kjhgfdsMost of the faces of five years are certain to be eliminated.

रायपुर। हार के बाद किन नेताओं की दिल्ली में पूछपरख कम हुई है ये राहुल गांधी का पैमाना नहीं वेणुगोपाल तय कर रहे हैं। दिल्ली में यह स्पष्ट रूप से बात पहुंच चुकी है कि कांग्रेस संगठन के प्रभारी,पूर्व मुख्यमंत्री,पूर्व उप मुख्यमंत्री समेत तमाम ओहदेदार नेताओं ने राहुल व प्रियंका को यह बता दिया था कि राजस्थान व एमपी की तो नहीं कहते लेकिन छग में कांग्रेस की सरकार दोबारा बन रही है। फिर भी हार गए। हार के बाद सभी छोटे बड़े नेताओं से वेणुगोपाल ने फीड बैक लिया तो हकीकत सामने आ गई। हालांकि वे इसे सामने नहीं ला रहे हैं इसलिए कि आगे लोकसभा चुनाव है। एक मोहलत के साथ बैज को यथावत रखा गया है जबकि नेता प्रतिपक्ष का जिम्मा महंत को दिया गया है। गहलोत व भूपेश की जुगलबंदी किसी से छिपी नहीं है,इसलिए सचिन पायलट को आलाकमान द्वारा भेजा जाना छग कांग्रेस में नए समीकरण का संकेत है। जिस प्रकार बस्तर व सरगुजा में सफाया व शहरी इलाकों में भाजपा को मिली बड़ी जीत के मायने निकाले जा रहे हैं। ऐसे में तो महंत ही बेहतर रहे जो अपने इलाके में लाज बचा ली. एक और बड़ी बात सामने आ रही है कि सिंगल मेन द्वारा प्रत्याशियों की सूची अंतिम समय में तय की गई थी और यही पार्टी से चूक हो गई।
कांग्रेस यह प्रचारित करते रही कि मोदी का चेहरा लेकर छग में जीतकर बताये और वही हो गया। इसलिए लोकसभा में ज्यादा कुछ कर पायेंगे,दिख नहीं रहा। वैसे भी पिछली बार 9-2 की स्थिति थी। हार के बाद जिस प्रकार आक्रोश पनपा है लोकसभा के लिए प्रत्याशी तय कर पाने में कांग्रेस को पसीना छूट जायेगा और चूंकि सत्ता भाजपा के पास है इसलिए फूल छाप कांगे्रसी भी अपना रंग दिखायेंगे। ऐसे में चार दिन बाद छत्तीसगढ आ रहे नए प्रभारी के पास बड़ी चुुनौती है कि कांग्रेस को कैसे इस झंझावत से बार निकाल पायेंगे। लेकिन इतना तो तय माना जा रहा है कि पांच साल वाले अधिकांश चेहरों का सफाया हो जायेगा।



