छत्तीसगढ़

अब देश के 11 जिलों में ही नक्सलियों का ‘लाल आतंक’ बाकी,

नई दिल्ली: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने देश भर में नक्सल और माओवादी नेताओं द्वारा किए गए सरेंडर की तारीफ की है , उन्होंने इसे नक्सलवाद को पूरी तरह से खत्म करने के सरकार के चल रहे कोशिशों में एक “ऐतिहासिक मील का पत्थर” बताया। नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में लगातार गिरावट पर प्रकाश डालते हुए शाह ने कहा कि सबसे अधिक प्रभावित जिलों की संख्या छह से घटकर तीन हो गई है, जबकि कुल प्रभावित जिलों की संख्या 18 से घटकर 11 हो गई है।

अमित शाह ने ‘X’ पर लिखा, “नक्सलवाद के खात्मे में ऐतिहासिक उपलब्धि। आज सबसे अधिक प्रभावित जिलों की संख्या 6 से घटकर मात्र 3 रह गई है और प्रभावित जिलों की संख्या 18 से बढ़कर 11 हो गई है।”

उन्होंने कहा, “आतंकवाद मुक्त भारत के लिए मोदी जी के दृष्टिकोण के तहत, अथक आतंकवाद विरोधी अभियान और जन-केंद्रित विकास वामपंथी उग्रवादियों के लिए जगह कम कर रहे हैं, जिससे उनके छिपने की कोई जगह नहीं बची है। 31 मार्च, 2026 तक भारत नक्सलवाद के खतरे से मुक्त हो जाएगा।”

बता दें कि, छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले के कोयलीबेड़ा में सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) की 40वीं बटालियन के कामटेरा शिविर में 39 महिलाओं सहित भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के 50 कार्यकर्ताओं ने सुरक्षा बलों के समक्ष आत्मसमर्पण किया है।

यह सरेंडर सीनियर माओवादी नेता राजमन मंडावी और राजू सलाम की अगुवाई में हुआ। दोनों माओवादी दक्षिण क्षेत्रीय समिति (एसजेडसीएम) के सदस्य थे। आत्मसमर्पण करने वाले कैडरों ने 39 हथियार सौंपे। इनमें 7 एके-47 राइफलें, 2 एसएलआर, 4 इंसास राइफलें, 1 इंसास एलएमजी और 1 स्टेन गन शामिल हैं। वही कल किये गए सरेंडर से अलग आज भी माड़ के दक्षिण में बीजापुर जिले के भैरमगढ़ क्षेत्र में पहुंचने की उम्मीद है।

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