प.प्रदीप मिश्रा की इंदर कोटवानी से विशेष चर्चा .
नेवरा में पिछले 7 दिनों से चल रही कावड़ शिव महापुराण की कथा का सोमवार को समापन हो गया.. इस बीच अपना बहुमूल्य समय निकालकर पंडित प्रदीप मिश्रा ने पत्रकार इंदर कोटवानी से बातचीत की..इस दौरान वन,टू वन पूछे गए सवालों का मिस्र जी ने बड़े गंभीरता से जवाब दिए.. पढ़े वीसीएन टाइम्स की एक्सक्लूसिव खबर ”
सबसे पहले उन्होंने वीसीएन के सभी श्रोताओं का हर-हर महादेव कहकर अभिवादन किया, और तिल्दा शहर एवं संपूर्ण क्षेत्रवासियो को धन्यवाद दिया,
धर्म के नाम पर हो रहो राजनीती पर पूछे गाए सवाल का जवाब देते हुए श्री मिश्रा ने कहा कि राज सिंहासन पर स्वयं दशरथ महाराज जी, भगवान श्री रामचंद्र और कृष्ण भगवान भी बैठे थे, यह सभी अपने गुरुओं को लेकर चलते थे.. राजनीति के साथ धर्म रहे मना नहीं, धर्म के साथ राजनीति रहे मना नहीं, पर पूरी राजनीति में धर्म शामिल न हो धर्म के साथ पूरी राजनीति नहीं होनी चाहिए..|
आपने ऐसा क्या जादू कर दिया है कि आपकी युक्ति, एक लोटा जल सारी समस्या का हल जनमानस पर छा गया है,”पंडित मिश्रा ने कहा कि पहले तो मै जादू करता नहीं. न हीं मैं जानता हूं ..हम तो शंकर के भगत हैं भगवान शंकर के उपासक हैं ‘जब शंकर को एक लोटा जल चढ़ाया तो उन्होंने हमारा साथ दिया.. तो विश्वास है कि जनमानस एक लोटा जल चढ़ाएगा तो उनके समस्या का हल जरूर होगा
मिश्रा बोले- कथा में महिलाओं का आना ज्यादा जरूरी.
प्रदीप मिश्रा ने कहा- कथा में महिलाओं का आना ज्यादा जरूरी है। महिलाएं जन्मदात्री हैं। पुरुष आएगा तो खुद को सुधारेगा, या बेटे को सुधारेगा। महिलाएं आएंगी तो पति, बेटी-बेटा, सास, ससुर सबको संस्कारित करेंगी।एक जड़ से पैदा हुआ वृक्ष पत्ती टहनी के रूप में सभी को संस्कारित करता है। इसलिए महिलाओं का कथा में आना अधिक जरूरी है।
शिवजी पर बिल्व पत्र चढ़ाना अंधविश्वास नहीं ?
क्या शिवजी पर बिल्पपत्र चढ़ाना अंधविश्वास है.. ? इस सवाल पर प्रदीप मिश्रा ने कहा- जमीन पर फूंक मारकर कोई भी चीज निकालने की बात कहना अंधविश्वास है। किसी के अमर होने का दावा अंधविश्वास है। वटवृक्ष के नीचे शिव हों तो उन्हें वृटवेश्वर महादेव कहा जाता है, पीपल के नीचे हों तो पीपलेश्वर महादेव कहा जाता है। पीपल के पेड़ के नीचे बैठने से फल प्राप्ति होती है। यह सही है। यह अंधविश्वास नहीं है।

