मकर संक्रांति खुशियों और पतंगो का त्यौहार है। इस त्यौहार के लिए लोगों को बेसब्री से इंतजार होता है .पतंगबाजी से आसमान रंगीन तो होता है लेकिन इस रंगीन खुशी के बीच यह त्यौहार लोगों के लिए जानलेवा साबित हो रहा है। प्रतिबंध के बावजूद चाइनीस मांझा खुलेआम बिकने के कारण शहर से लेकर गाव में आसानी से मिल जाता है .और अब ये मंझा सिर्फ इंसानों के लिए ही नहीं बेजुबा पक्षियों के लिए भी जानलेवा हथियार बन चुका है. जानलेवा मंझे से हर साल गले कटते हैं हाथ पैर जख्मी होते हैं और कई बार मांझे की चपेट में आने जान तक चली जाती है यह मांझा सिर्फ गैर कानूनी नहीं बल्कि खामोश कातिल भी बन चुका है..
रायपुर- मकर संक्रांति पर पतंग उड़ाने की परंपरा एक बार फिर चाइनीज मांझे के कारण जानलेवा साबित हुई। रायपुर में एक छात्र के गाल कट गए। वहीं भिलाई में एक ठेका मजदूर घायल हो गया। पहली घटना रायपुर के पंडरी एक्सप्रेस-वे पर हुई। इस हादसे में छात्र संकल्प द्विवेदी गंभीर रूप से घायल हो गया। वह अपनी बड़ी बहन को स्कूल छोड़ने जा रहा था, तभी चलती गाड़ी में चाइनीज मांझा उसके चेहरे में फंस गया। इससे छात्र के गाल कट गए। वह लहूलुहान हो गया। छात्र को 34 टांके लगाने पड़े। हादसे में छात्र की बहन के हाथ भी मांझे से कट गए।
डॉक्टरों ने बताया कि चाइनीज मांझे से लगे घाव के निशान स्थायी रह सकते हैं, इसलिए प्लास्टिक सर्जरी की सलाह दी गई है। इस पहले रविवार शाम करीब 5 बजे पतंग के चाइनीज मांझे से कटने से एक महिला गंभीर रूप से घायल हो गई थी। महिला शाम को पैदल मंदिर जा रही थी, तभी मांझा उनके चेहरे में फंस गया। महिला ने मांझा हटाने की कोशिश की, जिससे उनके होंठ और अंगूठे में गहरा कट लग गया। इन हादसों ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि प्रतिबंध के बावजूद चाइनीज मांझा कैसे बिक रहा है?
भिलाई में मकर संक्रांति के दिन कुछ युवक चाइनीज मांझे से पतंग उड़ा रहे थे। साइकिल से घर लौटते समय पतंग का चाइनीज मांझा सीधे श्रमिक के गले में उलझ गया, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया। घायल की पहचान असलम (42 वर्ष निवासी चांदनी चौक, कोहका के रूप में हुई है। बताया जा रहा है कि असलम भिलाई इस्पात संयंत्र में ठेका श्रमिक है। घटना के बाद उसे तत्काल इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया।
रायपुर के ब्राह्मणपारा निवासी नेहा यादव ने बताया कि वह रविवार शाम घर से पैदल मंदिर जाने निकली थी। मंदिर के पास पहुंचते ही अचानक कुछ उनके चेहरे से टकराया। जब उन्होंने उसे हटाने की कोशिश की तो पहले होंठ कट गया, फिर अंगूठा कट गया। उस समय कुछ समझ नहीं आया। अचानक खून बहने लगा। तब देखा कि चेहरे में फंसा हुआ मांझा था। होंठ दबाकर खून रोका गया, तब तक कपड़े लहूलुहान हो चुके थे। इसके बाद वह नजदीकी डॉक्टर के पास गई, जहां डॉक्टर ने 10 टांके लगाए और आराम करने की सलाह दी। मांझा कहां से उड़कर आया, यह उन्हें समझ ही नहीं आया।
मकर संक्रांति के पहले रायपुर नगर निगम की टीम ने 27 दिसंबर को शहर की अलग-अलग दुकानों में छापेमारी की थी। दुकानों की तलाशी के दौरान बूढ़ातालाब स्थित सिटी पतंग भंडार से 2 किलो, मोती पतंग भंडार से 1 किलो और सदर बाजार के संजय पतंग भंडार से डेढ़ किलो प्रतिबंधित चाइनीज मांझा जब्त किया था । इसके आलावा गोलबाजार में भी दुकानों का औचक निरीक्षण किया गया था। पिछले साल छत्तीसगढ़ के रायपुर में पतंग के मांझे से 7 साल के मासूम की गर्दन कट गई, जिससे बच्चे की मौत हो गई थी । इस साल भी मकर संक्रांति खुशियों के बीच मांझे कई घाव और गम दिए है ,,आखिर ये खामोश कातिल मांझा प्रतिबंध के बाद भी कैसे खुलेआम बाजार में बिक रहा है ,,जब तक इस पर पूरी तरह से कड़ाई से बेन नही लगेगी मंझे की पतली सी डोर इंसानों के गले काटती रहेगी …

