तिल्दा शहर को जाम से कब मिलेगी मुक्ति? , एक किलोमीटर दूरी तय करने में छूट रहे पसीने,
छत्तीसगढ़ के तेजी से बढ़ते शहरों में से एक राजधानी रायपुर लिले का तिल्दा नेवरा शामिल है .चावल नगरी के नाम से विख्यात तिल्दा इलाका अब औद्योग कारोबार का हब बन चूका है. शहर व आसपास की आबादी भी तेजी के साथ बढ़ी है. बीते 4 से 5 दशकों में जिस हिसाब से शहरीकरण बढ़ा है. यहां रोजाना लगने वाले जाम से लोग परेशान हैं. आवासीय और व्यावसायिक संस्थानें खुली हैं उस अनुपात में न तो सड़कों का जाल बिछा है. न ही बाइपास और फ्लाई ओवरों का निर्माण हो सका है. पार्किंग की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने के साथ-साथ सड़कों पर अतिक्रमण, बिजली के खंभों का व्यवस्थित नहीं होने के कारण शहर जाम से कराह रहा है. शहर से एक किलोमीटर दूर तक पहुंचने के लिए कभी-कभी आधा घंटा लग जाता है, जबकि इतने समय में लोग 20 से 25 किलोमीटर का सफर कर लेते हैं. जाम का असर शहर के आम लोगों, कारोबार के साथ बीमारी और मानसिक स्वास्थ्य पर भी पड़ रहा है.
तिल्दा शहर राष्ट्रीय राजमार्ग रायपुर-बिलासपुर से जुड़ा है. ऐसे तो शहर में जाम की स्थिति हर इलाके में है लेकिन स्टशन चौक ,दीनदयाल चौक ,खूबचंद बघेल चौक,साईं मंदिर रोड चौक,से लेकर तुलसी चौक के पास जाम की स्थिति रूटीन बन चुका है. मेन रोड के आलावा दीनदयाल चौक से विजय लाज होते कैंप के सिंधी पंचायत भवन के बीच दुकानों के सामने खड़े वाहन और दुकानों का सामान सडको पर कब्जा कर बाहर रखने,के कारण लोगो को भारी मुसीबतों का सामना करना पड़ता है,इतना नही ज्यदातर दुकानदार हेवी लोड वाहनों को दुकान के सामने घंटो खड़ा कर सामान खाली कराते है, और वाहनों में सामान लोड भी करते है.नियमा अनुसार बड़े वाहनों का प्रवेश शहर के अंदर होना ही नही चाहिए. ,
nमरीजों को अस्पताल पहुंचने में होती है परेशानीः कैम्प और नेवरा से खरोरा रायपुर,सिमगा बिलासपुर जाने के लिए दीनदयाल चौक आना पड़ता है जहा हमेशा भीड़-भाड़ रहती है.साथ ही भारी लोड के साथ वाहनों की लंबी कतार लगे रहने के कारण यातायात व्यवस्था बाधित रहती है. कई बार मरीजों को अस्पताल पहुंचने में काफी परेशानी होती है.पीक समय में खासकर सुबह-शाम जाम की स्थिति रहती है.
क्या बोलते हैं स्थानीय लोगः
जाम मुक्ति के लिए लंबी अवधि की योजना जरूरीः स्थानीय निवासी भाजपा नेता दीपक शर्मा कहते हैं कि “तिल्दा नेवरा शहर में रोजाना जाम की स्थिति बनी रहती है. जाम से निपटने के लिए जिला प्रशासन, पुलिस पदाधिकारी, नगर पालिका सहित अन्य एजेंसियों को संयुक्त पहल करना होगा. जाम से निपटने के लिए तात्कालिक और लंबी अवधि की योजना जरूरी है.”जाम से भ्चने का एक हि विकल्प है बायपास सड़क का होना ,यह मांग दो दशको से लम्बित है ,[फोटो]
भीड़भाड़ वाले इलाके में पार्किंग बनेः …..कहते हैं कि “जाम से निपटने के लिए सबसे पहली जरूरत पार्किंग व्यवस्था को चाक-चौबंद किया जाए. आवश्यकता के अनुसार पार्किंग,की व्यवस्था होनी चाहिए मार्केटिंग कॉम्पलेक्स व भीड़-भाड़ वाले भवनों में पार्किंग की अनिवार्य करना होगा. गलत पार्किंग करने वालों को फाइन भी लगे.”[फोटो]
हैवी ट्रैफिक से निपटने के लिए बायपास रोड जरूरीः …..का कहना कि “शहर में भीड़-भाड़ से निजात दिलाने के लिए रिंग रोड, एलिवेटेड रोड, अंडरपास आदि का निर्माण करना होगा. उन्होंने कहा खूबचंद बघेल चौक पर हमेहाजाम की स्थिति बनी रहती है बावजूद वहा रलवे ओवर ब्रिज बनया जाना प्रस्तावित है ,यदि ओवर ब्रिज बनेगी तो लोगो का रस्ते निकलना दुर्लभ हो जाएगा [फोटो]
जाम से विकास होता है प्रभावितः दुर्गेश न्शिने ने कहा “स्मूथ ट्रैफिक सबों की जरूरत है. चाहे कोई शहर का आम नागरिक हो या कोई नौकरी करने बाहर से आया हो. यही नहीं पर्यटन और उद्योग जगत के लिए जाम मुक्त सड़कें जरूरी है. जाम के कारण व्यापार में लागत बढ़ता है और सप्लाई चेन प्रभावित होता है.”
ट्रैफिक नियंत्रण के लिए पुलिस बलों की दो-दो शिफ्ट में ड्यूटीः ने कहा कि “शहर के बड़े चौक पर ज्यादा होमगार्ड और पुलिस बलों की तैनाती रहती है. शहर के कम भीड़ वाले चौक पर पुलिस होम गार्ड के जवान तैनात रहते हैं. ट्रैफिक व्यवस्था में लगे पुलिसकर्मियों की दो-दो शिफ्ट में ड्यूटी लगाई गई है. शहर में भीड़-भाड़ वाले स्थान तलाकी गेट पर पांच-पांच जवानों की तैनाती रहती है. शहर के अन्य चौक पर दो-दो जवान ड्यूटी पर रहते हैं. हर चौक चौहारों पर पुलिस कर्मचारियों की दो शिफ्ट में ड्यूटी रहती है.”
नियमित तौर पर चलता है अतिक्रमण के खिलाफ अभियानः नगर पालिका CMO ने बताया कि ” हाल में सडको से अतिक्रमण हटाया गया है. इसके बाद टीम ने सिरसा चुंगी, लोकल बस स्टैण्ड और तलाकी गेट, ऋषि नगर रोड से अतिक्रमण हटाने की चेतावनी दी गई है,उसके बाद मार्केट में कुछ दुकानदारों के द्वारा सड़को पर रखे में सामान सामान जब्त किए जाने की कार्रवाई की जाएगी “

