छत्तीसगढ़

छत्तीसगढ़ में शराब और डीएमएफ घोटाले पर बड़ी कार्रवाई, छत्तीसगढ़ में 20 ठिकानों पर ACB/EOW की दबिश

रायपुर: छत्तीसगढ़ में आबकारी और DMF घोटाले को लेकर एसीबी और EOW ने बड़ी कार्रवाई शुरू की है। इस रेड में प्रदेश के करीब 20 ठिकानों पर एक साथ दबिश दी जा रही है। एसीबी और EOW की टीमों ने अधिकारियों और कारोबारियों के ठिकानों पर सर्च ऑपरेशन चलाया है।
सूत्रों के अनुसार आज सुबह से रायपुर, जगदलपुर, कोंडागांव, अंबिकापुर और बिलासपुर सहित कई अन्य जिलों में कार्रवाई की जा रही है। रेड में प्रमुख नामों में पूर्व आबकारी अधिकारी निरंजन दास और कारोबारी हरपाल अरोरा शामिल हैं। पूर्व आबकारी अधिकारी निरंजन दास के ठिकानों पर बड़ी छापेमारी की गई है, साथ ही उनके 6 रिश्तेदारों के रायपुर स्थित ठिकानों पर भी दबिश दी गई है। इसी दौरान रायपुर की ही ला विस्टा कॉलोनी में कारोबारी हरपाल अरोरा के घर भी छापा डाला गया। बताया जा रहा है कि अधिकारियों ने यहां भी वित्तीय लेनदेन से जुड़े दस्तावेज, बैंक स्टेटमेंट और संपत्ति कागजातों की जांच की।

सूत्रों का कहना है कि जांच एजेंसियों के पास कुछ नए डिजिटल दस्तावेज और ईमेल ट्रेल हासिल हुए हैं, जिसके बाद यह कार्रवाई तेज हुई है। टीमों के पास संभावित लेनदेन, हवाला कनेक्शन और अवैध आपूर्तिकर्ताओं की भूमिका से जुड़े बैंक रिकॉर्ड भी मौजूद बताए जा रहे हैं।

यह मामला उस कथित शराब घोटाले से जुड़ा है, जो कांग्रेस सरकार के दौरान 2019 से 2023 के बीच लागू शराब नीति के बाद सामने आया था। जांच में यह आरोप लगाए गए कि नीति में बदलाव कर कुछ चुनिंदा सप्लायर कंपनियों को लाभ पहुंचाया गया और इन्हीं कंपनियों के माध्यम से नकली होलोग्राम लगाकर शराब की अवैध बिक्री की गई। नोएडा की एक कंपनी द्वारा नकली सील और स्टिकर बनवाए गए, जिसके बाद कई तरह की प्रीमियम श्रेणी की शराब सरकारी दुकानों के माध्यम से बिना टैक्स के बेची जाती रही। इस वजह से राज्य को लगभग 2165 करोड़ रुपए के राजस्व का नुकसान होने का अनुमान लगाया गया है।

जांच एजेंसियों ने इससे पहले इस घोटाले में कई बड़े राजनीतिक और प्रशासनिक नामों को शामिल करते हुए कार्रवाई की थी। पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल, पूर्व आईएएस अधिकारी अनिल टुटेजा और रायपुर के मेयर एजाज ढेबर के भाई अनवर ढेबर की गिरफ्तारी हो चुकी है। इसके अलावा आबकारी विभाग के 28 अधिकारी भी आरोपी बनाए गए, जिन्हें बाद में सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिल गई थी। आज की कार्रवाई को इस पूरे मामले में एक नए चरण की शुरुआत माना जा रहा है। फिलहाल सभी जगह तलाशी जारी है और अधिकारियों का कहना है कि जब्ती और जांच की आधिकारिक जानकारी दिन के अंत तक सार्वजनिक की जा सकती है।

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