Friday, February 13, 2026
Homeछत्तीसगढ़जिस ऑफिस में थे चपरासी, उसी में बन गए अधिकारी, प्यून ने...

जिस ऑफिस में थे चपरासी, उसी में बन गए अधिकारी, प्यून ने क्लियर किया सबसे टफ एग्जाम, लोग ऐसे मारते थे ताने

रायपुर: कहते हैं जहां चाह वहां राह होती है। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में ऐसा ही एक मामला सामने आया है। छत्तीसगढ़ लोकसेवा आयोग के कार्यालय में चपरासी के पद पर काम करने वाले शैलेंद्र कुमार बांधे ने कड़ी मेहनत से राज्य के सबसे कठिन एग्जाम को पास किया है। बांधे राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) में बीटेक करने के बाद राज्य लोक सेवा आयोग (सीजीपीएससी) कार्यालय में चपरासी के पद पर काम कर रहे थे।

बांधे ने अपने पांचवें प्रयास में सीजीपीएससी-2023 परीक्षा पास की है। परीक्षा के रिजल्ट पिछले सप्ताह घोषित किए गए थे। उन्हें सामान्य श्रेणी में 73वीं रैंक और आरक्षित श्रेणी में दूसरी रैंक मिली है। बांधे ने कहा कि वह अपने माता-पिता की मदद के बिना ऐसा नहीं कर पाते, जिन्होंने हर फैसले में उनका साथ दिया। बांधे ने बताया कि इसी साल मई में उन्होंने सीजीपीएससी कार्यालय में चपरासी के पद पर नियुक्ति मिली थी। अनुसूचित जाति समुदाय से ताल्लुक रखने वाले बांधे बिलासपुर जिले के बिटकुली गांव के रहने वाले हैं। उनके पिता किसान हैं। फिलहाल पूरा परिवार रायपुर में रहता है।

बांधे ने बताया कि उन्होंने रायपुर में अपनी स्कूली शिक्षा पूरी की और फिर राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) रायपुर में मैकेनिकल इंजीनियरिंग में बीटेक की पढ़ाई की। इंजीनियरिंग पूरी करने के बाद, उन्हें प्रमुख निजी फर्मों में नौकरी मिल सकती थी लेकिन उन्होंने ‘प्लेसमेंट इंटरव्यू’ में शामिल नहीं होने का फैसला किया क्योंकि वह सरकारी नौकरी करना चाहते थे। बांधे ने कहा कि उन्हें एनआईटी रायपुर में अपने एक सुपर सीनियर हिमाचल साहू से प्रेरणा मिली, जिन्होंने सीजीपीएससी-2015 परीक्षा में प्रथम रैंक हासिल की थी।

उन्होंने कहा, ‘‘मैं पहले प्रयास में प्रारंभिक परीक्षा पास नहीं कर पाया। अगले साल मेन परीक्षा पास नहीं कर सका। तीसरे और चौथे प्रयास में मैं इंटरव्यू नहीं निकाल पाया। लेकिन मैंने हार नहीं मानी पांचवें प्रयास में मुझे सफलता मिली।’’

उन्होंने कहा कि सीजीपीएससी की परीक्षा की तैयारी के कारण मैं दूसरे काम नहीं कर पाता था। परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी। ऐसे में मुझे चपरासी की नौकरी करनी पड़ी। लेकिन इसके साथ ही मैंने राज्य सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी भी जारी रखी।” उन्होंने कहा कि कोई भी नौकरी बड़ी या छोटी नहीं होती, क्योंकि हर पद की अपनी गरिमा होती है। चाहे वह चपरासी हो या डिप्टी कलेक्टर, हर नौकरी में ईमानदारी और पूरी जिम्मेदारी के साथ काम करना होता है।

कह- लोग मारते थे ताना

बांधे ने कहा, ”कुछ लोग मुझे ताना मारते थे और चपरासी के तौर पर काम करने के लिए मेरा मजाक उड़ाते थे लेकिन मैंने उनकी बातों पर ध्यान नहीं दिया। मेरे माता-पिता, परिवार और कार्यालय ने हमेशा मेरा साथ दिया और मुझे प्रोत्साहित किया।” बेटे की सफलता पर पिता ने कहा- मुझे उम्मीद है कि मेरा बेटा उन सभी लोगों के लिए प्रेरणा बनेगा, जो सरकारी नौकरी पाने और देश की सेवा करने के लिए कड़ी मेहनत कर रहे हैं।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

Recent Comments