रायपुर। कड़ाके की ठंड के बीच छत्तीसगढ़ की विधानसभा गर्म है। विधानसभा के शीत सत्र में सत्ता पक्ष के सदस्य भ भ्रष्टाचार के मामले जोरशोर से उठा रहे हैं और ईडी जांच की मांग कर रहे हैं। वहीं विपक्ष भी सरकार को घेरने की कोशिश में है।
इन दिनों छत्तीसगढ़ विधानसभा का शीत सत्र चल रहा है। 16 दिसंबर से शुरू हुआ यह सत्र 20 दिसंबर तक चलेगा। शीत सत्र में कुल 4 बैठकें होंगी। बुधवार को गुरू घासीदास जयंती के अवसर पर विधानसभा में अवकाश रहेगा। इस सत्र में सरकार अनुपूरक बजट के साथ – साथ आधा दर्जन संशोधन विधेयक पारित करना चाहेगी। मंगलवार को सदन में जल जीवन मिशन और स्मार्ट सिटी में भ्रष्टाचार की गूंज सुनाई दी।
दिलचस्प यह है कि सत्ता पक्ष के विधायकों ने ये मुद्दे उठाए। सत्ता पक्ष के वरिष्ठ विधायक धरमलाल कौशिक ने जल जीवन मिशन के कामों में लापरवाही,लेट – लतीफी और गुणवत्ता को लेकर सवाल दागे। जवाब में उपमुख्यमंत्री व पीएचई मंत्री अरूण साव ने स्वीकार किया कि जल जीवन मिशन के फर्जी तरीके से ठेके लिए जाने की शिकायतें मिली हैं। श्री कौशिक ने मामले की ईडी जांच कराने की मांग रखी। इसी तरह सत्ता पक्ष के ही वरिष्ठ सदस्य अजय चंद्राकर ने राजधानी रायपुर के बूढ़ातालाब के सौंदर्यीकरण का मुद्दा उठाया। बताया गया कि बूढ़ातालाब के सौंदर्यीकरण पर करोड़ों रुपए खर्च किए गए हैं। लगभग 8 करोड़ रुपए का फाउंटेन लगवाया गया,जो कई माह से खराब है। बूढ़ातालाब का सौंदर्यीकरण स्मार्ट सिटी लिमिटेड रायपुर ने करवाया था।
सत्तापक्ष के कुछ सदस्यों को इस काम में भी भ्रष्टाचार होने का संदेह है। जाहिर है कि जल जीवन मिशन के कामों के अधिकांश ठेके पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में ही दिए गए थे। इसी तरह बूढ़ातालाब का सौंदर्यीकरण कार्य भी कांग्रेस के शासनकाल में ही हुआ था। मंगलवार को सदन में अवैध प्लाटिंग और पुल निर्माण के मुद्दे भी उठे,जिस पर विभागीय मंत्री ने कार्यवाही का आश्वासन भी दिया। विपक्ष ने बदहाल कानून व्यवस्था, आपराधिक घटनाओं में वृद्धि, धान खरीदी में अव्यवस्था जैसे मामलों को लेकर सदन में सरकार को घेरने की रणनीति बनाई है। विपक्ष की इस रणनीति से निपटने सत्तापक्ष भी तैयारी से सदन में आया है। माना जा रहा है कि कांग्रेस की भूपेश बघेल सरकार के कार्यकाल के भ्रष्टाचार को उठाना सत्तापक्ष की तैयारी का हिस्सा है।

