तिल्दा नेवरा -गणेश उत्सव में 10 दिन तक भक्तों की सेवा और पूजा अर्चना लेने के बाद गणपति बप्पा की गुरुवार से विदाई शुरू हो गई, भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को प्रथम पूज्य बप्पा का घरों से लेकर पंडाल तक आगमन होता है और 10 दिन की मेहमानी के बाद अनंत चतुर्दशी को विदा होते हैं.. गुरुवार को घरों में बिठाई गई मूर्तियों के साथ छोटे पंडालो में विराजित प्रतिमाओ का शहर के अलग-अलग तालाबों और घरों में बनाए गए कृत्रिम तालाब मैं विसर्जित किया गया।

तिल्दा शहर में इस बार दो दर्जन से भी अधिक बड़े पंडाल बनाए गए थे,जिसमें बड़ी प्रतिमाएं स्थापित की गई थी.. स्टेशन चौक राधा कृष्ण मंदिर के सामने.विशाल आकर्षक मूर्ति की स्थापना की गई थी, इसी तरह पूर्व साहू लकड़ी टाल के पास भी केशरवानी समाज के द्वारा बड़ी मूर्ति स्थापित की गई थी.. हेमू कालानी चौक के बाद कपड़ा मार्केट में,राइजिंग सन समिति के प्रमुख आयुष कोटवानी.विकास कृपलानी.के नेतृत्व में विघ्नहर्ता प्रथम पूज्य गणपति बप्पा की प्रतिमा की स्थापना की गई थी. इसी तरह सिंधी कैंप में गुरु नानक चौक के पास संतकंवर राम चौक. कृषि उपज मंडी गांधी चौक के साथ परशुराम चौक के पास केदार शर्मा के द्वारा भगवान गणेश की मूर्ति स्थापित की गई थी..l इसके अलावा भी कई जगहों पर गणपति बप्पा विराजित हुए थे।10 दिनों तक चले गणेश उत्सव के पहले 5 दिन जमकर हुई बारिश के चलते माहौल काफी फीका रहा ,लेकिन बारिश के थमते ही श्रद्धालु बप्पा का दर्शन करने बड़ी संख्या में घरों से निकले.

इस बार समितियां के द्वारा पंडाल में सजावट से अधिक प्रसाद पर फोकस किया,सिंधी कैंप में राइजिंग सन गणेश उत्सव समिति के आयुष कोटवानी.साहिल डोडवानी सक्षम पंजवानी,जीतू कृपलानी लक्की,वाधवा.द्वारा 6 दिनों तक पूरी,पुलाव,ब्रेड पकोड़ा, पोहा, इटली, लड्डू,का भोग लगाकर प्रसाद वितरण किया गया.. इसी तरह केसरवानी मोहल्ले मे राधा कृष्ण मंदिर के सामने गणेश समिति के द्वारा ब्रेड शोले, पोहा आदि का प्रसाद वितरण किया गया.. गुरु नानक चौक के पास एकदंत गणेश उत्सव समिति के विजय चंदवानी एवं सोनू हिंदूजा के नेतृत्व में पुरी, इटली, चाप, बूंदी आदि का प्रसाद के रूप में वितरण किया गया, शाम होते ही भगवान के दर्शन और प्रसाद ग्रहण करने श्रद्धालु परिवार के साथ बप्पा कि दरबार में पहुच रहर थे..गुरुवार को पंडाल में हवन पूजन हुए और शाम होते ही 10 दिनों तक घरों और छोटे बड़े पंडालो में विराजित प्रथम आराध्य देवता भगवान श्री गणेश जी का मेहमानी के बाद गुरुवार को अनंत चतुर्दशी के मौके पर नाम आंखों के साथ विदाई दी गई ,शाम को कई बड़ी प्रतिमाओं का भी विसर्जन किया गया. विसर्जन करने का सिलसिला देर रात तक चलता रहा..
पंडित संतोष शर्मा के मुताबिक भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी अनंत चतुर्दशी के रूप में मनाई जाती है इस दिन भगवान अनंत की पूजा की जाती है महिलाएं सौभाग्य की रक्षा सुख और ऐश्वर्या की प्राप्ति के लिए व्रत रखती है ।

