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छत्तीसगढ़ से उज्बेकिस्तान लौटेंगी होटल से पकड़ाई 2 महिलाएं:हाईकोर्ट बोला- राज्य-केंद्र सरकार और दूतावास भी सहमत

रायपुर-छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर सुनवाई करते हुए 2 उज्बेकिस्तान की महिलाओं को उनके देश वापस भेजने का रास्ता साफ कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि राज्य सरकार, केंद्र सरकार और उज्बेकिस्तान दूतावास समेत सभी पक्ष डिपोर्टेशन (प्रत्यावर्तन) के पक्ष में हैं, इसलिए याचिका में अब विचारणीय कुछ बाकी नहीं रह गया है।

हाईकोर्ट के आदेश के बाद दोनों महिलाओं को उज्बेकिस्तान भेजने की प्रक्रिया जल्द शुरू की जाएगी। इस मामले में उज्बेकिस्तान दूतावास ने भी अदालत से जल्द डिपोर्टेशन के लिए जरूरी आदेश जारी करने का अनुरोध किया था।

बता दें कि 5 महीने पहले रायपुर के ‘होटल एरिना बुटिक’ से इन महिलाओं को हिरासत में लिया था। इन पर संदिग्ध गतिविधयों में शामिल होने का आरोप लगा था। पुलिस की जांच के दौरान महिलाएं पासपोर्ट, वीजा संबंधित दस्तावेज नहीं दे पाई।

दोनों को रायपुर सेंट्रल जेल परिसर में बने डिटेंशन सेंटर में रखा गया। पुलिस की पूछताछ में महिलाएं 3 महीने तक अपने से संबंधित किसी भी तरह की जानकारी नहीं दी, इसलिए 13 मार्च को पुलिस ने FIR दर्ज कर आगे की कार्रवाई शुरू की थी।

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार, केंद्र सरकार और उज्बेकिस्तान दूतावास की ओर से कोर्ट को बताया गया कि, दोनों विदेशी महिलाओं को उनके देश वापस भेजने की कार्रवाई की जा सकती है। इस पर हाईकोर्ट ने कहा कि, जब सभी संबंधित पक्ष डिपोर्टेशन के पक्ष में हैं, तब याचिका लंबित रखने का कोई औचित्य नहीं है।

अब जानिए क्या है पूरा मामला

9 जनवरी 2026 को पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली थी कि ‘होटल एरिना बुटिक’ में 2 विदेशी युवतियां ठहरी हुई हैं, जिनकी गतिविधियां संदिग्ध हैं। सूचना पर तेलीबांधा पुलिस की टीम ने दबिश दी और दोनों को हिरासत में लिया था।

10 मार्च 2026 तक बार-बार मौका देने के बावजूद दोनों महिलाएं भारत में रहने या यात्रा करने का कोई भी वैध प्रमाण पेश नहीं कर पाईं। इसके बाद पुलिस ने उनके खिलाफ आव्रजन और विदेशी विषयक अधिनियम 2025 की धारा 3, 21 और 23 के तहत अपराध दर्ज किया था।

जानकारी के मुताबिक, वर्तमान में रायपुर जेल में 2 उज्बेकिस्तान की महिलाओं समेत कुल 10 विदेशी नागरिक बंद हैं। इनमें कई देशों के नागरिक शामिल हैं, जिनके खिलाफ वीजा नियमों और विदेशी नागरिक अधिनियम से जुड़े मामलों में कार्रवाई की गई है।

हाईकोर्ट के आदेश के बाद संबंधित एजेंसियां अब यात्रा दस्तावेज, पहचान सत्यापन और दूतावास से समन्वय जैसी औपचारिकताएं पूरी करेंगी। प्रक्रिया पूरी होने के बाद दोनों महिलाओं को उनके देश उज्बेकिस्तान भेजा जाएगा।माना जा रहा है कि अदालत के इस आदेश के बाद अन्य विदेशी नागरिकों के मामलों में भी डिपोर्टेशन प्रक्रिया को लेकर प्रशासनिक स्तर पर तेजी आ सकती है।

 

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