तिल्दा नेवरा -स्थानीय मुस्लिम समाज के द्वारा मोहम्मद साहब के जन्मदिवस की याद में आज ईद मिलाद-उन-नबी का पर्व धूमधाम से मनाया गया,इस मौके पर समाज के लोगो ने कुरान का पाठ किया और उनके संदेशों को जीवन में उतारा।मोहम्मद साहब के सम्मान में सांप्रदायिक सौहार्द के साथ जुलूस निकाला गया,जुलूस का कई जगहों पर हिंदू भाइयों के द्वारा स्वागत किया गया।
नेवरा और सासाहोली मुस्लिम जमात के द्वारा अलग-अलग निकाले गए जुलूस का संगम दीनदयाल चौक पर हुआ..यहां से दोनों जुलूस एक साथ होकर आगे बढ़ा. जुलूस मैं दोनों जमात के मुखिया सबसे आगे चल रहे थे, ढोल ढमाकों के साथ डीजे पर नाचते हुए समाज के लोग मोहम्मद साहब की याद में जयकारे लगते चल रहे थे,नेवरा मस्जिद से जुलूस पूरे नगर का गस्त करते हुए ताज नगर से घूमते हुए गुरु घासीदास चौक, दीनदयाल चौक,सिंधी कैंप ,गांधी चौक से होते हुए वापस मस्जिद पहुंचा जहां मस्जिद के इमाम और हाजियों के द्वारा परचम कुशाई कर देश के अमन शांति और भाईचारे की दुआ मांगी।,इस अवसर पर गरीबों व जरूरतमंदों को दान व जकात किया। मिलाद-उन-नबी की रात को अल्लाह की इबादत की जाती है।

रबीउल अव्वल महीने की 12वीं तारीख को मिलादुन्नबी के दिन इस्लाम के संस्थापक पैगंबर मोहम्मद साहब का जन्म हुआ था.उसके बाद से इस्लामिक धर्म के अनुयायियों के के द्वारा पैगंबर मोहम्मद साहब के याद में उनके जन्मदिवस को मनाया जाता है। यह उत्सव मोहम्मद साहब के जीवन और उनकी शिक्षाओं की भी याद दिलाता है। मिलाद-उन-नबी इस्लामी माह के तीसरे महीने रबी-उल-अव्वल के 11वें और 12वें दिन मनाया जाता है। मोहम्मद साहब ने अल्लाह के हुक्म से जिस धर्म को चलाया, उसे इस्लाम कहा जाता है।
अल्लाह ने दिया संदेश
सासाहोली मस्जिद के इमाम यासीन राज साहब ने बताया कि 571ईस्वी में मोहम्मद साहब का जन्म सउदी अरब के मक्का शहर में हुआ था। उनके वालिद साहब (पिता) का नाम अबदुल्ला बिन अब्दुल मुतलिब था और वालेद (माता) का नाम आमेना था। बताया जाता है कि 40 साल की उम्र में अल्लाह ने मोहम्मद साहब की ओर संदेश प्राप्त हुआ और फरमाया कि ये सभी सूर्य, चंद्रमा, तारे मैने दुनिया को दिए हैं, मुझे ही हमेशा याद में रखो। केवल मैं ही हूं और मेरा कोई मानी-सानी नहीं। लोगों को यह समझाओ।
जुलुस में नेवरा मुस्लिम जमात के हाजी नूर अहमद , सदर सैयद अशरफ, रोशन खान, अमजद खान, अफजल खान, रोशन खान, याकूब बेग अख्तर खान,ससाहोली मुस्लिम जमात के डॉ शम्स आलम, मो.नजीर, मस्जिद के इमाम यासीन राज साहब,डॉ जाकिर हुसैन, मो.जुमराती. मो.नदीम.सहित बड़ी संख्या में समाज लोग शामिल थे ,

