Wednesday, February 25, 2026
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जयघोष हो, 22 जनवरी का दिन इतिहास बन गया, इतिहास में ‘भी’ खास बन गया

राम के सेवक जवाहर नागदेव की राम… राम…

हे प्रभु इन्हें माफ मत करना। इन्हें इनके किये की सजा देना ताकि और लोग चेतें और किसी अन्य के साथ ऐसी नाइंसाफी न करें।

कल का दिन इतिहास में खास बन गया। दीवली में रौनक होती है मन प्रसन्न रहता है बाजा-गाजा रहता है। इस बार दीवाली से दस गुना ज्यादा रौनक थी, दस गुना अधिक प्रसन्नता थी। दस गुना अधिक बाजा-गाजा, भजन, स्वर लहरियां थीं।
दिन भर शहर का कोना-कोना, प्रदेश का कोना-कोना, देश का कोना-कोना प्रज्वलित दिखा। नवरात्रि में चहुंओर माता के मंदिर में धूम दिखती है।
कल यानि 22 जनवरी 2024 सोमवार को अयोध्या में भगवान राम की पुनस्र्थापना के दिन देश के हर मंदिर में, माता के मंदिर में, हनुमान मंदिर में, शनि मंदिर में यानि हर मंदिर में धूम थी।
हर मंदिर में भण्डारा था, पूजा-अर्चना थी। हर मंदिर में। वो भी कुछ समय के लिये नहीं, सारा दिन। सुबह से लेकर रात तक।
इस दिन को ‘ऐसा’ बनाने के लिये पूरा श्रेय देश के प्रधान नरेन्द्र मोदी को जाता है और ‘ऐसा’ न हो पाए इसका पूरा प्रयास करने का श्रेय मोदी विरोधियों को, देश विरोधियों को, हिंदु विरोधियों को जाता है। साफ कहें तो भाजपा और उसकी सहयोगी पार्टियो को छोड़कर अन्य सभी पार्टियों को जाता है। राजनीति के लिये, सत्ता के लिये भगवान से द्रोह कर बैठे। निम्नस्तरीय द्रोह।
भगवान इन लोगों को कभी माफ मत करना। बहुत कष्ट दिया इन्होंने आपके बच्चों को। बहुत दिल दुखाया।

कर्मों का फल विधि का विधान

कर्मों का फल विधि का विधान है। किसी भी काम का फल अवश्य मिलता है। किसी पाप की सजा अवश्य मिलती है। कोई पाप चाहे जानबूझकर किया जाए या अनजाने में उसका फल तो मिलेगा ही। इसका कोई अपवाद नहीं है।

भगवान राम के पिता महाराजा दशरथ ने भूलवश श्रवण कुमार को तीर मार दिया था। तब श्रवण कुमार के दृष्टिीहीन माता-पिता ने उन्हें ‘पुत्र वियोग से मृत्यु’ हा श्राप दे दिया था। और सब जानते हैं कि भगवान के पिता ने अपने अनजाने, अनचाहे, भूलवश किये गये अपराध का फल भोगा। पुत्र राम के वियोग में तड़प-तड़प कर प्राण त्यागे।

जैसे कोई इंसान गलती से जहर खा ले और फिर ये कहे कि भूल से खा लिया। उसकी उद्देश्य ज़हर खाने का नहीं था, ज़हर जान कर नहीं खाया था तो क्या वो ज़हर के दुष्प्रभाव से बच जाएगा ? कतई नहीं। ज़हर तो अपना काम करेगा ही। ज़हर को जो नुकसान करना है वो होगा ही।

राममंदिर के विरोधियों ने
बहुत वेदना दी रामभक्तों को

जो कोफ्त, जो अपमान हिंदुओं ने हिंदुस्तान मे सहा है, वो अपने आप में एक मिसाल है। बरसों से देख रहे हैं। जब हम बच्चे थे तब से देख रहे हैं और आज वो हक प्राप्त हुआ है जब हमारे बच्चों के बच्चे बड़े हो रहे हैं। और हम ही नहीं हमसे पहले की पीढ़ियों ने इस नाहक दुराचरण को भोगा, बेहिसाब पीड़ा सही।

जरा उनकी स्थिति का अहसास कीजिये जिन्होंने सैकड़ों साल इस पीड़ा को भोगा।

कौन हैं वे रामद्रोही, हिंदुविरोधी, हिंदुत्वविरोधी, हिंदुत्व को नष्ट करने का मंसूबा पाले हुए। रे नासमझ, हिंदुत्व है तो तुम हो। क्योंकि हिंदुत्व नृशंसता में विश्वास नहीं करता। हिंदुत्व सहअस्तित्व में विश्वास रखता है। कोई कांग्रेसी, कोई कम्युनिस्ट, कोई सपाई, कोई अन्य भाजपा विरोधी दल केवल और केवल इसलिये राम का विरोध करता रहा कि गैर हिंदु वोट छिटक न जाएं। 

ये लोग हिंदुओं की भावनाओं को रौंदते रहे, खिलवाड़ करते रहे। लेकिन हुआ क्या ? आज मुंह की खानी पड़ी।
इन हिंदु विरोधी दलों के अपने ही हिंदु आज उनसे नाखुश हैं। इन्हीं दलों के अपने हिंदु रामद्रोहियों से नाखुश हैं।
आम हिंदु नाराज है, आम जनता नाराज है। जाहिर है कि ये असंतोष ये नाखुशी दिखेगी चार महीने बाद लोकसभा चुनावों में। जब राम के भक्तों को, राम के बच्चों को दुखी करने वाले चुनाव में फजीहत करवाएंगे अपनी। तब ये पछताएंगे, राएंगे…. । जानबूझकर किये पाप की सजा इन्हें अवश्य देना भगवान….
जयश्रीराम…  
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