पेंड्रा-सार्वजनिक स्थलों को स्वच्छ और स्वस्थ रखना हर व्यक्ति का पहला कर्तव्य बनता है.ऐसे कार्यो के लिए गिनती के लोग ही सामने आते है ..
लेकिन आज हम एक सख्श के बारे में बताने जा रहे है… जो इस तरह के कार्यो के लिए.. समय, शक्ति और धन–इन सबके साथ हमेशा तैयार रहता हैं ..छत्तीसगढ़ के पेंड्रा में रहने वाले इस इस युवा सख्श का नाम है हर्ष छाबरिया.. जिसे स्नेहवश लोग हर्रु कहते है,…स्वच्छता वालंटियर्स के रूप में उभरे हर्रु की एक नयी फौज ने एक नयी क्रांति की शुरुआत की है .
ऐसे ज्यादातर कहानियों का अंत बुराई पर अच्छाई की विजय के रूप में होता है, लेकिन उसके बाद क्या होता है, ये कोई नहीं जानता .क्या अच्छाई का प्रभाव बना रहता है ? 40 वर्षीय हर्रु को पता है की जीतने के बाद की लड़ाई कितनी कठिन होती है .और इसीलिए इसने अपनी ही तरह अन्य कुछ युवको के साथ शहर को साफ रखने की जिम्मेदारी निभाने का संकल्प लिया और पिछले 9 साल से शहर,स्कुल, तालाब, को स्वच्छ और स्वस्थ रखने में आत्मनिर्भर होने के संकल्प का कवच धारण कर अपने खून-पसीने की कमाई के पैसे खर्च कर अपने साथियों के साथ बखूबी जिम्मेदारी निभा रहे है.।|
नौ वर्षों में उन्होंने अपनी टीम के साथ शहर के कोने-कोने की सफाई की है।वे इस तरह का अभियान समय-समय पर चलाते रहते हैं,जबकि यह जिम्मेवारी प्रशासन की है। धार्मिक प्रवृत्ति के हनुमानजी के अनन्य भक्त हर्ष प्रकृति प्रेमी भी है। वे पेंड्रा क्षेत्र में परिचय के मोहताज नहीं है। उन्होंने अपने द्वारा चलाए जा रहे अभियान को एक जन-आंदोलन का रूप दिया है… वे कहते है लोगों को न तो स्वयं गंदगी फैलानी चाहिए और न ही किसी और को फैलाने देना चाहिए। उन्होंने “न गंदगी करेंगे,न करने देंगे का मंत्र देते लोगो को इस पहल को सफल बनाने अपनी टीम में शामिल होने के लिए प्रेरित करेते है,

हर्रु अपने काम का दीवाना है .वह अपनी इच्छानुसार काम का चयन करते है..इस सामाजिक कार्यकर्ता के प्रयास से दुर्गा सरोवर तालाब जो एक समय गंदगी और बदबू के नामजाना जाता था. लेकिन अब तालाब की तस्वीर पूरी तरह बदल गयी है.. तालाब के आसपास साफ सफाई और बिजली की व्यवस्था की जा रही है.साथ ही रंग रोगन करके तालाब को खूबसूरत बनाया जा रहा है,..
हर्ष का कहना है की यह शहर साफ सुथरा दिखे और आने वाले लोग इसकी तारीफ़ करे,बस यही उनकी चाहत है ताकि प्रदेश भर में जीपीएम जिले के पेंड्रा को सफाई के नाम से जाने और पहचाने.. उनका कहना है कि“सरकार जो कर सकती है कर रही है,लेकिन अगर हम अपने स्वछता की ज़िम्मेदारी खुद नहीं लेंगे, तो अंत में हमें ही भुगतना पड़ेगा |

स्वच्छता के दीवाने हरु से जब स्वच्छता और पर्यावरण के जज्बे के बारे में पूछा गया तो. उन्होंने बताया कि एक बार दुर्गा विसरण करने तालाब आया था गंदगी देखकर मन में आया कि क्यों nइस तालाब की सफाई कराई जाए उसके बाद से मैंने ठान लिया कि अब शहर के लिए कुछ किया जाए. उनसे जब पूछा गया कि प्रशासन क्यों ध्यान नहीं देता है. उन्होंने कहा कि मैं इसके बारे में कुछ नहीं कहूंगा..उन्होंने कहा कि इस अभियान को चलाते 9 वर्ष हो चुके हैं. हमारा अभियान जारी रहेगा..मैंने जब इस अभियान की शुरुआत की तो अकेला था आज 50 से अधिक लोग इस अभियान को सफल बनाने में लगे हुए…

