रायपुर। अमित जोगी ने दिल्ली में गृहमंत्री अमित शाह से मुलाकात कर छत्तीसगढ़ में मिली जीत और सरकार बनाने की बधाई दी,इधर रायपुर खबर पहुंचते ही चर्चा छिड़ गई अब कोई नया राजनीतिक धमाका तो नहीं होने वाला है। इसलिए कि विधानसभा चुनाव में जोगी की पार्टी को मिली करारी हार के बाद पार्टी के अस्तित्व पर ही सवाल खड़ा हो गया है। चुनाव के दौरान यह भी खबर उड़ते रही कि अमित जोगी को भाजपा ने वोट काटने के लिए सभी विधानसभा में प्रत्याशी खड़ा करने सपोर्ट किया है।
टिकट नहीं मिलने से नाराज अधिकांश लोगों ने जोगी की पार्टी के सहारे चुनाव लडऩे का प्रयास भी किया,पर मुंह की खानी पड़ीक्. खुद परिवार के तीन सदस्य चित्त हो गए। माहौल को देखकर लग नहीं रहा था कि ज्यादा दम मार पायेंगे और हुआ भी वही। चूंकि अब पांच साल भाजपा की सरकार है,ऐसे में राजनीतिक ठिकाना तो ढूंढना ही पड़ेगा। भाजपा को जरूरत नहीं हैं चाहे तो स्वमेव भले शामिल हो सकते हैं। वैसे समर्थकों को कहना है कि यह सौजन्य मुलाकात ही थी और कुछ नहीं।
24 दिसम्बर को पार्टी की हुई थी समीक्षा बैठक
विधानसभा चुनाव के बाद 24 दिसंबर में जोगी कांग्रेस की बड़ी बैठक सागौन बंगला रायपुर में रखी गई थी। इसमें विधानसभा चुनाव के सभी प्रत्याशी, पदाधिकारियों की समीक्षा की गई। साथ ही 2024 में होने वाले लोकसभा, नगरी निकाय और पंचायत चुनावों की रणनीति तय की गई थी। इस दौरान अमित जोगी ने सभी लोगो से व्यक्तिगत तैयार पर सुझाव भी मांगा था।
80 प्रतिशत कार्यकर्ता चाहते है भाजपा में विलय
पार्टी सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, जोगी कांग्रेस के 80% कार्यकर्ता पार्टी का विलय भाजपा में चाहते हैं। सभी एक साथ भाजपा में जाने के लिए इच्छुक हैं। हालांकि सभी अमित जोगी ने निर्णय का इंतजार कर रहे हैं। इससे पहले विधानसभा चुनाव के दौरान पार्टी के प्रमुख पदाधिकारी ने भाजपा में प्रवेश किया था।
विधानसभा चुनाव में नहीं खुला खाता
2023 विधानसभा में पार्टी का परफॉर्मेंस अच्छा नहीं रहा। 2018 विधानसभा चुनाव के दौरान जोगी कांग्रेस ने बसपा के साथ गठबंधन कर चुनाव लड़ा था। पिछले चुनाव में जोगी कांग्रेस को 5 सीटें मिली थी। इस बार विधानसभा चुनाव में पार्टी अपना खाता नही खोल पाई। अमित जोगी ने भूपेश बघेल के खिलाफ चुनाव लड़ा था, लेकिन सिर्फ 4822 वोट मिले थे।
अजीत जोगी ने कहा था- सूली पर लटका दो, पर भाजपा को समर्थन नहीं
जेसीसीजे का गठन किया गया तो पूर्व सीएम अजीत जोगी ने कहा था कि वे कभी भाजपा से गठबंधन नहीं करेंगे। आठ धार्मिक ग्रंथों को साक्षी मानकर बयान दिया था कि मुझे सूली पर चढ़ा दिया जाए, चाहे मुझे कुछ भी करना पड़े, मैं मृत्यु को गले लगाना अच्छा मानूंगा। बजाय इसके की सांप्रदायिक फासीवादी ताकतों की प्रतीक भाजपा से गठबंधन नहीं करूंगा।

