तिल्दा नेवरा-स्वर्गीय सोनी चंद वर्मा स्मृति फाउंडेशन के द्वरा आयोजित हाई स्कूल मैदान पर चल रही सात दिवसीय राम कथा का शनिवार को पूर्णाहुति के साथ समापन हुआ। श्रद्धालुओं की भीड़ कथा शुरू होने के1 घंटे पहले सुबह 11बजे से ही जुटनी शुरू हो गई और 12 बजे जब सुश्री चंद्रकला ने आसन ग्रहण किया तब तक राम भक्तों का समुद्र बन चुका था।भक्ति और आस्था की लहरें हिलोरे लेने लगी थी। सुश्री चंद्रकला ने प्रभु के प्रति इतने प्रेम के लिए धन्यवाद दिया । कथा में जब प्रभु श्री राम के राज्याभिषेक का प्रसंग आया तो श्रद्धालुओं ने जय श्री राम का उद्घोष करते हुए जमकर पुष्प बरसाए और भजन पर नाचते हुए मंच के सामने आ गए।
रामकथा के अंतिम दिन कथा वाचक मानस मर्मज्ञ सुश्री देवी चंद्रकला ने लंका दहन का प्रसंग सुनाया उन्होंने कहा हनुमान माता सीता की खोज में लंका की ओर गए वहां उन्होंने अशोक वाटिका में मां सीता की देखा लेकिन सीता जी को उन पर विश्वास नहीं हुआ। तब उन्होंने श्री राम की मुद्रिका दिखाकर उन्हें विश्वास दिलाया । अशोक वाटिका में हनुमान जी ने बहुत उत्पाद मचाया जिसे देखकर मेघनाथ ने उन्हें रावण के समक्ष प्रस्तुत किया।मेघनाथ ने रावण ने हनुमान जी को मृत्युदंड देने की मांग की जिसका विभीषण ने विरोध किया ।इस पर रावण ने हनुमान जी की पूछ में आग लगाने का आदेश दिए। उसके बाद हनुमान जी ने अपनी पूंछ में लगी आग से पूरी लंका में आग लगा दी जिससे वहां पर त्राहिमाम मच गया ।

दीदी चन्द्रकला ने राज्याभिषेक और श्रीराम के राजतिलक प्रसंग को विस्तार से समझाया। उन्होंने रामायण से मिलने वाली मर्यादा, सेवा भाव, बलिदान और त्याग की शिक्षाओं पर प्रकाश डाला। कथा व्यास ने बताया कि चौदह वर्ष के वनवास में भगवान श्रीराम ने दीन-दुखियों और वनवासियों के कष्ट दूर किए,साथ ही उन्होंने श्रोताओं को पुनीत कार्यों में सहयोग का संदेश दिया।कथा के समापन पर राम राज्याभिषेक उत्सव धूमधाम से मनाया गया। उन्होंने कहा कि रामराज्य रामराज्य केवल सत्ता का प्रतीक नहीं, बल्कि ऐसा समाज है जहां भाई नहीं, भेद नहीं और अन्याय नहीं, जहां प्रेम करुणा और न्याय का शासन होता है,उसे राज्याभिषेक कहा जाता है।इस अवसर पर श्रोता भजनों की धुनों पर झूम उठे। कथावाचक ने कहा कि प्रेम, प्रार्थना और प्रभु भक्ति से ही प्रभु प्रकट होते हैं। श्रीराम कथा के समापन पर आयोजन कमेटी की ओर से पुष्प राज वर्मा ने क्षेत्रवासियों को कार्यक्रम में सहयोग करने के लिए आभार जताया ।कथा समापन के दौरान पूर्णाहुति में मंत्री टंकराम सपत्निक शामिल होलर आहुति दी और आरती में शामिल हुए ।


