाइसेस से पता चला कि, बघेल की कंपनी ने एक ठेकेदार को 4.2 करोड़ कैश पेमेंट किया, जो रिकॉर्ड में नहीं दिखाया गया।
जांच में यह बात भी सामने आई की चैतन्य बघेल ने त्रिलोक सिंह ढिल्लो के साथ मिलकर विट्ठलपुरम नामक परियोजना में फर्जी फ्लैट खरीद की योजना बनाकर 5 करोड़ हासिल करने के आरोप में भी घिरे हैं। इन फ्लैटों को त्रिलोक सिंह ढिल्लो के कर्मचारियों के नाम पर खरीदा गया था, लेकिन असली लाभार्थी चैतन्य ही थे। जांच में यह भी पाया गया कि चैतन्य ने इस घोटाले से जुड़े 1हजार करोड़ से अधिक की अवैध धनराशि को हैंडल किया और इसे अनवर ढेबर और अन्य के माध्यम से छत्तीसगढ़ कांग्रेस के तत्कालीन कोषाध्यक्ष तक पहुंचाया गया। यह राशि बघेल परिवार के करीबी लोगों द्वारा आगे इन्वेस्ट के लिए प्रयोग की गई।
प्रवर्तन निदेशालय (ED) के वकील सौरभ पाण्डेय ने बताया था कि शराब घोटाले का जो इन्वेस्टिगेशन चल रहा था उसमें एविडेंस मिले हैं, जिसमें चैतन्य बघेल ने बहुत सारे पैसे को लेयरिंग की है। 1000 करोड़ का लेनदेन किया है। पप्पू बंसल ने अपने बयान में खुलासा किया है। शराब के घोटालों के पैसों को चैनलाइज्ड करके चैतन्य बघेल तक पहुंचाया जाता था। लिकर स्कैम का पैसा अनवर ढेबर के जरिए दीपेंद्र चावड़ा फिर वह पैसा केके श्रीवास्तव और कांग्रेस के कोषाध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल औ उसके बाद चैतन्य बघेल के पास यह पैसा पहुंचता था

